कमर दर्द
अनियमित जीवन शैली, मोटापा, घंटो मैट्रो या बसों में खड़े रहना, भागदौड़ भरा जीवन, लैपटाप बैग जैसे भारीभरकम सामान को कंधों पर ढोना और उठने बैठने के गलत तरीके कमर दर्द के मुख्य कारण हैं। यदि आप इन बेहतरीन आसनों को अपनी लाइफस्टाइल में शामिल करते हैं तो अवश्य ही कमर दर्द से निजात पा सकते हैं :
 
मार्जरी आसन या कैट पोज 
 
अपने घुटनों को मोड़कर वज्रासन में बैठें। फिर अपने घुटनों के बल खड़े हो जाएँ। आगे की ओर झुककर अपनी हथेलियों को जमीन पर रखें। हाथ घुटनों की सीध में होने चाहिए तथा बाहें और जांघें समानांतर होने चाहिए। श्वास लेते हुए सिर को ऊपर की ओर उठाना है, साथ साथ कमर को नीचे की ओर लाना है फिर श्वास छोड़ते हुए सिर नीचे की तरफ तथा कमर ऊपर की ओर ले जानी है। इस अभ्यास को 10-15 बार करें। इस आसन को करने से कमर दर्द में बहुत जल्दी आराम मिलता है। इससे कमर, कंधे तथा गर्दन में फ्लेक्सिबिलिटी आती है जिससे पूरी रीढ़ की हड्डी की जकड़न दूर होती है।  
 
 
सेतु बंधासन
 
पीठ के बल सीधा लेट जाएँ। अपने घुटनों को मोड़ें तथा तलवों को अपने कूल्हों के नजदीक रखने का प्रयास करें। अपने हाथों को शरीर के बगल में रखते हुए हथेलियों से अपनी ऐडियों को पकड़ने का प्रयास करें। श्वास लेते हुए अपनी कमर वाले भाग को ऊपर की ओर उठाएँ। यहाँ यह ध्यान रखना आवश्यक है कि कंधे जमीन पर ही रहें, केवल कमर वाले भाग को जितना ऊपर उठा सकते हैं, उठाना है। फिर श्वास छोड़ते हुए धीरे से वापस आ जाएँ। यदि संभव हो तो कमर को जब ऊपर उठायें तो थोड़ी देर वही रुकने का प्रयास करें। इस अभ्यास को 5-8 बार दोहराना है। इस आसन से कमर दर्द में चमत्कारिक ढंग से लाभ होता है साथ ही कमर की मांसपेशियाँ भी मजबूत होती हैं और रक्त प्रवाह भी सुचारु रूप से होता है। 
सुप्त उदराकर्षण
 
पीठ के बल आराम से लेट जाएँ। घुटने से पैरों को मोड़ें और अपने तलवों को अपने कूल्हों के पास जमीन पर रखें। अपने दोनों हाथों को कंधे के समानांतर फैलाएँ। लंबी गहरी श्वास लें श्वास छोड़ते हुए अपने पैरों को दायीं ओर मोड़ें तथा सिर को बायीं ओर मोड़ें। अपने घुटनों को जमीन से लगाने की कोशिश करें। इसी प्रकार दूसरी दिशा में करें। इस अभ्यास को 5-5 बार प्रत्येक दिशा में करें। इस अभ्यास से लंबे समय तक बैठे रहने से कमर की मांसपेशियों में होने वाले तनाव और जकड़न से आराम मिलता है। इस आसन की खास बात पैरों और कूल्हों के बीच की दूरी है। यदि कूल्हों और तलवों के बीच की दूरी 60 सेमी है तो कमर के निचले हिस्से पर असर पड़ता है जैसे जैसे दूरी कम होती जाती है वैसे वैसे आसन का इफैक्ट कमर के ऊपरी हिस्से की ओर बढ़ता जाता है।  
 
मकरासन 
 
पेट के बल लेट जाएँ। अपने दोनों पैरों के बीच में गैप रखते हुए अपनी ऐड़ियों को दूर दूर बाहर की ओर तथा पंजों को अंदर की ओर आरामदायक स्थिति में रखें। अपने हाथों को कोहनियों से मोड़कर  जमीन पर रखते हुए हथेलियों को अपने गालों के नीचे रखें अर्थात अपने चेहरे को अपनी हथेलियों पर टिकाएँ। अपनी कोहनियों को पास पास रखें इसका सीधा असर कमर के निचले हिस्से पर पड़ता है। लंबी गहरी श्वास लेते रहें। इस आसन को करने से रीढ़ की हड्डी से तनाव दूर होता है तथा कमर दर्द के साथ-साथ स्लिप डिस्क और साइटिका में भी लाभ मिलता है।