मानवीय जीवन रिश्तों की खूबसूरत डोर से बंधा है, कई बार इन रिश्तों की डोर में कुछ ऐसी गिरहें बन जाती हैं जिन्हें सुलझाना मुश्किल हो जाता है…
Author Archives: Yashodhara
गृहलक्ष्मी दोपहर सीजन 5 के मंच पर होली और वुमन्स डे सेलिब्रेशन में महिलाओं ने की जमकर मस्ती
ऊर्जा वुमन्स क्लब के साथ गृहलक्ष्मी टीम की होली और वुमन्स डे सेलिब्रेशन में दिखा महिलाओं का जलवा
आहार बदलें भाग्य बदलें
आहार का व्यक्ति के आचार-विचार पर काफी प्रभाव पड़ता है, ऐसे में बेहतर आहार अपनाकर स्वस्थ और बेहतर जीवनशैली अपनाई जा सकती है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के लिए ‘मिया’ की आकर्षक ऑफर्स
वुन्स डे को सेलिब्रेट करने के लिए तनिष्क का ‘मिया’ कलेेक्शन है खास ऑफर, जहां इयररिंग्स से लेकर पेंडेंट्स, ब्रेसलेट्स और रिंग्स पर 6 मार्च से 8 मार्च तक मिलेगी फ्लैट 10% की छूट।
चाणक्य के अनुसार इन बातों में महिलाएं पुरुषों से कही आगे होती हैं
सदियों से ये सोच चली आ रही है महिलाएं शारीरिक और मानसिक तौर पर पुरुषों से कमजोर होती हैं। ऐसे में ये आम धारणा बन चुकी है, महिलाएं योग्यता के मामले में पुरुषों के बराबर नहीं हो सकती है। लेकिन इस सोच से इतर प्राचीन विद्वान चाणक्य ने कुछ मामलों में महिलाओं को पुरुषों से […]
कोरोना वायरस से बचने के लिए बाबा रामदेव का ये नुस्खा आएगा काम
कोरोना को लेकर इन दिनों खबरों का बाजार गर्म हो चला है… ऑफिस हो या घर हर जगह इसी की चर्चाएं हैं। वायरल खबरों के बीच कोरोना को लेकर कई तरह की अफवाहें भी फैल रही हैं, जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई है। ऐसे में सबसे जरूरी है कि कोरोना को लेकर […]
होली के सप्ततारा व्यंजन
होली क सप्तारा व्यंजन जो खाए वो पछताए और जो न खाए वो भी पछताए
कोरोना वायरस से बचाव के लिए WHO की ये गाइडलाइन आएगी काम, जरूर पढ़ें
WHO ने कोरोना को लेकर हैल्थ गाइड लाइन जारी की है, जिसमें कोरोना से बचाव के लिए लोगों से कुछ जरूरी सावधानी बरतने को कहा गया है
घूंघट हटा था क्या? भाग-2
समाज में दलितों और स्त्रियों की दशा हमेशा दयनीय रही है… दलित जहां जातिवाद का शिकार होते रहे हैं, वहीं स्त्री चाहे किसी जाति-वर्ग से हो उसे भी समाज का तिरस्कार झेलना पड़ता है। ये कहानी समाज के इसी खोखलेपन की परतें खोलती हैं।
घूंघट हटा था क्या? भाग-1
समाज में दलितों और स्त्रियों की दशा हमेशा दयनीय रही है… दलित जहां जातिवाद का शिकार होते रहे हैं, वहीं स्त्री चाहे किसी जाति-वर्ग से हो उसे भी समाज का तिरस्कार झेलना पड़ता है। ये कहानी समाज के इसी खोखलेपन की परतें खोलती हैं।
