Summary: प्लास्टिक-फ्री किचन: हेल्दी और पर्यावरण-अनुकूल जीवन की ओर कदम
प्लास्टिक से निकलने वाले हानिकारक केमिकल्स सेहत और पर्यावरण दोनों को नुकसान पहुँचाते हैं। स्टील-कांच के कंटेनर, कॉटन बैग्स, मिट्टी-तांबे के बर्तन और पैकेजिंग-फ्री शॉपिंग जैसे छोटे बदलाव आपके किचन को पूरी तरह सुरक्षित और सस्टेनेबल बना सकते हैं।
Plastic Free Kitchen: आज के दौर में प्लास्टिक हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है। सुबह उठते ही पानी पीने के लिए हम प्लास्टिक बोतल उठाते हैं, नाश्ते का डिब्बा प्लास्टिक का होता है और किराने का सामान भी प्लास्टिक पैकेजिंग में आता है। धीरे-धीरे यही प्लास्टिक हमारे किचन पर कब्ज़ा कर चुका है। लेकिन समस्या यह है कि प्लास्टिक न तो जल्दी नष्ट होता है और न ही पूरी तरह सुरक्षित है। रिसर्च के अनुसार, प्लास्टिक से निकलने वाले हानिकारक केमिकल्स हमारे खाने और पानी में घुल जाते हैं, जिससे हार्मोनल असंतुलन, कैंसर और पाचन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
अगर आप भी चाहते हैं कि आपका परिवार सेहतमंद रहे और पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे, तो बदलाव की शुरुआत अपने किचन से कीजिए। अच्छी बात यह है कि यह बदलाव मुश्किल नहीं है। बस कुछ छोटे-छोटे उपाय अपनाकर आप अपने किचन को पूरी तरह प्लास्टिक-फ्री बना सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे 7 आसान और असरदार उपाय, जिन्हें अपनाना हर किसी के लिए संभव है।
स्टील और कांच के कंटेनर अपनाएं
प्लास्टिक के डिब्बों की जगह स्टील और कांच के कंटेनर का इस्तेमाल करें। ये ज़्यादा टिकाऊ होते हैं और बार-बार इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इनमें रखा खाना लंबे समय तक फ्रेश रहता है और इसमें कोई हानिकारक केमिकल नहीं घुलता।
कॉटन और जूट बैग्स का इस्तेमाल करें
सब्ज़ी और किराना खरीदते समय प्लास्टिक की थैलियों की बजाय कॉटन या जूट बैग साथ रखें। ये न सिर्फ मजबूत और लंबे समय तक चलने वाले होते हैं बल्कि धोकर दोबारा भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इस छोटे बदलाव से आप हर हफ्ते दर्जनों प्लास्टिक बैग्स बचा सकते हैं।
प्लास्टिक की पानी की बोतलें छोड़ें
प्लास्टिक बोतल में पानी रखने से उसमें मौजूद माइक्रोप्लास्टिक आपके शरीर में जा सकता है। इसकी जगह स्टील, तांबे या कांच की बोतलें इस्तेमाल करें। तांबे के बर्तन तो पानी को प्राकृतिक रूप से शुद्ध भी करते हैं, जिससे सेहत को अतिरिक्त फायदे मिलते हैं।
मिट्टी और ताम्बे के बर्तनों का प्रयोग करें

हमारी परंपराओं में मिट्टी और तांबे के बर्तन का इस्तेमाल आम था। मिट्टी के बर्तन खाने का स्वाद बढ़ाते हैं और इसे प्राकृतिक ठंडक देते हैं। वहीं तांबे का जग पानी को शुद्ध करके पाचन तंत्र को मज़बूत बनाता है। इन बर्तनों को अपनाकर आप प्लास्टिक से भी दूरी बना सकते हैं।
प्लास्टिक रैप की जगह बीज़वैक्स रैप
अक्सर लोग खाना स्टोर करने के लिए क्लिंग फिल्म या एल्युमिनियम फॉयल का इस्तेमाल करते हैं। इसकी बजाय कपड़े से बने ढक्कन या बीज़वैक्स रैप चुनें। ये न सिर्फ इको-फ्रेंडली होते हैं बल्कि खाने को लंबे समय तक सुरक्षित भी रखते हैं।
डिस्पोजेबल प्लास्टिक आइटम्स से बचें
पार्टियों या आउटडोर पिकनिक में डिस्पोजेबल प्लेट्स और कप का इस्तेमाल आम है, लेकिन ये सीधे-सीधे प्रदूषण बढ़ाते हैं। इनकी जगह स्टील, बांस या पाम लीफ (खजूर के पत्ते) से बने बायोडिग्रेडेबल बर्तनों का इस्तेमाल करें। ये पूरी तरह प्राकृतिक और किफायती विकल्प हैं।
शॉपिंग में पैकेजिंग पर ध्यान दें
किचन शॉपिंग के दौरान ऐसे ब्रांड और स्टोर्स चुनें जो कम से कम प्लास्टिक पैकेजिंग इस्तेमाल करते हों। ढीला अनाज, दालें और सब्ज़ियाँ लेने की आदत डालें। इससे न सिर्फ पर्यावरण को फायदा होगा बल्कि आपका किचन भी नेचुरल और सस्टेनेबल बनेगा।
प्लास्टिक-फ्री किचन बनाने के लिए बड़े बदलाव की ज़रूरत नहीं है। स्टील और कांच के कंटेनर, कॉटन बैग्स, मिट्टी के बर्तन और पैकेजिंग-फ्री शॉपिंग जैसे छोटे-छोटे कदम आपके किचन को हेल्दी और पर्यावरण-फ्रेंडली बना सकते हैं। याद रखें – आपका एक छोटा कदम भी धरती और आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है।
