उपवास दुनिया की सबसे प्राचीन तथा प्राकृतिक रोग शमन-पद्धति है। पुरानी व असाध्य बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए उपवास अत्यन्त लाभकारी है। इससे रोग-प्रतिरोधक प्रणाली को और ताकत मिलती है। उपवास से पाचन तंत्र पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। इसीलिए उपवास को सच्चे अर्थों में समझने के लिए इस बात को गहराई से समझना जरूरी है कि उपवास रखने का अर्थ सिर्फ भूखा रहना या एक समय का भोजन कर लेना भर नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण पद्धति है और इसका सही लाभ तभी मिलेगा, जब इस पूरी पद्धति को पूरे समर्पण और सही ढंग के साथ अपनाया जाए। आज के युग में रोगों से बचने एवं अपने खान-पान को नियमित एवं संतुलित रखने का सर्वोत्तम उपाय है ‘उपवास’। 

सही कारण, सही निवारण

जब भी उपवास रखें तो पूरे दिन ज्यादा से ज्यादा पानी पीते रहें, क्योंकि निराहार रहते हुए पिया गया पानी शरीर की आंतरिक सफाई कर सारे विषाणुओं को बाहर निकाल देता है। पूरे दिन कुछ ठोस आहार न लेकर केवल तरल पदार्थ लेना भी बहुत अधिक लाभदायक होता है, क्योंकि यह आंतरिक पोषण भी पहुंचाता रहता है। लेकिन ध्यान रहे कि इस समय चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक या किसी भी प्रकार का अल्कोहल लेने से बचें। कई लोग तरल पदार्थ के नाम पर इनका भी सेवन करते रहते हैं। यदि निराहार रहना संभव न हो तो सप्ताह का कोई दिन चुनकर उस दिन केवल फल या केवल सब्जियों को अपने आहार में शामिल किया जा सकता है, मगर इसका मतलब फलों से भरी थाली या लगातार फल खाते रहना बिलकुल नहीं है।

यदि व्रत रखने का कारण धार्मिक है और उस दिन एक ही समय भोजन लेना चाहें तो प्रयास कीजिए कि तले-भुने पूरी-पकौड़ों की जगह उबला हुआ बिना घी-तेल और मसालों वाला आहार लें। इस दौरान पानी ज्यादा से ज्यादा लगातार पीते रहें।

उपवास शरीर व मन को आराम देता है जो शरीर प्रतिदिन भोजन पचाता है उसे हफ्ते में एक दिन हल्का सुपाच्य भोजन देकर आंतों को विश्राम देना शरीर का उपवास व हफ्ते में एक दिन कुछ समय के लिए मौन व्रत धारण कर शांत रहना मन का उपवास है।

उपवास में क्या खाएं?

व्रत में क्या खाएं जो रूचिकर तो ही साथ में पौष्टिक भी, यह प्रश्न खड़ा होता है। अपने खान-पान का ध्यान रखें ताकि शरीर स्वस्थ रहे और मन प्रसन्न रहे, साथ ही ऊर्जा भी बनी रहे। इसके लिए फल, उबली सब्जियां और सलाद के साथ तरल पदार्थ भी भरपूर मात्रा में लें। इसके अलावा और कुछ भी लेना चाहते हैं तो ताजा दही, लस्सी, फ्रूट योगर्ट लें। कोई ठोस आहार न लेकर पदार्थ लेना, आंतरिक पोषण देता है। लेकिन लिक्विड फूड के नाम पर चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक तो कतई न पीएं। व्रत के दौरान सही खान-पान से डिटॉक्सिफिकेशन होता है। जिससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। हम हल्का व ऊर्जावान महसूस करते हैं। व्रत के दौरान हल्के सिर दर्द, थकान, हल्की सर्दी महसूस होने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। उपवास को बीच में ही नहीं छोड़ देना चाहिए।

व्रत से पहले

व्रत से पहले भी कई लोग बहुत सारा खाना खाते हैं, यह भी ठीक नहीं है। व्रत से पहले सूप और खिचड़ी जैसा हल्का खाना लेना चाहिए। 

व्रत के बाद

आमतौर पर व्रत खोलते समय हम जो खाना खाते हैं वह घी, तेल और मसाले से भरा होता है। जिसे हम आधा ही चबा कर फटाफट खाना चाहते हैं। यह तरीका सही नहीं है। इससे आपके शरीर को दोहरी कीमत चुकानी पड़ती है। व्रत के बाद अगले दिन की शुरुआत नींबू पानी से करनी चाहिए और सादी रोटी व कम तेल मसाले वाली सब्जी खानी चाहिए।

विशेष बात

उपवास के बाद अगर आप खुद को पहले से ज्यादा ऊर्जावान और चुस्त-दुरुस्त महसूस नहीं करते तो इसका सीधा अर्थ है कि आपके खान-पान में कोई समस्या है। 

बहुत से लोगों को उपवास रखने पर कई तरह की परेशानियां आती हैं जैसे जिन लोगों को डायबिटीज है तो उन लोगों को ज्यादा देर तक भूखा नहीं रहना चाहिए और मीठी वस्तुओं से परहेज करना चाहिए। दिल के मरीजों को तो कम घी वाला खाना ही लेना चाहिए। हाई ब्लड-प्रेशर वाले नमक कम खाएं। एसिडिटी की समस्या हो तो खाली पेट रहने की गलती न करें। उपवास के दौरान थोड़ा सा हल्का व्यायाम जरूर करें। इससे खून का संचार ठीक रहता है। शरीर में यदि ऑक्सीजन ठीक प्रकार से नहीं पहुंचे तो तीस सेकेंड्स तक गहरी-गहरी सांस लें और छोड़ें तथा खूब पानी पीएं। 

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