Bula Choudhury is a renowned and courageous swimmer from India who created history in the world of swimming.

summary: दुनिया की पहली महिला तैराक बनीं बुला चौधरी, कैसे बनीं संघर्ष की मिसाल

बुला चौधरी भारत की एक मशहूर और साहसी तैराक हैं, जिन्होंने तैराकी की दुनिया में नया इतिहास रच दिया। वे दुनिया की पहली महिला बनीं जिन्होंने सातों महाद्वीपों के सात महासागर पार किए।

Bula Choudhury: बुला चौधरी भारत की एक मशहूर महिला तैराक हैं, जिन्होंने अपने मेहनत और साहस से दुनिया में नाम कमाया। उन्होंने बहुत कम उम्र में तैराकी शुरू की और धीरे-धीरे भारत की सबसे सफल तैराक बन गईं। बुला चौधरी लंबी दूरी की तैराकी के लिए जानी जाती हैं। वे समुद्र की खतरनाक लहरों को पार करके कई देशों के बीच तैर चुकी हैं। तो चलिए जानते हैं उनकी सफलता की कहानी ।

बुला चौधरी ने बहुत कम उम्र से ही तैराकी शुरू कर दी थी। उन्होंने तीन साल की उम्र में पहली बार पानी में कदम रखा, अपने पिता का हाथ थामकर। तभी से उन्हें पानी से पानी से प्यार हो गया, और यही उनकी हिम्मत बन गई। जब वे सिर्फ 9 साल की थीं, तब उन्होंने राष्ट्रीय तैराकी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और जीत भी हासिल की। बुला ने 1984 में ताइवान में आयोजित एशियन स्विमिंग चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया और वहाँ उन्होंने चार स्वर्ण पदक जीते। इससे उन्हें न केवल राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी उनका नाम फैल गया। इसके बाद उन्होंने कई एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया।

बुला की असली परीक्षा तब शुरू हुई जब उन्होंने ओपन वॉटर स्विमिंग की दुनिया में कदम रखा। यह तैराकी समुद्रों में की जाती है, जहाँ लहरें तेज होती हैं, पानी बहुत ठंडा होता है और रास्ता बहुत लंबा होता है। कई बार जानवरों का डर और तेज़ हवाओं का सामना भी करना पड़ता है। फिर भी बुला ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार अभ्यास और मानसिक शक्ति के बल पर समुद्र को भी मात दी।

बुला चौधरी पहली महिला बनीं जिन्होंने पांच अलग-अलग समुद्रों को तैरकर पार किया। उन्होंने इंग्लिश चैनल, गिब्राल्टर स्ट्रेट, पनामा नहर , टोरंटो झील , और हवाई का पाली चैनल जैसे खतरनाक जलमार्गों को सफलता से पार किया। इन अभियानों के लिए उन्हें विशेष तैयारी करनी पड़ी, जिसमें मानसिक, शारीरिक और तकनीकी चुनौतियों से गुजरना शामिल था।

बुला चौधरी की इन महान उपलब्धियों को भारत सरकार और खेल जगत ने सराहा। उन्हें वर्ष 1990 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो खिलाड़ियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया जाता है। इसके अलावा, उन्हें 2006 में पद्मश्री पुरस्कार भी मिला, जो भारत का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। वे कई वर्षों तक राष्ट्रीय रिकॉर्ड होल्डर भी रहीं।

कुछ समय पहले ही बुला चौधरी के कोलकाता स्थित घर में चोरी हो गई। चोर उनके घर से गहने, मेडल और पैसे लेकर फरार हो गए। घटना के समय घर में कोई नहीं था। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले जा रहे हैं। बुला चौधरी ने इस घटना पर चिंता जताई है और प्रशासन से सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।

स्वाति कुमारी एक अनुभवी डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं, जो वर्तमान में गृहलक्ष्मी में फ्रीलांसर के रूप में काम कर रही हैं। चार वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली स्वाति को खासतौर पर लाइफस्टाइल विषयों पर लेखन में दक्षता हासिल है। खाली समय...