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एडीएचडी को करीब से जानना जरूरी है। यह एक मस्तिष्क विकास की स्थिति है।बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया कि वह अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर यानी एडीएचडी का शिकार रही हैं।
ADHD Disorder in Adults: बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट ने एक इंटरव्यू में बताया कि वह अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर यानी एडीएचडी का शिकार रही हैं। सिर्फ आलिया ही नहीं, दुनियाभर की कई महिलाएं इस डिसऑर्डर का शिकार हैं। चिंता की बात यह है कि वे खुद इससे अनजान होते हैं। आइए जानते हैं क्या है अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर।
करीब से जानें इस डिसऑर्डर को

एडीएचडी को करीब से जानना जरूरी है। यह एक मस्तिष्क विकास की स्थिति है। इसमें या तो लोग बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। या कुछ कामों पर बहुत ज्यादा ध्यान देने लगते हैं। इस स्थिति में मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्रों के विकास और एक साथ काम करने के तरीके प्रभावित होते हैं। कई लोगों में यह डिसऑर्डर बचपन में शुरू होता है और वयस्क होने तक रहता है। लिंग के आधार पर यह लोगों को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करता है। शोध बताते हैं कि पिछले कुछ सालों में महिलाओं में यह डिसऑर्डर तेजी से बढ़ रहा है।
महिलाओं में एडीएचडी के लक्षण पहचानें
महिलाओं में एडीएचडी बहुत कॉमन है। हालांकि अधिकांश इसे अपनी पर्सनालिटी का हिस्सा मान बैठती हैं। उन्हें इस डिसऑर्डर की जानकारी नहीं होती। क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. ध्रुति अंकलेसरिया ने एक वीडियो शेयर करके एडीएचडी के लक्षण बताएं हैं।
1. ध्यान न दे पाना
डॉ. ध्रुति के अनुसार एडीएचडी का पहला लक्षण है किसी बात पर ध्यान न दे पाना। यानी जोनिंगआउट। इसमें महिला अपने ख्यालों में इतनी डूबी रहती हैं कि वह सामने वाली की बात को सुनकर भी उस पर पूरी तरह से ध्यान नहीं दे पाती हैं। जब उसका ध्यान जाता है तो वह पूछती है ‘आपने क्या कहा’। आमतौर पर इसे बहुत ही सामान्य बात माना जाता है, लेकिन अगर ऐसा ज्यादा हो रहा है तो यह एडीएचडी का लक्षण हो सकता है।
2. चीजें न संभाल पाना
एडीएचडी का दूसरा लक्षण है डिसऑर्गेनाइजेशन। इसमें महिलाएं अपने किसी भी काम पर फोकस नहीं कर पाती। उनका कोई काम पूरा नहीं हो पाता। चीजें हमेशा फैली रहती हैं। टाइम मैनेजमेंट की कमी रहती है। किसी भी काम की सही योजना नहीं बना पाती हैं। या फिर चीजें रखकर भूल जाती हैं।
3. क्षमता से ज्यादा काम करना
अपनी क्षमता से ज्यादा काम करना और उसमें परफेक्शन खोजना अच्छी बात है। लेकिन कई बार जब यह जुनून बन जाता है तो आपको एडीएचडी होने की आशंका होती है। डॉ. ध्रुति के अनुसार इसमें महिला अपने आप को सही दिखाने के लिए जरूरत और अपनी क्षमताओं से ज्यादा काम करती हैं। साथ ही उसमें परफेक्शन की तलाश करती हैं। यह नॉर्मल नहीं है।
4. मेंटल ओवरलोडिंग
इसमें महिलाएं सारे दिन काम के बारे में सोचती रहती हैं। वह एक काम पूरा करने से पहले ही दूसरा करना शुरू कर देती हैं। रात को सोते समय भी वह यही विचार करती हैं कि उन्हें सुबह क्या करना है। कोई काम छूट तो नहीं गया। यानी उनका दिमाग रिलेक्स नहीं हो पाता है। वह लगातार सोचती हैं।
5. बहुत ज्यादा भावुक होना
एडीएचडी का पांचवां लक्षण है इमोशन सेंसिटिविटी यानी बहुत ज्यादा भावुक होना। इसमें महिलाएं दूसरों की हर बात को दिल पर लगा लेती हैं। उसके बारे में सोचती हैं और दुखी होती रहती हैं। उन्हें दूसरों की बातें बुरी लगती हैं। हर बात पर आपका तुरंत रिएक्शन आता है। वह गिल्ट में जीती हैं। अपनी गलतियां या कमियां खोजने लगती हैं।
जानिए एडीएचडी का इलाज
एडीएचडी के स्पष्ट कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। हालांकि शोधकर्ताओं के अनुसार इसके पीछे अनुवांशिक कारण हो सकते हैं। इस डिसऑर्डर का कोई इलाज भी अभी तक नहीं खोजा जा सका है। इसके लिए आप थेरेपी और दवाएं ले सकते हैं।
