खांसी व जुखाम से परेशान हैं तो कोई गोली लेने से पहले हमारे नुस्खे आजमा लें, निश्चित रूप से लाभ होगा।

खांसी, जुखाम के घरेलू उपाय

  • 65 तुलसी की पत्तियां और 8 काली-मिर्च दोनों को पाव-भर पानी में उबालिए, अच्छी तरह औट जाने पर छान लें। दूध और मीठा डालकर चाय की तरह सेवन करना चाहिए। मामूली बुखार और जुखाम में इससे लाभ होता है। चाय पीने वाले रोगियों के लिए यह चाय बड़ी उत्तम है। जाड़े के दिनों में वैसे भी इसका सेवन किया जा सकता है।
  • जुखाम, खांसी, श्वास और सर्दी के दिनों में यह बहुत लाभप्रद है। जुखाम के खत्म करने में तो यह रामबाण का काम करती है। 3 माशा अदरक और 1 तोला गुड़ दोनों को पाव-भर पानी में उबालें, एक छटांक, शेष रहने पर छान लें और थोड़ा गर्म-गर्म ही पीकर कपड़ा ओढ़कर सो जाएं।
  • काली खांसी-5 ग्राम अनार का छिलका थोड़े दूध में उबालकर पीने से काली खांसी में आराम मिलता है।
  • सूखी खांसी के लिए-मुनक्का, मुलहठी, बादाम की गिरी, समान भाग लेकर बारीक पीसकर चने के बराबर की गोलियां बना लें। दो-दो गोलियां दिन में चार बार मुंह में डालकर चूसें (मुनक्के के बीज निकाल दें।)
  • कुकुर खांसी-अमरूद को भूमल में रखकर सेककर खाने से कुकुर खांसी ठीक हो जाती है, या कच्चे अमरूद का छिलका चबाकर उसका रस चूस लें, इससे भी खांसी से आराम होता है।
  • अदरक का रस 12 ग्राम, शहद 12 ग्राम, दोनों को गुनगुना कर दिन में दो बार पिएं। खांसी के लिए बढ़िया दवा है। परहेज-खटाई, दही, लस्सी का सेवन न करें।
  • कच्चा प्याज खाने से जुखाम का पानी नाक से बहना बंद हो जाता है।
  • शहद 2 चम्मच और गाय का घी आधा चम्मच, दोनों को मिला लें, इसके साथ एक चम्मच त्रिफला चूर्ण मिलाकर सुबह चाट कर सेवन करना चाहिए।
  • पांच ग्राम अदरक के रस में, पांच ग्राम तुलसी का रस मिलाकर दस ग्राम शहद के साथ लें।
  • एक गिलास गर्म दूध में पांच काली मिर्च पकाएं और सुबह-शाम सेवन करें।
  • नौसादर और चूना बराबर लें, पीसकर शीशी में भर लें और मजबूत कार्क लगाकर इसे चार बार सूंघें।
  • दो नींबुओं के रस में बराबर की मात्रा में काली मिर्च एक रत्ती और शहद दो रत्ती मिलायें। रात को चाटकर सो जायें तो सवेरे गला साफ हो जायेगा।
  • तुलसी और अदरक की चाय पीने से सर्दी, जुखाम तथा शरीर का दर्द दूर हो जाता है।
  • तुलसी के रस में शहद मिलाकर चाटने से गले की खराबी, सूखी खांसी और कफ वाली खांसी दूर हो जाती है। प्रात:काल तुलसी की दो-चार पत्तियां प्रतिदिन चबाने से रक्त संचालन सही रहता है।
  • खांसी होने पर हल्दी को आग पर भूनकर पीस लें और पानी के साथ इसे लें तो खांसी जाती रहती है।
  • हल्दी का धुआं देने से जुखाम-नजला दूर हो जाता है।
  • इलायची के दानों का चूर्ण दो ग्राम और सोंठ का चूर्ण दो ग्राम लेकर दोनों को शहद में मिलाकर चाटने से खांसी दूर होती है।
  • गले के अन्दर जो काकल होता है उसके बढ़ने से खांसी होने लगती है। दालचीनी और मांजूपुल का महीन चूर्ण समभाग मिलाकर प्रात:काल अंगुली या अंगूठे से काकले पर लगाएं और थोड़ी देर लार थूकते रहें। इससे खांसी बंद हो जाती है।
  • पके हुए सेब का रस एक गिलास निकालकर, मिश्री मिलाकर प्रात: पीते रहने से पुरानी खांसी ठीक हो जाती है।
  • आठ भाग अनार के छिलके का चूर्ण, एक भाग सेंधा नमक मिलाकर पानी डालें व गोलियां बना लें। एक-एक गोली तीन बार चूसने से खांसी ठीक हो जाती है।
  • 60 ग्राम सरसों के तेल में लहसुन की एक गांठ साफ कर उसमें डालकर रख लें। इस तेल से सीने व गले पर मालिश करें।
  • 20 ग्राम गेहूं, 9 ग्राम सेंधा नमक, पात्रा-भर पानी में औटाकर तिहाई पानी रहने पर, छानकर पीने से सात दिन में खांसी मिट जाती है।
  • खांसी, कुकुर खांसी, जुखाम आदि में मक्की का भुट्टा जलाकर उसकी राख पीसकर इसमें स्वादानुसार सेंधा नमक मिला लें। नित्य चार बार चौथाई चम्मच गर्म पानी से फंकी लें। लाभ होगा।
  • दूध में 5 पीपल डालकर गर्म करें। शक्कर डालकर नित्य सुबह-शाम पियें। इससे जुखाम, खांसी, दमा आदि रोग में लाभ होगा।
  • जुखाम के साथ बुखार भी हो तो गर्म पानी, शहद और अदरक के रस में चुटकी-भर मीठा सोडा डालकर पिला दें तथा पसीना आने दें। पसीने के दौरान शरीर को हवा न लगने दें।
  • पुराना या बिगड़ा हुआ जुखाम हो तो काली मिर्च 3 ग्राम, गुड़ 25 ग्राम और गाय के दूध की दही 50 ग्राम ले लें। काली मिर्च को खूब बारीक पीसकर तीनों चीजों को अच्छी तरह मिला लें। प्रात:काल एक-एक ग्राम लेकर सेवन करें।
  • दालचीनी व जायफल को बराबर मात्रा में पीसकर सुबह-शाम लेने से जुखाम ठीक हो जाता है।
  • कफ अधिक हो तो 100 ग्राम सरसों पीसकर उसमें 100 ग्राम हल्दी (मंद आंच पर भूनकर) मिलाकर इस चूर्ण को 5-5 ग्राम सुबह-शाम, शहद के साथ लेने से लाभ होता है।
  • यदि अमरूद के फल को गर्म राख या बालू में भून कर खाया जाए तो पुराने से पुराना जुखाम भी शीघ्र नष्ट हो जाता है।
  • थोड़ी-सी अजवायन को गर्म करके पतले कपड़े में बांध लें, हथेली पर  रगड़कर बार-बार सूंघना जुखाम में आराम देता है एवं सिरदर्द व भारीपन तुरन्त मिट जाता है।
  • सर्दी-जुखाम, कफ-खांसी, पेट के कृमियों के लिये मूली के बीजों का चूर्ण फायदेमंद रहता है।

दमा दूर करने के उपाय

  • दमे के रोगी के लिए देसी उपायों में कई रामबाण औषधियां मौजूद हैं। अपनी स्थिति व लक्षणों के अनुसार आप चुनें व लाभ पाएं।
  • सफेद जीरा तीन माशे, छोटी दुद्धी चार माशे-इन दोनों को आधा छटांक पानी में पीसकर छान लें। जरा-सा सेंधा नमक डालकर प्रात:काल पिएं।
  • धाय के फूल, बबूल का बक्कल, कटेरी अडूसा, छोटी पीपल, सोंठ-इन सबको तीन-तीन माशे लेकर आधा सेर पानी में पकाएं। जब पानी आधा पाव रह जाए तो छानकर छ: माशे शहद मिलाकर पिएं।
  • सफेद दखनी मिर्चों को भूनकर उसमें बराबर मिश्री मिला लें। इसमें से एक-एक माशा दिन में कई बार सेवन करें।
  • पुराने दमे वाले फूली हुई फिटकरी और मिश्री दस-दस ग्राम पीसकर रख लें। दिन में एक-दो बार डेढ़ ग्राम की फंकी ताजा पानी के साथ लें। दूध, घी, मक्खन, तेल, खटाई, तेज मिर्च मसाले का परहेज रखें। मक्खन निकला, सब्जियों के सूप आदि लें।
  • दमे के रोगियों के लिये शहद, प्याज, लहसुन, तुलसी की चाय और गुड़ अमृत हैं। दालचीनी मुंह में डालकर चूसते रहें।
  • जाड़े के मौसम में तिल-गुड़ के लड्डू या गजक का सेवन करते रहने से दमा, खांसी, जुकाम आदि रोगों में फायदा पहुंचता है। इनका सेवन वैसे  भी रोग-प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने में सहायक रहता है।
  • यदि सांस फूलती है या हल्का दमे का रोग है तो रोगी को पीपल, कालीमिर्च, सोंठ व चीनी को बराबर मात्रा में पीसकर दिन में तीन-चार बार मुंह में रखकर चूसना चाहिए या शहद मिलाकर खा लेना चाहिए। इसके अलावा घी, चावल, सिगरेट, आलू, ठण्डी लस्सी, फ्रिज का पानी व उड़द की दाल का कम से कम या बिल्कुल प्रयोग न करें।
  • द्य फूली हुई फिटकरी रत्ती-भर मुंह में डाल लें और चूसते रहें। न कफ  बनेगा और न ही दमा सताएगा।
  • खांसी व दमा में 5 ग्राम मुलेठी का चूर्ण एक गिलास पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए तो उस पानी को आधा सुबह तथा आधा शाम को पिएं। 3-4 दिन ऐसा करने से कफ  पतला होकर निकल जाएगा।
  • शलगम का रस एक कप, गाजर का रस एक कप, पत्तागोभी का रस एक कप, इसमें सेम की फली का रस आधा कप मिलाकर एकसार कर लें। इसमें थोड़ा-सा सेंधा नमक मिलाकर दिन में तीन बार पिलाएं। कुछ ही दिनों में दमा, खांसी, सीने की जकड़न तथा कफ  बनना आदि रोग नष्ट हो जाते हैं।
  • कालीमिर्च दो ग्राम, पिपरमींट दो ग्राम, सोंठ दो ग्राम, हरी इलायची दो ग्राम, को पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 6 ग्राम गुड़ में मिलाकर चने के बराबर प्रतिदिन दिन में दो-तीन बार चूसें तो श्वास फूलना, खांसी व दमे के रोग से राहत मिलती है।
  • यदि आपको पान खाने की आदत है तो आक की छोटी-सी कोपल सुबह-शाम पान में डालकर चबा जाएं। धीरे-धीरे दमा से मुक्ति मिलेगी।
  • श्वास में भुनी अलसी 3 ग्राम तथा कालीमिर्च 7 ग्राम पीसकर दो चम्मच शहद में मिलाकर सुबह-शाम चटाएं, अवश्य आराम होगा।
  • पिसी हल्दी 5 ग्राम गुनगुने जल से लेते रहने से दमा रोग का भय नहीं रहता।
  • कफ सूख जाने पर 10 ग्राम मूलहठी पाउडर को 25 मिली जल में बालकर छानकर घी, मिश्री, सेंधा नमक मिलाकर पिलाने से कफ गल जाता है और सरलता से बाहर आ जाता है।
  • तुलसी व अदरक का रस 3-3 ग्राम, शहद 5 ग्राम मिलाकर सुबह-शाम चाटें। दमा, खांसी व ज्वर में लाभ होगा।
  • दमा, खांसी में मौसमी के रस में, रस का आधा भाग गर्म पानी, जीरा, सोंठ मिलाकर पिलाएं।
  • शलगम, बन्दगोभी, गाजर और सेम का रस मिलाकर सुबह-शाम दो सप्ताह तक पीने से लाभ होता है।
  • आक की कलियां और कालीमिर्च-दोनों को समान पीसकर चूर्ण बनाकर 1-2 ग्राम शहद के साथ देने से दौरे में राहत मिलती है।
  • दमा, सूखी खांसी में 15 ग्राम गुड़ और 15 ग्राम सरसों का तेल मिलाकर चाटने से लाभ होता है।
  • साधारण खांसी में अदरक के रस में थोड़ा शहद तथा जरा-सा काला नमक  मिलाकर चाटें। लाभकारी योग है।
  • साफ  की हुई अजवायन 1 ग्राम नित्य रात्रि के समय पान के बीड़े में रखकर खाने से खांसी में लाभ मिलता है।
  • छिलके सहित अखरोट की भस्म तैयार कर इसे शहद में मिलाकर चाटने से खांसी में लाभ होता है। 

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