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संतुलित भोजन, धूप, स्नान और स्वच्छ वायु का प्रयोग किसी भी अवस्था में लाभदायक है। चूंकि प्राकृतिक चिकित्सा, प्रकृति के उचित उपयोग के द्वारा जीवन को सुखी, हर्षयुक्त और दीर्घायु बनाने पर ही सर्वाधिक बल देती है, अत: इन जीवनदायक नियमों का पालन कर केवल मोटापा ही नहीं, वरन् अन्य कई भयंकर बीमारियों से बचा जा सकता है। शरीर के तापक्रम को स्वाभाविक अवस्था में बनाए रखने के लिए निम्न साधनों और क्रियाओं का उचित प्रयोग कर मोटापा दूर किया जा सकता है।

टब बाथ (कटिस्नान)

टब बाथ मोटापा दूर करने का अत्यंत ही लाभदायक उपाय है। इसके लिए खास प्रकार के टब बनाए जाते हैं, जिनमें पानी भरकर आराम से पीछे सिर टिकाकर बैठा जा सकता है। इसमें केवल कमर का हिस्सा ही पानी में डूबा रहना चाहिए। इसके बाद एक छोटे तौलिए से पहले पेट पर हल्का घर्षण करना चाहिए। जिससे मोटापा घटता है। इस क्रिया को दस से तीस मिनट तक किया जा सकता है।

वैज्ञानिक नियम के अनुसार ठंडक ताप की ओर दौड़ती है, अत: इस अर्धस्नान से शरीर के सूखे भाग की गर्मी पेट की ओर आती है और पेट की ठंडक गर्मी को शांत करने का कार्य करती है। इस विधि के प्रयोग से संचित चर्बी के विनष्टीकरण से वजन क्रमश: बिना किसी कमजोरी या कष्ट के कम हो जाता है।

स्टीम बाथ (भाप स्नान)

यह साधन भी वजन कम करने में अति प्रभावी है। इसमें भाप स्नान के निमित्त एक चेम्बर बना रहता है, जिसमें कुर्सी पर बैठकर या खड़े होकर संपूर्ण शरीर को भाप स्नान दिया जाता है। भाप स्नान लेने वाले व्यक्ति का सिर वाला हिस्सा चेम्बर के बाहर रहता है, जिसे गीले तौलिए से ढक दिया जाता है। 

स्नान लेने के क्रम में आवश्यकता होने पर व्यक्ति को पानी पीने के लिए दिया जा सकता है। स्टीम बाथ की समय सीमा बीस से चालीस मिनट तक की ही होनी चाहिए।

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मोटापा दूर करने में सहायक-स्नान 3

फुट बाथ (पाद स्नान)

अधिक चर्बी एकत्रित होने से जब गर्मी उत्पन्न होती है, तब ग्रहण की हुई भोजन सामग्री का रस परिपाक नहीं हो पाता, बल्कि यह तापमान के द्वारा शुष्क हो जाती है। इस बाधा के कारण पैरों के तलवों के भाग में तेज दर्द उठता है। इस उष्णता को फुट बाथ के जरिये दूर किया जा सकता है। फुट बाथ से नियमित मल निष्कासन क्रिया स्वाभाविक होती है, जिससे चर्बी संग्रह कम होता है और मोटापा नियंत्रण में सहायता मिलती है।

मालिश (मसाज)

मालिश क्रिया के द्वारा शरीर में जमे हुए बाह्यï द्रव्य को निकालने का कार्य किया जाता है। शरीर पर उचित दबाव क्रिया शरीर में जमी बाह्यï सामग्री को तरलता प्रदान करती है, जिससे वह नियमित होने वाली रक्त संचालन क्रिया के द्वारा ऑक्सीजन से नष्टï हो जाती है और रक्त पुन: शुद्ध हो जाता है। यह दबाव दो प्रकार से दिया जाता है। पहला हाथों और पैरों के द्वारा तथा दूसरा यंत्रों के द्वारा। मोटापे की अवस्था में चिकित्सक अपने उचित दबाव का प्रयोग करके कमजोर और रुग्ण शरीर में संचित अतिरिक्त चर्बी को तरल रूप में निकालने का कार्य करता है।

यंत्रों द्वारा भी यह कार्य अच्छी तरह किया जाता है। इनमें खासकर वाइब्रेशन एवं लहर क्रिया प्रयोग में लायी जाती है। किसी खास अंग की चर्बी निकालने का कार्य यंत्रों द्वारा किया जाता है। इसमें न्यून स्तर से उच्च स्तर तक सम्पूर्ण शरीर को उत्तेजित कर चर्बी घटाने का कार्य सुगमता से किया जाता है।

तैराकी

नदी, तालाब अथवा सागर की लहरों में शरीर को क्रियान्वित करने का कार्य अत्यंत लाभदायक है। इसमें जहां पानी का संपर्क शरीर की उष्णता नष्ट करता है, वहीं शारीरिक परिश्रम शरीर में स्थित चर्बी को घटाने का कार्य तत्परता से करता है। इसलिए खेल-कूद और तैराकी में रत व्यक्ति को कभी मोटापा नहीं घेर पाता है।