Overview:ठंड और प्रदूषण: रूमेटॉइड आर्थराइटिस के मरीजों के लिए दोहरा खतरा
सर्दियों में ठंड के साथ-साथ बढ़ता प्रदूषण भी रूमेटॉइड आर्थराइटिस के मरीजों के लिए बड़ा ट्रिगर बन रहा है। PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण फेफड़ों के रास्ते खून में पहुंचकर पूरे शरीर में सूजन बढ़ाते हैं, जिससे जोड़ों का दर्द, अकड़न और थकान तेज हो जाती है।
Winter Pollution & RA Flare-Ups-सर्दियां रूमेटॉइड आर्थराइटिस (RA) के मरीजों के लिए हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही हैं। लोग अक्सर ठंड को ही जोड़ों के दर्द और अकड़न का जिम्मेदार मानते हैं, लेकिन अब डॉक्टर एक और गंभीर ट्रिगर की ओर इशारा कर रहे हैं – सर्दियों का प्रदूषण। दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरों में नवंबर से फरवरी तक स्मॉग और PM2.5 का स्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है, जिससे RA के मरीजों में अचानक फ्लेयर-अप (लक्षणों का तेज होना) देखा जा रहा है। ये सूक्ष्म कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करके इम्यून सिस्टम को और उत्तेजित कर देते हैं, जिससे पहले से सूजे जोड़ों में दर्द कई गुना बढ़ जाता है।

प्रदूषण कैसे RA को भड़काता है?
सर्दियों में टेम्प्रेचर इन्वर्जन की वजह से प्रदूषक हवा में नीचे की परतों में फंस जाते हैं। PM2.5, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे कण फेफड़ों से होते हुए सीधे खून में पहुंच जाते हैं। ये कण शरीर में TNF-α और IL-6 जैसे साइटोकाइन की मात्रा बढ़ा देते हैं, जो पहले से ही RA के मरीजों में अधिक होते हैं। नतीजतन, कुछ ही घंटों की प्रदूषण एक्सपोजर से जोड़ों में जलन, सूजन और सुबह की अकड़न कई गुना बढ़ जाती है। जिन मरीजों को RA के साथ फेफड़ों की भी समस्या (इंटरस्टिशियल लंग डिजीज) होती है, वे और भी संवेदनशील होते हैं।
घर के अंदर का प्रदूषण खतरनाक?
सर्दियों में लोग ज्यादातर समय घर के अंदर बिताते हैं और खिड़कियां बंद रखते हैं। इससे धूल के कण, पालतू जानवरों की रूसी, हीटर या अंगीठी का धुआं, अगरबत्ती-मोमबत्ती और किचन का धुआं कमरे में जमा होने लगता है। ये सभी चीजें भी सूजन को बढ़ावा देती हैं। कई मरीजों को लगता है कि बाहर प्रदूषण कम होने पर वे सुरक्षित हैं, लेकिन घर के अंदर की हवा बाहर से भी ज्यादा खराब हो सकती है। इसलिए सिर्फ मास्क पहनना काफी नहीं, घर की हवा को साफ रखना भी जरूरी है।
इनपुट्स-डॉ. अश्विनी मेचंद, निदेशक – ऑर्थोपेडिक्स विभाग, सीके बिरला हॉस्पिटल®, दिल्ली
