Overview:सिर्फ कुछ मिनटों की सही ब्रीदिंग टेकनीक आपकी एंजायटी को करेगी दूर, जानिए साइंटिफिकली प्रूव्ड 4-6 रूल
सिर्फ कुछ मिनटों की सही ब्रीदिंग तकनीक आपकी ऐंग्जाइटी को तुरंत कम कर सकती है। साइंटिफिक स्टडीज़ के अनुसार, 4-6 रूल – यानी 4 सेकंड में सांस अंदर लेना और 6 सेकंड में धीरे-धीरे छोड़ना – ब्रेन और बॉडी को रिलैक्स करता है, हार्ट रेट को संतुलित करता है और तनाव घटाता है। इसे रोजाना कुछ मिनट अपनाने से मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ता है।
4-6 rule to ease Anxiety : जब हम तनाव में होते हैं तो लोग अक्सर कहते हैं, “एक गहरी सांस लो, सब ठीक हो जाएगा।” लेकिन क्या वाकई गहरी सांस लेना हमेशा मदद करता है? एक्सपर्ट्स का कहना है — नहीं, हर बार नहीं। कभी-कभी गहरी सांस लेना उल्टा असर डाल सकता है। सायकोथेरपिस्ट डेल्ना राजेश बताती हैं कि जब हमारी चेस्ट टाइट महसूस करती है और हम ज़्यादा गहरी सांस लेते हैं, तो शरीर को लगता है कि खतरा और बढ़ गया है। असली राहत अंदर नहीं, बल्कि धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ने में होती है।
यही कारण है कि आजकल मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ 4-6 नियम की सलाह देते हैं। इस तकनीक में आप छह तक गिनते हुए सांस को बाहर छोड़ते हैं और चार तक गिनते हुए हल्की सांस अंदर लेते हैं। इससे नर्वस सिस्टम को यह सिग्नल मिलता है कि अब सब सेफ है, और ब्रेन “रेस्ट मोड” में चला जाता है।
यह तरीका किसी जादू से कम नहीं लगता, लेकिन असल में यह बायोलॉजिकल प्रोसेस पर बेस्ड है। कुछ ही मिनटों में यह शरीर को “हाई अलर्ट” से निकालकर शांत स्थिति में लाने में मदद करता है। आइए जानते हैं इस नियम के पीछे की साइंस, इसे कैसे करें और यह anxiety में कैसे असर दिखाता है।
क्या है 4-6 नियम और कैसे करता है काम

4-6 नियम एक बहुत सरल ब्रीदिंग तकनीक है, जिसे सायकोथेरपिस्ट धारा घुंटला ने भी बताया है। इसके अनुसार, पहले छह सेकंड तक धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें, फिर चार सेकंड तक हल्की सांस अंदर लें। इस प्रक्रिया को पाँच बार दोहराने से शरीर और दिमाग में तुरंत बदलाव महसूस होता है। लंबी एक्सहेल (बाहर की सांस) हमारे नर्वस सिस्टम को शांत करती है, जिससे दिल की धड़कन नॉर्मल होती है और भागते हुए विचार धीरे-धीरे थमने लगते हैं। यही कारण है कि एक्सपर्ट्स इसे एंग्ज़ायटी कम करने का आसान तरीका मानते हैं।
4-6 नियम कैसे करें — आसान तरीका

इसे करने के लिए किसी खास उपकरण या समय की ज़रूरत नहीं होती। एक शांत जगह चुनें और आराम से बैठें। पहले छह तक गिनते हुए धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें, फिर चार तक गिनते हुए हल्की सांस अंदर लें। यह प्रक्रिया पाँच बार दोहराएं। तीसरे साइकिल तक पहुंचते-पहुंचते शरीर खुद को हल्का महसूस करने लगता है। सीने का दबाव कम होता है, हाथों का कांपना कम हो जाता है और thoughts की स्पीड स्लो पड़ने लगती है। यह तकनीक इतनी सिम्पल है कि आप इसे कहीं भी — ऑफिस, घर या सफर में भी कर सकते हैं।
आंखों की मूवमेंट से बढ़ता असर

डेल्ना राजेश के अनुसार, 4-6 नियम के साथ एक और छोटा उपाय और असरदार हो सकता है — आंखों को धीरे-धीरे दाएं से बाएं घुमाना। यह तरीका हमारे ब्रेन में REM नींद (Rapid Eye Movement) जैसी स्थिति पैदा करता है, जिससे शरीर को रिलैक्सेशन का सिग्नल मिलता है। यह छोटा-सा अभ्यास चिंता के समय शरीर और दिमाग दोनों को “बैलेंस मोड” में लाने में मदद करता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह कोई ट्रिक नहीं बल्कि साइंस है — अपने सर्वाइवल सिस्टम को दोबारा संतुलित करने का एक प्राकृतिक तरीका।
4-6 नियम का असर कब और कैसे महसूस होता है
डेल्ना बताती हैं कि इस नियम का असर लगभग तुरंत महसूस होता है। तीसरे राउंड तक पहुंचते ही चेस्ट का प्रेशर कम हो जाता है, सांसें नॉर्मल हो जाती हैं और दिमाग शांत होने लगता है। चिंता भले पूरी तरह गायब न हो, लेकिन शरीर को यह एहसास हो जाता है कि अब सब सेफ है। शरीर पहले शांत होता है, फिर धीरे-धीरे ब्रेन भी उसी रिदम में आ जाता है। यही वजह है कि इसे एक तरह का “रीसेट बटन” कहा जाता है, जो हमें घबराहट से निकालकर शांति की ओर ले जाता है।
चिंता कमजोरी नहीं, शरीर की रिएक्शन है
डॉ. सुजीत पॉल के अनुसार, यह छोटी-सी प्रैक्टिस हर किसी के लिए ज़रूरी टूल की तरह होनी चाहिए। यह साइंटिफिकली प्रूव्ड तरीका है जो ब्रेन और शरीर को दोबारा बैलेंस में लाता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि चिंता कोई कमजोरी नहीं है, बल्कि यह शरीर का एक नेचुरल रिएक्शन है। इससे डरने की ज़रूरत नहीं है। बस सही तरीके से सांस लेकर, अपने शरीर को शांत करना सीखें। याद रखें — 4-6 नियम कोई जादू नहीं, बल्कि शरीर और दिमाग की बायोलॉजी है, जो हमें सिखाती है कि शांति पाने के लिए पहले शरीर को सुकून देना ज़रूरी है।
