क्या आप जानते हैं कि मोटापे का एक कारण अवसाद भी है या यूं कहें कि मोटापा व अवसाद एक दूसरे के पूरक हैं तो भी गलत नहीं होगा। इसके बारे में विस्तार से जानें इस लेख के माध्यम से।
जीवन के स्वास्थ्य सूत्र
अच्छे स्वास्थ्य की कामना हर कोई करता है शायद इसलिए हर कोई विभिन्न उपचारों, चिकित्साओं एवं पद्धतिओं में अपने लिए कुछ न कुछ दूंढ़ता रहता है परंतु यदि हम अपनी दिनचर्या, रहन-सहन या आहार विहार पर ध्यान दें तो हम स्वयं को सरलता से निरोगी बना सकते हैं।
हड्डियों और जोड़ों के दर्द में सहायक आसन
स्वयं को निरोगी व स्वस्थ रखने का सबसे सरल व प्राकृतिक माध्यम है योग। यदि इसे जीवन में नियमित तौर पर अपनाया जाए तो इंसान न केवल दवाइयों से दूर रहता है बल्कि लंबी उम्र भी पाता है। योग में हर रोग का निवारण है। हड्डियों से जुड़ी समस्यओं में कौन से योगासन उपयोगी हैं, आइए जानते हैं।
उपवास में रखें भोजन का ध्यान
उपवास एक संपूर्ण पद्धति है और इसका सही लाभ तभी मिलेगा, जब इस पूरी पद्धति को पूरे समर्पण और सही ढंग के साथ अपनाया जाए। आज के युग में रोगों से बचने एवं अपने खान-पान को नियमित एवं संतुलित रखने का सर्वोत्तम उपाय है ‘उपवास’।
सुहागनों का पर्व तीज
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को श्रावणी तीज कहते हैं। उत्तर भारत में यह हरियाली तीज के नाम से भी जानी जाती है। तीज विशेष रूप से महिलाओं का त्यौहार होता है। इस व्रत को अविवाहित कन्याएं योग्य वर पाने के लिए करती हैं तथा विवाहित महिलाएं अपने सुखी दांपत्य के लिए करती हैं।
धागों में बंधा रक्षाकवच है रक्षाबंधन
सभी त्योहारों में रक्षा बंधन एक अनुठा उत्सव है, जो न तो किसी जयंती से संबंधित है और न ही किसी विजय राज तिलक से। इस त्योहार के तीन नाम हैं- रक्षाबंधन, वष तोड़क और पुण्य प्रदायक पर्व। यद्यपि प्रथम नाम अधिक प्रचलित है। रक्षाबंधन ऐसा प्रिय बंधन है जिसमें हर भाई अपनी बहन के प्यार में बंधना चाहता है। यह बंधन ईश्वरीय बंधन है इसलिए प्रत्येक प्राणी खुशी से बंधने के लिए तैयार रहता है।
क्या है ब्रज की चौरासी कोस यात्रा?
हिन्दू मान्यताओं में ईश्वरीय धामों की यात्राओं से घर-परिवार को बुद्धि, समृद्धि, निर्मलता, एवं ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसी ही एक पुण्यदायी यात्रा है ब्रज की चौरासी कोस यात्रा।
कैसे रखें जन्माष्टमी का व्रत?
कहते हैं कोई भी व्रत करने के लिए मन में श्रद्धा का होना परम आवश्यक है। मन के आन्तरिक भाव से किया गया व्रत सीधा भगवान तक पहुंचता है, परन्तु शास्त्रों के अनुसार विधिपूर्वक किया गया व्रत ही अधिक फलता है। इसलिए जानें कैसे करें जन्माष्टमी का व्रत।
जन्माष्टमी मनाने के परम्परागत रूप
जन्माष्टमी का पर्व हिंदुओं में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। भले ही इस पर्व को मनाने के तरीके हर सम्प्रदाय में थोड़े-थोड़े भिन्न हैं, पर भाव बिल्कुल एक ही है कि अपने बाल रूप प्रभु का अन्तर्मन से खूब लाड़ लड़ाना और आनन्दित होना।
क्यों मनाई जाती है नागपंचमी?
भारतीय संस्कृति में नाग को देवता का स्थान प्राप्त है। नागपूजन हमारी परंपरा का संबद्ध भाग है। भारतवर्ष के अलावा अन्य पुरातन सभ्यताओं वाले देशों में भी नागपूजा के तथ्य मिलते हैं। लोक विश्वास और लोक कथाएं नागों से संबंधित समाज में पाई जाती हैं। आदिवासियों की आराधना प्रणाली में नागों का विशिष्ट स्थान है। वे नागों और सर्पों के उल्लेख से भरा पड़ा है।
