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जामा मस्जिद

कहते हैं कि पुरानी दिल्ली की रईसी का आइना रही हैं हवेलियां और यह बात सही भी है कि पुरानी दिल्ली हवेलियों का गढ़ है। बीस साल पहले करीब सात सौ हवेलियां थी पर वर्तमान में बमुश्किल 100 हवेलियां ही बचीं हैं और इनमें एक हवेली है धरमपुरा हवेली। 1869 में बनी शाहजहानाबाद के धरमपुरा इलाके में यह हवेली स्थित है। इस इलाके का नाम धरमपुरा धर्म शब्द से पड़ा क्योंकि इस इलाके में बहुत से छोटे बड़े धार्मिक संस्थान हैं जैसे बहुत से प्रसिद्ध जैन मंदिर। यह हवेली सबसे मशहूर जामा मस्जिद और प्रतिष्ठित आभूषण बाजार- दरीबा कलां और किनारी बाजार के बहुत करीब स्थित है। इस हवेली के पीछे विश्व की सबसे छोटी गली, गली कृष्णा भी बनी हुई है। यह हवेली लाल किले, जामा मस्जिद और शीशगंज गुरुद्वारा के साए में चमक रही है। राज्य सभा के सदस्य विजय गोयल और उनके पुत्र सिद्धांत गोयल ने हेरिटेज इंडिया फाउंडेशन के साथ मिलकर इस हवेली को अपनाया। इस हवेली के विशेष फीचर्स जैसे केंद्रीय आंगन, धनुषाकार प्रवेश द्वार, बलुआ पत्थर और संगमरमर के खंभों की वजह से इस हवेली में मुगलों, भर्तियों और अंग्रेजों की वास्तुकला और डिजाइन तत्व नजर आते हैं। यह हवेली किसी समय पर अपनी भव्यता और रॉयल्टी के लिए बहुत जानी जाती थी लेकिन अब यह बहुत बुरी हालत में पड़ी है। कोई इसकी संरचना को पहचान भी नहीं सकता। 6 साल से कठिन परिश्रम और शोध कर रहे विजय सिद्धांत गोयल ने इस हवेली के ऊपर दिन रात बिना थके खूब मेहनत की है।

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दिल्ली की शान और चांदनी चौक की जान धरमपुरा हवेली 5

विजय गोयल को इस हवेली की टूटी-फूटी हालत देकर बहुत दु:ख हुआ। इस हवेली को रिस्टोर करने के पीछे उनका मकसद यही था की किसी तरह लोगों का ध्यान ऐसी  अनेकों विरासत संरचनाओं पर प्रकाशित किया जा सके, जो ऐसी ही टूटी-फूटी हालत में हैं और जिनका बहुत अधिक ऐतिहासिक महत्व है। अब यह हवेली पूरी तरह से पहले जैसी हो गई है। धरमपुरा चांदनी चौक में स्थित इस हवेली की मरम्म्त के काम के बाद अब शाहजहानाबाद जिसे अब चांदनी चौक के नाम से जाना जाता है, में मौजूद अन्य हवेलियों के मरम्म्त की उम्मीद भी जग चुकी है। इस बारे में विजय कहते हैं, ‘इस हवेली को हमने 10 साल पहले रिस्टोर करने के लिए अपनाया था। यह हवेली चांदनी चौक में मौजूद है। यह हवेली बाकि सभी हवेलियों की तरह ही किसी भी समय गिर सकती थी अगर हमने इसको रिस्टोर ना किया होता। हम एक ऐसा स्थान बनाना चाहते थे, जो बहुत सारे पर्यटकों को आकर्षित कर सके और हमारी आने वाली पीढ़ी अपनी ऐतिहासिक जड़ों को समझ सके। धौलपुर के पत्थर के खम्बों पर बारीक नक्काशी और और असली लखोरी ईंट से किया गया, पत्थर का काम हमें पुराने ज़माने की याद दिलाता है। विजय कहते है, ‘इस हवेली के विभिन्न फीचर्स पुराने मुगलों के जमाने के हैं पर बहुत सी चीज़े बाद में 20वीं शताब्दी में बढ़ाई गईं। जब भारत पर मुगलों का राज था तब उनके दरबारियों द्वारा बहुत सी हवेलियां बनवाई गई।

 

 

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विजय के अनुसार इस हवेली को रिस्टोर करना बहुत कठिन कार्य था। ‘जब हमने रेस्टोरेशन की प्रक्रिया शुरू की तो हमे कोई अंदाजा नहीं था कि हम किस तरह और कब से इस काम की शुरुआत करें। बहुत तेज बारिश होने के कारण हमारी समस्या और भी बढ़ती गई। हमारे सामने बहुत बड़ी-बड़ी चुनौतियां थी पर हमारी सफलता ने ही इस हवेली की पुरानी चमक को लाने में हमारी मदद की, जिससे यह आने वाले कई सालों तक टिकी रही।’ वास्तुकला के हिसाब से यह हवेली 18वीं शताब्दी के समय के घरों का एक बहुत अच्छा उदाहरण है, जो एक केंद्रीय आंगन के तरफ बनी हुई है और अधिकतर उस समय के सभी घर इसी प्रकार हुआ करते थे। इस हवेली में बहुत बारीकी से पत्थर कोष्ठक, संगमरमर इनलेज, झरोखा, और बहु बेलबूटेदार धनुषाकार द्वार, धनुषाकार, नक्काशीदार बलुआ पत्थर के फसाड़ और लकड़ी के दरवाजों का इस्तेमाल किया गया है। इसको बनाने में पारंपरिक शैली का इस्तेमाल किया गया है- इसकी बनावट मिट्टी और चूने मोर्टार के साथ लखोरी ईंटों, बलुआ पत्थर के स्लैब, लकड़ी के जोस्ट्सि और शबाना, चूना ठोस के साथ फर्श और संगमरमर के खंभों का उपयोग करके इस हवेली को पारम्परिक लुक दिया गया है।

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दिल्ली की शान और चांदनी चौक की जान धरमपुरा हवेली 6

यह हवेली दिल्ली में घूमने फिरने के लिए बहुत से लोगों की मनपसन्द जगह बन गई है। इसमें 13 बेहतरीन और सुंदर कमरे शुरू किए जा चुके हैं, जिसमें रहने वाले लोग इस हवेली के रॉयल सत्कार का अनुभव कर सकते हैं। इस हवेली में एक रेस्टोरेंट है, जहां पुरानी दिल्ली का खाना पेश किया जाता है। एक हुक्का कमरा, एक पुस्तकालय, एक आर्ट गैलरी, एक हस्तकला की दुकानों, स्पा, कार्यों के लिए दो आंगन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां आने वाले लोग कबूतरबाजी, पतंगबाजी का मजा ले सकते हैं।  

इस हवेली में 13 कमरे, आंगन, बालकनी और खुली छत है। इस हवेली के प्रत्येक कमरों में शाही लुक झलकता है, जहां पर पर्यटक राजसी अनुभव करते हैं।