अनिद्रा

संतोषप्रद शारीरिक तथा मानसिक कार्यसंपादन के लिए यथेष्ट शक्ति, ओज, साहस और बल आदि की मात्रा इसी विश्राम की स्थिति पर निर्भर करती है। बहुत से स्त्री-पुरुष अपनी समस्याओं से इस तरह जूझते रहते हैं कि उन्हें तनिक भी विश्राम नहीं मिलता। इसका परिणाम यह होता है कि वे बेचैन, परेशान और घबराए रहते हैं। यह एक दुखद अवस्था है, क्योंकि अनेक व्यक्ति विश्राम की इच्छा के बावजूद विश्राम नहीं कर पाते। विश्राम का अभाव व्यक्ति की सामान्य अवस्था में अनेक परिवर्तन कर देता है। यद्यपि इनमें से अधिकांश परिवर्तनों को व्यक्ति स्वयं अच्छी तरह जान सकते हैं।

अनुपयुक्त विश्राम के लक्षण व्यक्ति में साफ देखे जा सकते हैं, जैसे- आकृति एवं क्रियाकलाप में मंदता, मुखमंडल पर अस्वाभाविक आकर्षण, सौंदर्य तथा कांति का अभाव, चेहरे और आंखों में बोझिलता, शीघ्र थक जाना, स्वाभाविक दक्षता से मानसिक कार्य करने में कठिनाई तथा तत्परता एवं प्रसन्नता का अभाव। बहुत से लोग दैनिक जीवन की वस्तुओं के उपयोग तथा कार्य को प्राथमिकता देने में कुछ गलतियां करने के कारण यथोचित रीति से विश्राम नहीं कर पाते हैं। इसका कारण यह है कि अनेक लोगों को विश्राम की कुछ अनिवार्यताओं के संबंध में उपर्युक्त जानकारी नहीं रहती। जहां एक वस्तु एक व्यक्ति के विश्राम में खलल डालती है, वहीं दूसरे व्यक्ति के लिए विश्रामदायक हो सकती है। अत: इस विभिन्नता को समझते हुए विश्राम में बाधक घटकों की सूची पर दृष्टिपात किया जाना चाहिए। अधिकांश लोगों के विश्राम में बाधा डालने वाली चीजें हैं- चाय, कॉफी, तंबाकू और धूम्रपान।

कुछ अन्य चीजें भी हैं जो बाधा उत्पन्न कर सकती हैं, जैसे अधिक मात्रा में भोजन करना, तामसी भोजन करना, सोते समय या सोने से पहले उत्तेजक पुस्तकें, पत्रिकाएं एवं अन्य सामग्री पढ़ना आदि अत: यथोचित विश्राम पाने के लिए कुछ अनिवार्यताएं हैं, जिन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इनके अंतर्गत विश्राम काल में शरीर, स्थान, बिस्तर तथा वातावरण की उपर्युक्त दशा सम्मिलित हैं।

यदि शरीर स्वच्छ न हो, बिछावन खटमलों से भरा हो और वातावरण कोलाहल पूर्ण हो, तो भी विश्राम नहीं मिलता। इससे उदर रोग, हृदय रोग, आंतरिक पीड़ाएं, सिर दर्द आदि समस्याएं पैदा हो जाती हैं। बाह्य रूप से भी विश्राम की कमी व्यक्ति के चेहरे पर झलकने लगती है। व्यक्ति के चेहरे, आंखों तथा समस्त अभिव्यक्तियों एवं आचार-व्यवहार में उदासी छा जाती है। मुखमंडल तथा शरीर की त्वचा अपनी स्वाभाविक कांति और रूप-रंग खो देती है। कुछ मामलों में काले धब्बों या बड़े धब्बों के रूप में त्वचा का काला पड़ना अस्वाभाविक नहीं है। व्यक्ति शीघ्र ही थक जाता है। शीघ्र क्रुद्ध हो उठता है तथा छोटी सी बात के लिए बदहवास हो जाता है। यही नहीं, सामाजिक सभाओं या मित्रों की मंडली में उल्लसित रहना कठिन हो जाता है।

दीर्घकालीन विश्रामहीन अवस्था व्यक्ति के घर के कार्यों, परिवार, व्यवसाय, आजीविका और अन्य सामान्य चीजों पर उचित ध्यान देने में असमर्थ बना देती है। इस प्रकार शीघ्र ही आंतरिक एवं बाह्यï समस्याओं का पहाड़ आ खड़ा होता है। इससे बचने के लिए निम्नवत बातों पर ध्यान दें- 

  • अधिक मसालों रहित सादा भोजन करें। तामसी पदार्थ, अत्यधिक नमक और मिर्च आदि का परित्याग करें।
  • यदि धूम्रपान के आदी हों, तो सोने से पहले एक सिगरेट पी लें और दूसरी सिगरेट दिन में किसी भी समय पी जा सकती है।
  • विश्राम कक्ष में जाते समय ऐसी पुस्तकें पत्रिकाएं अथवा अन्य सामग्री न पढ़ें, जो उत्तेजित करने वाली और काम-वासना भड़काने वाली होती हैं। इनसे मन में तरह-तरह के विचार उत्पन्न होते हैं जो विश्राम में बाधा पैदा करते हैं।
  • विश्रामकाल में स्वास्थ्य की दृष्टि से शरीर स्वच्छ रखें। दिन में एक बार गर्म या ठंडे जल से स्नान अवश्य करें। इसके साथ ही मुंह, दांत, आंखें, हाथ और पैर अच्छी तरह साफ कर लें। पैरों को गुनगुने पानी से धोकर, सूखे तौलिए से पोंछ डालें। यह सब क्रियाएं विश्राम में बड़ी सहायक हैं।

यह भी पढ़ें –इन तरीकों को आजमाकर रख सकती हैं अपने घुंघराले बालों को हेल्दी

स्वास्थ्य संबंधी यह लेख आपको कैसा लगा? अपनी प्रतिक्रियाएं जरूर भेजें। प्रतिक्रियाओं के साथ ही स्वास्थ्य से जुड़े सुझाव व लेख भी हमें ई-मेल करें-editor@grehlakshmi.com