Summary: बच्चा बदलाव रहा है, बिगड़ा नहीं
11 से 13 साल में बच्चों का व्यवहार बिगड़ता नहीं, बल्कि हार्मोनल, मानसिक और सामाजिक बदलावों के कारण तेजी से बदलता है।
Preteen Behavior Changes: 11 से 13 साल की उम्र, यह उम्र बच्चों में बदलाव के लिए जीतना जरूरी है, उतना ही माता-पिता को बच्चों को समझने के लिए भी। अक्सर देखा जाता है, बच्चों के इस उम्र में पहुंचते ही माता-पिता की शिकायत होती है, हमारा बच्चा पहले जैसा आज्ञाकारी नहीं रहा। वह अब पहले से ज्यादा चिड़चिड़ा और जिद्दी हो गया है। अक्सर देखा जाता है, माता-पिता कहते मिल जाते हैं पता नहीं क्यों हमारा बच्चा इतना बिगड़ गया है। आईए जानते हैं इस लेख में क्या सच में 11 से 13 साल के बच्चे अचानक बिगड़ जाते हैं या तेजी से वह मानसिक और शारीरिक बदलावों से गुजर रहे होते हैं।
बच्चा बिगड़ रहा है या बदल रहा है
11 से 13 साल की उम्र जिसे शुरुआती किशोर अवस्था भी कहते हैं। इस उम्र में बच्चों के शारीरिक, मानसिक और हार्मोनल तीनों प्रकार के बदलाव बहुत तेजी से होते हैं। यही कारण है कि इस उम्र में बच्चा खुद भी नहीं समझ पाता कि उसके अंदर क्या चल रहा है।
हार्मोनल बदलाव: इस उम्र में बच्चों के अंदर तेजी से हार्मोन का बदलाव होता है। जिसके कारण लड़कों के आवाज में भारीपन। चेहरे, बगल और जननांगों के आसपास बालों का होना। लड़कियों में मासिक धर्म की शुरुआत। बच्चों में यह सभी बदलाव इसी उम्र में आते हैं।
दिमागी विकास: इस उम्र में बच्चों के दिमाग का डिसीजन मेकिंग और सेल्फ कंट्रोल वाला हिस्सा पूरी तरह से विकसित नहीं होता है। यही कारण है कि इस उम्र का बच्चा तुरंत रिएक्ट करता है, जल्दी गुस्सा हो जाता है। शांत होने पर चीज समझाने पर पछतावे में डूब जाता है। वह सही गलत समझ रहा होता है पर अभी उसका न्यूरोलॉजिकल कंट्रोल इतना विकसित नहीं होता कि वह समझदारी से अपने भावनाओं को कंट्रोल कर पाए। पेरेंट्स को समझने की जरूरत है इस उम्र का बच्चा बदतमीज नहीं हुआ बल्कि उसका दिमाग अभी पूरी तरह से इन चीजों को कंट्रोल नहीं कर पा रहा है।

बच्चे में बदलाव से उपजी अंदरूनी लड़ाई
11 से 13 साल में बच्चा जब इतने सारे बदलावों से गुजर रहा होता है तो इन बदलावों के कारण बच्चों में कई सारे सवाल उठते हैं जिनके जवाब वह जानना चाहता है। जैसे,
मेरे शरीर पर अचानक इतने बदलाव क्यों आ रहे हैं।
मेरी आवाज पहले से अलग क्यों हो गई है। क्या यह बदलाव सिर्फ मेरे साथ ही हो रहा है।
मैं अंदर से खुद को इतना बदल हुआ क्यों महसूस कर रहा हूं।
यह कुछ ऐसे सवाल हैं जो है तो बहुत साधारण लेकिन इस उम्र के बच्चे में उनके खुद के अस्तित्व पर सवाल की तरह होते हैं। ये सवाल उनके अंदर अंदरूनी लड़ाई को जन्म देते हैं। ऐसे में अगर माता-पिता या अध्यापक बच्चों के सवाल पर ध्यान ना दे तो बच्चा अपने दोस्तों के असर में आकर बहक भी सकता है। या फिर सोशल मीडिया या फोन से अपने सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश करता है जो की एक सही तरीका नहीं है।
अगर बच्चा अचानक चिड़चिड़ा हो गया है, चुप हो गया है या सवाल पूछ रहा है तो माता-पिता इसे बदतमीजी ना समझे। बल्कि बच्चा आपसे खुद से खुद के अंदर होने वाले बदलावों के बारे में जानना चाहता है।
कैसे संभाले माता-पिता टीनएजर को
डांटने की बजाय संवाद करें: अगर बच्चा आपसे कुछ सवाल पूछ रहा है या चिड़चिड़ा हो रहा है या कुछ ऐसा कर रहा है जो नहीं करना चाहिए तो उस समय बच्चों को डांटने की बजाय उनसे बात करें। डांट कर आप बच्चे के सवालों को उस समय शांत करवा सकते हैं पर उनकी जिज्ञासाओं को नहीं। उनके जिज्ञासाओं और भावनाओं दोनों को समझने का तरीका है बच्चे से बात करके उन्हें समझना।
जज करने से पहले सुने: अगर बच्चा आपसे कुछ कह रहा है तो उस पर अपनी राय देने से पहले जाने की बच्चा वैसा क्यों कह रहा है। वह क्या महसूस कर रहा है।
माता-पिता को समझना जरूरी है हर बच्चा अलग है उसके शारीरिक और मानसिक विकास की गति भी अलग है। ऐसे में पेरेंट्स एक बच्चे की तुलना दूसरे से ना करें।
प्रोफेशनल की मदद कब लें: जब बच्चा खुद को नुकसान पहुंचाने लगे। आक्रामक बर्ताव अपनाने लगे या बच्चा लगातार कई दिनों तक चुप और उदास रहने लगे तो ऐसे में आपको प्रोफेशनल की मदद लेनी चाहिए।
