Summary: ऋषिकेश में पिता पंकज धीर को याद किया बेटे निकितिन धीर ने
महाभारत में “कर्ण” की अमर भूमिका निभाने वाले अभिनेता पंकज धीर के निधन के बाद उनका परिवार ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन आश्रम पहुंचा। जाहां उन्होंने गंगा तट पर शांति पाठ और आरती के माध्यम से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
Pankaj Dheer: भारतीय टेलीविजन के स्वर्ण युग की बात करें, तो महाभारत का नाम सबसे पहले याद आता है। जाहीर सी बात है कि जब महाभारत की बात होती है, तो कर्ण के रूप में एक्टर पंकज धीर की ही इमेज सामने आती है। 15 अक्टूबर को पंकज धीर ने कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद इस संसार को अलविदा कह दिया। उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देने के लिए उनके बेटे निकितिन धीर और पूरा परिवार ऋषिकेश आश्रम पहुंचा।
ऋषिकेश में पंकज धीर को श्रद्धांजलि

हाल ही में पंकज धीर के एक्टर बेटे निकितिन धीर और समूचा परिवार ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम पहुंचा, जहां उन्होंने उनके नाम से एक शांति पाठ किया और गंगा आरती में भाग लिया। वहां उन्होंने स्वामी चिदानंद सरस्वती जी से मुलाकात की। परिवार ने गंगा तट पर दीप जलाकर शांति पाठ किया। परिवार के अनुसार, पंकज धीर को आश्रम से हमेशा गहरा जुड़ाव महसूस होता था और जब भी वे यहां आते थे, उन्हें शांति मिलती थी।
क्या कहा स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने?
इस मौके पर स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने कहा, “पंकज धीर जी जब भी यहां आते थे, गंगा तट पर घंटों बैठा करते थे। उन्हें इस स्थान से गहरा आध्यात्मिक जुड़ाव था। आज उनका परिवार जब यहां आया, तो उनकी आँखों में दर्द देखा जा सकता था लेकिन लौटते समय उनके चेहरों पर एक अनोखी शांति थी। यही गंगा मां की कृपा है।”
कर्ण के रूप में अमर हुए पंकज धीर
पंकज धीर ने महाभारत में कर्ण की भूमिका निभाकर इतिहास रच दिया। उनकी एक्टिंग में संयम, करुणा और संघर्ष की गहराई ने दर्शकों को भीतर तक छू लिया। उन्होंने केवल एक्टिंग नहीं की थी, बल्कि अपने किरदार को जिया था। यही कारण है कि आज भी “कर्ण” का नाम लेते ही उनका चेहरा याद आता है।
निधन की खबर ने कर दिया सबको स्तब्ध
पंकज धीर के निधन की खबर ने पूरे फिल्म जगत को स्तब्ध कर दिया। वह 68 वर्ष के थे। पंकज का अंतिम संस्कार पवन हंस श्मशान घाट पर किया गया। उनके अंतिम संस्कार में सलमान खान, सिद्धार्थ मल्होत्रा, पूनम ढिल्लों, मिका सिंह और कई सेलेब्स उपस्थित थे। सभी ने कहा कि पंकज धीर केवल एक प्रतिभाशाली एक्टर ही नहीं, बल्कि एक विनम्र और संवेदनशील इंसान भी थे।
प्रार्थना सभा
परिवार द्वारा आयोजित प्रार्थना सभा में भी कई सीनियर एक्टर्स शामिल हुए। हर किसी ने उन्हें अपनी यादों में फिर से जीवित किया। उनके बेटे निकितिन धीर ने भी कहा कि उनके पिता ने उन्हें सिखाया कि “सफलता का असली अर्थ है अपने काम और व्यवहार से लोगों के दिल जीतना।” आज जब लोग “महाभारत” का नाम लेते हैं, तो कर्ण के साथ-साथ पंकज धीर की मुस्कुराहट, उनका व्यक्तित्व और उनका अपनापन याद आता है।
