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अपना पराया भाग-4

वैदराज बदबद हाथ मलते हुए बेचैनी के साथ कमरे में टहल रहे थे। मुखाकृति पर चिंता एवं क्रोध का सम्मिश्रण था। कभी-कभी हंसकर उस अधेड़ व्यक्ति की ओर तेज निगाहों से देख लेते थे, जो पास ही गद्दी पर बैठा हुआ था। कमरे में और कोई न था। अपना पराया नॉवेल भाग एक से बढ़ने […]

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अपना पराया भाग- 3

थका-मांदा खेत से लौटने पर भीखम ने दरवाजे पर से ही पुकारा—‘बिटिया, एक लोटा पानी तो दे जा।’ पुकार कर वह मचिया पर जा बैठा। घटा झोंपड़ी में थी। चटपट लोटा उठाकर भरने चली, तो मालूम हुआ कि गगरा खाली है। वह बोली—‘गगरे में पानी नहीं रहा काका, अभी तालाब से लिए आती हूं।’ और […]

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अपना पराया भाग-2

सेहटा गांव में रहने वाले वैदराज बदबद का नाम दूर-दूर तक प्रसिद्ध था। वे जड़ी-बूटियों के अच्छे जानकार थे। उनके दरवाजे पर दस-बीस रोगी सदा बैठे रहते थे। वैदराज बदबद ठाकुर दीप नारायण सिंह के घरेलू वैद्य थे। वैदराज का शरीर मोटा और थुलथुल था। मुंह पर सदैव मुस्कान बिखरी रहती थी। अपना पराया नॉवेल […]

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अपना पराया भाग-1

फरसा चलाते-चलाते थक गया था वह। मस्तक पर पसीने की बूंदें उभर आई थीं। बदन पर की निमस्तीन भीग कर लता हो रही थी, फिर भी वह काम करने की धुन में मस्त था। अभागे गरीब किसानों का जीवन परिश्रम पर ही तो निर्भर है। नाम था उसका भीखम। वहीं खेत के किनारे एक छोटी […]

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अपना पराया – कुशवाहा कान्त

कुशवाहा कांत पिछले 40 सालों से हिंदी उपन्यास जगत में हैं। उनके कई उपन्यासों को पूर्ण फिल्मों के रूप में चित्रित किया गया है। सेक्स, रोमांस, सस्पेंस और सनसनी से भरपूर ऐसे उपन्यासों की शृंखला जो एक बार पढ़ना शुरू करने के बाद उन्हें लगभग ‘अविश्वसनीय’ बना देती है! अब इस तरह का नवीनतम कुशवाहाकांत […]

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