क्या बच्चों में हकलानेपन को ठीक किया जा सकता है?
क्या बच्चों में हकलानेपन को ठीक किया जा सकता है?

हकला कर बोलना एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें बच्चा एक बार में अपनी बात पूरी नहीं कर पाता है बल्कि वह किसी भी शब्द में बीच में अटक जाता है। इस स्थिति से गुजर रहा बच्चा अपनी बात को किसी दूसरे व्यक्ति तक पहुचाने में दिक्कत महसूस करता है। रिसर्च के मुताबिक पूरी दुनिया में लगभग 6 से 8% बच्चे हकलाहट का शिकार हैं। बच्चे की इस स्थिति के पीछे काफी सारे कारण हो सकते हैं जो निम्न दिए गए हैं: 

हकलाहट के कारण

  • अगर बच्चे के माता पिता में से किसी को हकलाने की समस्या होगी तो वह बच्चे को भी हो सकती है।
  • जो बच्चे 6 महीने तक हकला कर या रुक रुक कर बोलते हैं उनकी यह आदत फिर काफी लंबे समय तक बन जाती है।
  • बच्चे की भाषा या स्पीच डिसऑर्डर होने के कारण भी उसे स्टामरिंग या फिर हकलाने की समस्या हो सकती है।
  • कई बार हमारा मस्तिष्क हमारी स्पीच मसल्स के पास देर से सिग्नल भेजता है जिस कारण कुछ शब्द बोलने में देरी हो जाती है और यह भी रुक कर बोलने का एक कारण हो सकता है।

हकलाना बच्चे को किस तरह से प्रभावित कर सकता है?

  • हकलाहट बच्चे को मानसिक रूप से काफी अधिक प्रभावित कर सकती है और इसके कारण बच्चे को चिंता और आत्म विश्वास की कमी से जूझना पड़ सकता है। बच्चे के साथ पढ़ने वाले अन्य बच्चे भी इस बात को ले कर उसका मजाक उड़ा सकते हैं और उसे हीन महसूस करवा सकते हैं।
  • रुक रुक कर बोलने वाला बच्चा खुद को दूसरों से कम और अलग समझता है और इस कारण वह हर समय फ्रस्ट्रेट हो कर रहता है।
  • आपका बच्चा बोलते समय कतरा सकता है और दूसरों से मिलने में भी उसे ज्यादा रुचि नहीं रहेगी जिस कारण वह अपने आप को अकेला रखने लग जायेगा।
  • बच्चा अपने आप में ही डिप्रेशन जैसी स्थिति में जा सकता है जहां उसे काफी चिंता और स्ट्रेस महसूस हो सकती है।
  • वह दोस्त बनाने में भी दिक्कत महसूस कर सकता है।
  • दूसरों के सामने बात करना उन्हें काफी परेशान कर देने वाला महसूस कर सकता है।
हकलाना बच्चे को किस तरह से प्रभावित कर सकता है?

आप इस समस्या को ठीक करने में कैसे मदद कर सकते हैं?

  • आपको बच्चा क्या कहना चाह रहा है इस बात का ध्यान रखना है और उसे पूरे ध्यान से सुनना है और उसकी बात पूरी करने में उसकी मदद करें।
  • उन्हें किसी ऐसे कम्युनिकेशन स्टाइल से परिचित कराएं जिसमें उन्हें अधिक आरामदायक महसूस हो सके। इसके लिए आपको उन्हें सही करने की जरूरत नहीं है बल्कि उनका साथ देने की जरूरत है।
  • उनकी बात को आधी न रखें और उनके बोलते समय खुद बात को पूरी करने के लिए बोलने न लग जाएं।
  • बच्चे को बिना रुक कर बोलने की प्रैक्टिस करवाएं और हर रोज इस प्रैक्टिस को एक घंटे का समय दें।

आप बच्चे की इस आदत में काफी सुधार ला सकते हैं और इसके लिए आपको किसी डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं है बल्कि आप घर पर ही उपचार की शुरुआत कर सकते हैं।

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