Posted inसामाजिक कहानियाँ (Social Stories in Hindi), हिंदी कहानियाँ

सुबह का भूला-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Kahani: “तन्मय तुम ना बिल्कुल बच्चे हो.. अभी कितने रूठे हुए थे और अब मुस्कुरा रहे हो?”“प्रिया मैं तुमसे ज्यादा देर तक रूठ नहीं सकता ..तुम मेरी कमजोरी हो, पता नहीं …या कोई जादूगरनी हो.. क्षण भर में सारा गुस्सा दूर कर देती हो।”” वैसे जनाब इतना गुस्सा किस बात पर कर रहे थे?”” […]

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अपराध बोध-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Kahani: दो लड़की तो हो गई तेरे और कितनी छोरी जनेगी। अबकी बार मैं कोई गलती ना करूंगी, जांच करवा कर ही रहूंगी। खूब टेस्ट होते हैं  दुपका चोरी। जिसे पता पड़ जाता है की लड़का होगा या लड़की।कब तक मेरा लड़का घिरा रहेगा। एक लड़का सा हो जाए तो उसके जी में भी […]

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नसीहत बनी फजीहत-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Short Story: बात जबकि है जब मेरी नई-नई शादी हुई थी। मैं छोटे कस्बे से थी इसलिए हमारे यहां पर शादी के वक्त लड़की को परिवार की महिलाओं के द्वारा बहुत नसीहत दी जाती थी। जैसे धीरे-धीरे चलना है। धीरे-धीरे बोलना है। सभी के खाना खाने के पश्चात खाना खाना है। सभी का कहना […]

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सेतु-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Short Story: “इतने सालों से हम अलग रहते आए हैं। हमारा एडजस्टमेंट नहीं होगा किसी के साथ। हम अपनी प्राइवेसी खत्म नहीं कर सकते हैं। कहां बाबूजी पुराने विचारों के, और कहां हम मॉडर्न सोसाइटी में रहने वाले लोग।” नीता समर्थ को सुना रही थी क्योंकि मां के देहांत के पश्चात समर्थ के पिताजी उनके […]

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पुरुष कौन है?-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: पुरुष कौन है?जो निशब्द है, वह पुरुष है।जो कर्तव्य पथ पर खड़ा है।वह पुरुष है। जो ओढ़ता है आवरण, कठोरता का।जिम्मेदारियां का चोला पहनता है।वह पुरुष है।जिसका काम दो जोड़ी साधारण कपड़ों में भी चल जाता है।वह पुरुष है। जो बंधा रहता है स्त्री(माता, बहन, पत्नी, बेटी) के सानिध्य में।कभी माँ की ममता […]

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बेटियाँ क्यों पराई?-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Story of Daughter: बेटा तू घर कब आ रही है। अब तो बच्चों की छुट्टियां भी हो गई है। जल्दी आ जा। बता देना मैं तेरे भाई को लेने भेज दूंगी। सुनिधि की मम्मी फोन पर सुनिधि से कह रही थी।वक्त मिलेगा जब आ जाऊंगी, कह कर सुनिधि ने फोन रख दिया। उसकी मम्मी को […]

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स्कूल में कंडोलेंस-हाय मैं शर्म से लाल हुई

Funny Story in Hindi: जब गर्मियों में बच्चों की स्कूल की छुट्टियां होती हैं तब हम सब भाई बहन इकट्ठे होते हैं या तो कहीं घूमने का प्रोग्राम बन जाता है या सब बहनें मिलकर भाई के घर पर ही कब्जा जमा लेती हैं। बच्चों को पूरी आजादी मिल जाती है शैतानी करने की। कहां […]

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खरा सोना-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Story: संध्या की सास को अचानक से ब्रेन हेमरेज हो गया। 70 साल से अधिक उम्र है। बुढ़ापा है, पता नहीं कर्म की कौन सी गति में फंसना पड़ जाए जो सांस अटकी रह जाती है। संध्या के पति हेमंत दिन रात अपनी माता की सेवा में लगे हुए हैं। पैसा भी अंधाधुंध उठ […]

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बच्चों को उपहार में मिली आजादी-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Stories in Hindi: रेनू जी बहुत खुश रहती है अपने छोटे से शहर में। बच्चों को पढ़ाने के लिए उन्होंने खूब भागम भाग कर ली। अब उनके तीनों बच्चे खूब अच्छी नौकरियों पर है। उन्होंने सबकी विवाह शादी कर अपनी जिम्मेदारियां भी निपटा ली है। उनके पति का भी रिटायरमेंट हो चुका है। दोनों पति-पत्नी […]

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बुलंदशहर की ऐतिहासिक, धार्मिक व सांस्कृतिक विरासत-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

Short Story in Hindi: बुलंदशहर जिला पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थित है। दिल्ली एनसीआर से सटा होने की वजह से यह काफी विकसित भी हैं। मेरा जन्म इसी शहर में हुआ है।जिला मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर अनूपशहर स्थित है। इसे छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता है। गंगा के पावन किनारे […]

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