सतुलित हार्मोन्स का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव होता है। ये न सिर्फ शरीर की वृद्धि और विकास को प्रभावित करते हैं बल्कि शरीर के सभी तंत्रों की गतिविधियों को नियंत्रित भी करते हैं। लेकिन जब इन हार्मोन्स के स्राव में असंतुलन होता है तो शरीर के पूरे सिस्टम में गड़बड़ी आ जाती है और फिर दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। तंदुरुस्त रहने के लिए हमारे शरीर में जरूरी हार्मोन्स का उचित मात्रा में स्राव होना जरूरी है। स्वस्थ शरीर में ही हार्मोन्स का स्राव संतुलित मात्रा में होता है और हार्मोन्स का संतुलित स्राव ही शरीर को स्वस्थ रखता है।

क्या हैं हार्मोन

महिलाओं में, सर्वाधिक स्पष्ट शारीरिक परिवर्तन 40 और 50 की उम्र में होते हैं लेकिन ये परिवर्तन 30 और 40 साल की उम्र के बीच भी देखे जा सकते हैं। पहले की तुलना में अब अधिक महिलाओं में कम उम्र में ही हार्मोन परिवर्तन के लक्षण उभरते हैं। इस बारे में डॉ. करुणा महल्होत्रा कहती हैं कि हमारे शरीर में कुल 230 हार्मोन होते हैं, जो शरीर की अलग -अलग क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। हार्मोन की छोटी-सी मात्रा ही कोशिका के मेटाबॉलिज्म को बदलने के लिए काफी होती है। ये एक केमिकल मैसेंजर की तरह एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक सिग्नल पहुंचाते हैं। अधिकतर हार्मोन्स का संचरण रक्त द्वारा होता है। कई हार्मोन दूसरे हार्मोन्स के निर्माण और स्राव को नियंत्रित भी करते हैं।

हार्मोनल असंतुलन के सामान्य लक्षण
1. लगातार वजन बढऩा
स्वस्थ वजन को बनाए रखने में जीवनशैली, आहार और शारीरिक श्रम की बड़ी भूमिका है लेकिन सही वजन को बनाये रखने के लिए सिर्फ इन पर ही ध्यान देना जरूरी नहीं है। अनेक महिलाओं में अंतर्निहित (अस्पष्ट) हार्मोनल असंतुलन होता है, जिसके कारण उनके लिये संतुलित वजन को बनाये रखना मुश्किल हो जाता है।

2. पेट की वसा बढऩा
जब अंत: स्रावी प्रणाली (इंडोक्राइन सिस्टम) दवाब में होती है तो कुछ हार्मोन कम मात्रा में निकलते हैं जबकि कुछ अन्य हार्मोन (मुख्य रूप से कोर्टिसोल) अधिक मात्रा में उत्सर्जित होते है। इसके कारण पेट की वसा बढ़ जाती है।

3. कम कामेच्छा
हार्मोनल असंतुलन के महत्वपूर्ण लक्षणों में से एक कामेच्छा में कमी है, जो नींद संबंधी दिक्कतों से शुरू होती है। अच्छी नींद नहीं आने के कारण सेक्स हार्मोन का उत्पादन कम हो सकता है।

5. घबराहट, चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन
एंग्जाइटी और डिप्रेशन होना हार्मोन असंतुलन, विषाक्तता आदि के संकेत होते हैं। यह इस बात का संकेत होता है कि आपके शरीर को जितने पोषण की जरूरत है, उतना पोषण शरीर को नहीं मिल पा रहा है।

6. अनिद्रा और खराब नींद
इसकी शुरुआत शारीरिक तनाव और कोर्टिसोल का स्तर बढऩे से होती है, जो सीधे तौर पर कई प्रकार के हार्मोन असंतुलन का लक्षण बनता है। जीवन में ऐसा समय जरूर आता है जब महिलाएं अनिद्रा से प्रभावित होती हैं।

7. पसीना

कई महिलाओं में, रात में पसीना और हॉट फ्लैशेज होता है। ऐसे संकेत गड़बड़ी के लक्षण होते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि हमारी भावनाएं शरीर के अंदरूनी तापमान को बढ़ा देती हैं।

8. पाचन संबंधित समस्याएं

गैस, पेट का फूलना और पाचन में कमी सामान्य समस्याएं हैं, जिनका संबंध आमतौर पर हार्मोन असंतुलन से नहीं होता है लेकिन इनका संबंध खराब खाद्य पदार्थों के सेवन, भोजन को ठीक से नहीं चबाने और बहुत अधिक खाने से होता है। जब आपका पाचन सही नहीं होता है, तो पोषक तत्वों की कमी के कारण शरीर भूखा रह जाता है।

9. खाने की तीव्र इच्छा
खाने की तीव्र इच्छा और अत्यधिक खाने का सामान्य लक्षण एड्रिनल फटिग, इंसुलिन प्रतिरोधकता, और अन्य हार्मोन असंतुलन होते हैं। ध्यान दें कि इनमें से कई लक्षणों का संबंध अन्य शारीरिक समस्याओं से हो सकता है और आप एक सामान्य रक्त परीक्षण कराकर अन्य अंतर्निहित कारणों का पता लगा सकती हैं।

असंतुलन हार्मोन के कारण
डॉक्टर करुणा कहती हैं कि हार्मोन्स महिलाओं के शरीर को ही नहीं उनके मस्तिष्क और भावनाओं को भी प्रभावित करते हैं। किसी महिला के शरीर में हार्मोन्स का स्राव लगातार बदलता रहता है। यह कई बातों पर निर्भर करता है जिनमें तनाव,पोषक तत्वों की कमी या अघिकता और व्यायाम की कमी या अधिकता प्रमुख है। फीमेल हार्मोन यौवनावस्था, मातृत्व और मोनोपॉज के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो मासिक धर्म और प्रजनन चक्र को नियंत्रित रखते हैं। डॉक्टर करुणा कहती हैं कि आज महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन इसलिए अधिक हो रहा है क्योंकि भोजन में गड़बड़ी आ गई है। जंक फूड और दूसरे खाद्य पदार्थों में पोषक तत्वों की मात्रा तो बहुत कम होती है लेकिन कैलोरी बहुत अधिक। इससे शरीर को आवश्यक विटामिन मिनरल प्रोटीन और दूसरे आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिल पाते। कॉफी, चाय, चॉकलेट और सॉफ्ट ड्रिंक आदि का अधिक उपयोग करने के कारण भी कई महिलाओं की एड्रीनल ग्लैड अत्यधिक सक्रिय हो जाती है, जो दूसरे हार्मोन्स के स्राव को प्रभावित करते हैं। भूख को प्रभावित करने वाले सैंकड़ों हार्मोन हैं, और वे आवश्यक रूप से पारंपरिकतरीके से ग्रंथियों में नहीं बनते हैं। इसका एक उदाहारण लेप्टिन है, जो वसा कोशिकाओं में नहीं बनता है। कुछ अन्य आम कारणों में इंसुलिन,सेक्स हार्मोन – एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रोन, टेस्टोस्टेरॉन,कोर्टिसोल, डिहाइड्रोएपिएंड्रोस्टेरॉन(डीएचईए, एड्रिनल ग्रंथियों में मुख्य रूप से उत्पादित हार्मोन) और ग्रोथ हार्मोन मुख्य हैं।

परीक्षण

हार्मोन के स्तर का पता लगाने केलिए किए जाने वाले परीक्षण निम्न हैं: 

.आईजीएफ -1 (वैकल्पिक), एसई स्ट्राडियल एस प्रोजेस्टेरॉन, नि:शुल्क टेस्टोस्टेरॉन

 2 नि:शुल्क टी 3, अल्ट्रा सेंसिटिव ,

.टीएसएच, एसडीएचईएएस, एस कोर्टिसोल,एसएफएसएच ,एचएलएच,

.एस प्रोलेक्टिन और एस इंसुलिन खर्च 4000से 7000 रुपये के बीच, प्रयोगशाला के आधार पर।

इन परीक्षणों को कब कराना चाहिए?

छह महीने में एक बार यदि आप उपचार करा रही हैं और सप्लीमेंट्स या दवा का सेवन कर रही हैं, तो आपको ये परीक्षण दो महीने के बाद कराने की जरूरत है, इसके छह महीने बाद दोबारा परीक्षण कराएं और यदि सब कुछ ठीक है तो फिर सालाना परीक्षण कराएं।

हार्मोन के स्तर को सही करें
जीवन शैली में थोड़ा बदलाव हार्मोन्स के संतुलित स्राव में काफी मददगार हो सकता है। जैसे-

  • पत्तेदार सब्जियों और फलों का प्रचुर मात्रा में सेवन करें, रोजाना कम से कम पांच बार इनका सेवन करें। फाइबर के साथ-साथ, फलियों का भी सेवन करें। इनमें आइसोफ्लेवन्स होता है जो पेरिमीनोपॉज, पीएएस और रजोनिवृत्ति के लक्षणों को स्थिर कर सकते हैं।
  • साबुत अनाज (जटिल कार्बोहाइड्रेट) में फाइबर और विटामिन बी की मात्रा अधिक होती है। दोनों ही हार्मोन संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • कम वसा वाले आहार का सेवन करें। जैतून और कनोला तेल जैसे असंतृप्त वसा का चयनकरें। मांस और डेयरी उत्पादों का सीमित मात्रा में सेवन करें और बहुत अधिक वसा का सेवन करने से परहेज करे जिन्हें पचाने के लिए काफी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
  • अखरोट, अलसी और सामन और सार्डिन जैसी ऑयली मछलियों के तेल जैसे ओमेगा 3 एसेंसियल फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें। हेल्दी आहार के साथ-साथ नियमित व्यायाम भी बहुत जरूरी है। सप्ताह में चार से पांच बार एक घंटे कार्डियो व्यायाम कर सक्रिय रहें।
  • मेडिटेशन और डीप रिलेक्सेशन द्वारा अपने मन और शरीर को शांत रखने की कोशिश करें।

(कॉस्मेटिक स्किन एंड होम्योक्लीनिक की होम्योफिजीशियन डॉ. करुणा मल्होत्रा से बातचीत पर आधारित।)