Summary: हर 8 घंटे दवा लेने वाली सुष्मिता सेन ने जीती एडिसन डिज़ीज़ से जंग, डॉक्टर बोले – चमत्कार!

सुष्मिता सेन एडिसन डिज़ीज़ जैसी दुर्लभ बीमारी से जूझते हुए हर 8 घंटे में दवा लेने को मजबूर थीं।लेकिन अपनी आत्मशक्ति और फिटनेस के दम पर उन्होंने खुद को इस कदर बदला कि अब दवा की जरूरत नहीं रही।

Sushmita Sen Health: मिस यूनिवर्स रह चुकीं सुष्मिता सेन ने एक्टिंग करियर के बीच में कई गम्भीर स्वास्थ्य समस्याओं से सामना किया। 2023 में उन्हें जबरदस्त दिल का दौरा पड़ा था, लेकिन असल में वे 2014 से ही ऐडिसन डिज़ीज़ नाम की एक दुर्लभ ऑटोइम्यून बीमारी से जूझ रही थीं। इस बीमारी में शरीर का इम्यून सिस्टम ही शरीर पर हमला कर देता है। डॉक्टरों ने उन्हें साफ कह दिया था कि उन्हें हर 8 घंटे में हाइड्रोकॉर्टिसोन नाम की स्टेरॉइड दवा लेना होगी, और वो भी जिंदगी भर।

सुष्मिता बताती हैं, “शरीर में एक हार्मोन होता है कॉर्टिसोल, लेकिन मेरे एड्रिनल ग्लैंड ने इसे बनाना बंद कर दिया था। मैं एड्रिनल क्राइसिस में चली गई थी और मुझे आजीवन स्टेरॉइड पर निर्भर घोषित कर दिया गया।” दवाओं से आजादी पाने की जिद थी इसलिए सुष्मिता ने डॉक्टरों की इस बात को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया।

सुष्मिता ने तय किया कि वो दवाओं पर जिंदा नहीं रहेंगी, बल्कि अपनी जिंदगी को खुद से बेहतर बनाएंगी। उन्होंने अपने फिटनेस ट्रेनर को फोन किया और जिम्नास्टिक्स सीखने की इच्छा जताई। यह उस हालत में बहुत जोखिम भरा था। डॉक्टरों ने उन्हें साफ मना किया था कि ऐंटी-ग्रैविटी मूवमेंट यानी हवा में झूलने या उल्टे लटकने वाले व्यायाम न करें लेकिन सुष्मिता ने सबसे पहले वही शुरू किया। उन्होंने कहा, “मुझे वैसा होना पसंद नहीं आ रहा था, जो मैं सिर्फ जिंदा रहने की कोशिश में बन रही थी।” उन्होंने हर तरह के मेडिकल इलाज, डिटॉक्स प्रोग्राम, योग, एरियल एक्सरसाइज़ और ऐंटी-ग्रैविटी ट्रेनिंग को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया। उनका मानना था कि शरीर उन्हें कोई संकेत दे रहा है और वो इशारा दवाओं की ओर नहीं, आत्मशक्ति की तरफ था। 

एक दिन अचानक सुष्मिता बेहोश हो गईं और उन्हें दुबई से अबू धाबी आपातकालीन इलाज के लिए ले जाया गया। इलाज के बाद जब वो दुबई लौट रही थीं, तब तुर्की के उनके डॉक्टर ने फोन किया और जो कहा, वह चौंका देने वाला था। उन्होंने बताया कि अब सुष्मिता को हाइड्रोकॉर्टिसोन की जरूरत नहीं है, क्योंकि उनका शरीर अब खुद से कॉर्टिसोल हार्मोन बनाने लगा है। डॉक्टर ने कहा कि अपने 35 साल के करियर में उन्होंने कभी नहीं देखा कि ऐड्रिनल फैलियर वाला कोई मरीज दोबारा प्राकृतिक हार्मोन बनाना शुरू कर दे। सुष्मिता ने साबित कर दिया था कि कभी-कभी विज्ञान की सीमाओं से परे जाकर भी शरीर खुद को चंगा कर सकता है। अगर इंसान में जज़्बा हो, तो चमत्कार मुमकिन हैं।

यह एक दुर्लभ लेकिन गंभीर बीमारी है जिसमें एड्रिनल ग्लैंड शरीर के ज़रूरी हार्मोन बनाने बंद कर देते हैं, खासकर कॉर्टिसोल और ऐल्डोस्टेरोन।​​​​​​​ कॉर्टिसोल तनाव से निपटने, ब्लड प्रेशर और ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है।​​​​​​​ ऐल्डोस्टेरोन शरीर में सोडियम और पोटैशियम का संतुलन बनाए रखता है, जो ब्लड प्रेशर और शरीर के फ्लूइड वॉल्यूम को नियंत्रित करता है।

90% मामलों में इसका कारण ऑटोइम्यून रिएक्शन होता है। यानी शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से एड्रिनल ग्रंथियों पर हमला कर देता है। इससे ये ग्रंथियां हार्मोन बनाना बंद कर देती हैं।

इस बीमारी के लक्षण धीरे-धीरे उभरते हैं और समय के साथ बिगड़ सकते हैं…

  • लगातार जी-घबराना और उल्टी
  • पेट दर्द
  • डायरिया
  • भूख कम लगना
  • अचानक वजन घटना
  • मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
  • मांसपेशियों में ऐंठन या झटके
  • लगातार थकान और कमजोरी

ये सभी लक्षण इस ओर इशारा करते हैं कि एड्रिनल ग्लैंड ठीक से काम नहीं कर रही हैं। कई बार ये लक्षण दूसरी बीमारियों जैसे लगते हैं, इसलिए इसका सही समय पर पता नहीं चल पाता।

ढाई दशक से पत्रकारिता में हैं। दैनिक भास्कर, नई दुनिया और जागरण में कई वर्षों तक काम किया। हर हफ्ते 'पहले दिन पहले शो' का अगर कोई रिकॉर्ड होता तो शायद इनके नाम होता। 2001 से अभी तक यह क्रम जारी है और विभिन्न प्लेटफॉर्म के लिए फिल्म समीक्षा...