immunity in winters
immunity in winters

Overview:कमजोर इम्यूनिटी से लेकर प्रदूषण तक, जानिए बच्चों और बड़ों में रेस्पिरेटरी इंफेक्शन का असली कारण

बच्चे जहां कमजोर इम्यूनिटी और छोटे फेफड़ों के कारण सांस संबंधी संक्रमणों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं, वहीं बड़ों में प्रदूषण, धूम्रपान और जीवनशैली से जुड़ी आदतें उन्हें दीर्घकालिक बीमारियों की ओर ले जाती हैं। दोनों ही स्थितियों में रोकथाम बेहद जरूरी है — जिसमें शामिल हैं टीकाकरण (vaccination), साफ-सफाई (sanitation) और धूम्रपान या प्रदूषित वातावरण से बचाव। समय रहते सावधानी अपनाने से बच्चों और बड़ों दोनों के फेफड़ों को स्वस्थ रखा जा सकता है।

respiratory infection difference between children and adults-सांस से जुड़ी बीमारियां जैसे सर्दी, फ्लू, ब्रोंकाइटिस या निमोनिया, हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन बच्चों और बड़ों में इनका असर और लक्षण अलग-अलग होते हैं। इसकी मुख्य वजह है शरीर की बनावट, रोग-प्रतिरोधक क्षमता (immunity) और बाहरी वातावरण का प्रभाव।

सीके बिर्ला अस्पताल, दिल्ली के डायरेक्टर और पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. विकास मित्तल बताते हैं कि बच्चों का इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता, जबकि बड़ों का शरीर पहले से कई संक्रमणों से लड़ चुका होता है। यही कारण है कि जहां बच्चों में हल्की बीमारी भी गंभीर हो सकती है, वहीं बड़े लोग जल्दी ठीक हो जाते हैं या उन्हें हल्के लक्षण महसूस होते हैं।

1. बच्चों की इम्यूनिटी होती है कमजोर

respiratory infection difference between children and adults
respiratory infection difference between children and adults

बड़ों की तुलना में बच्चों का इम्यून सिस्टम अनुभवहीन होता है। उन्होंने अब तक बहुत कम वायरस और बैक्टीरिया का सामना किया होता है। इसलिए संक्रमण पहचानने और उससे लड़ने में उन्हें अधिक समय लगता है। यही कारण है कि सर्दी-जुकाम या फ्लू जैसी सामान्य बीमारियां भी छोटे बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। वहीं, बड़ों का शरीर पहले से इन वायरस से जूझ चुका होता है, इसलिए वे जल्दी ठीक हो जाते हैं।

2. फेफड़ों की बनावट और कार्य में अंतर

बच्चों के फेफड़े और वायुमार्ग (airways) छोटे और कम विकसित होते हैं। थोड़ी-सी बलगम या सूजन भी उनके लिए सांस लेने में बड़ी दिक्कत पैदा कर सकती है। उनके श्वसन मांसपेशियां (respiratory muscles) भी कमजोर होती हैं, जिससे कफ निकालना मुश्किल हो जाता है। इसके विपरीत, बड़ों के फेफड़े पूरी तरह विकसित होते हैं, जिससे वे संक्रमण का बेहतर सामना कर पाते हैं।

3. पर्यावरण और एक्सपोजर का असर

बड़ों और बच्चों दोनों पर पर्यावरण का अलग प्रभाव होता है। बच्चे स्कूल, डे-केयर या पार्क में दूसरे बच्चों के संपर्क में रहते हैं, जिससे उन्हें संक्रमण जल्दी फैलता है। वहीं, बड़ों में प्रदूषण, धूम्रपान और कामकाजी जगहों के रासायनिक तत्वों के संपर्क में आने से फेफड़ों की सेहत बिगड़ती है। लंबे समय तक ऐसा होने पर उन्हें ब्रोंकाइटिस, सीओपीडी या अस्थमा जैसी पुरानी बीमारियां हो सकती हैं।

मेरा नाम सुनेना है और मैं बीते पाँच वर्षों से हिंदी कंटेंट लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हूं। विशेष रूप से महिला स्वास्थ्य, मानसिक सेहत, पारिवारिक रिश्ते, बच्चों की परवरिश और सामाजिक चेतना से जुड़े विषयों पर काम किया है। वर्तमान में मैं...