Women Health
Reason Of Arthritis Credit: Istock

Reason Of Arthritis In Women: अर्थराइटिस, जिसे गठिया या जोड़ों का दर्द भी कहा जाता है, विश्व भर में सबसे आम पुरानी बीमारियों में से एक है। यह बीमारी न केवल बुजुर्गों को प्रभावित करती है, बल्कि युवा और मध्यम आयु वर्ग, विशेष रूप से महिलाओं को तेजी से अपनी चपेट में ले रही है। महिलाओं में अर्थराइटिस का जोखिम पुरुषों की तुलना में कहीं अधिक है। एक्‍सपर्ट्स के अनुसार महिलाएं रुमेटॉइड अर्थराइटिस के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। इस स्थिति में असहनीय दर्द, उठने-बैठने में परेशानी और सूजन की समस्‍या हो सकती है। आखिर अर्थराइटिस महिलाओं को ही अधिक क्‍यों होता हैं चलिए जानते हैं इसके बारे में।

बढ़ता वजन अर्थराइटिस का कारण

Arthritis In Women-क्‍यों होता है महिलाओं को अर्थराइटिस
Increased weight is a cause of arthritis

उम्र के साथ महिलाओं के शरीर में काफी बदलाव आते हैं, जिसकी वजह से उनका वजन बढ़ने लगता है। बढ़ता वजन अर्थरा‍इटिस होने की मुख्‍य वजह हो सकता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं का वजन और फैट अधिक होता है। जो जोड़ों पर दबाव डालता है। इसके अलावा ये ज्‍वॉइंट्स में मौजूद कार्टिलेज को नष्‍ट कर देता है जिसकी वजह से अर्थराइटिस होने का खतरा बढ़ जाता है।

ऑटोइम्‍यून डिसऑर्डर से बढ़ता अर्थराइटिस

ऑटोइम्यून बीमारियां भी अर्थराइटिस का एक बड़ा कारण हैं। रूमेटॉइड अर्थराइटिस, जो एक ऑटोइम्यून स्थिति है, महिलाओं में पुरुषों की तुलना में तीन गुना अधिक पाई जाती है। इस स्थिति में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपने ही जोड़ों पर हमला करती है, जिससे दर्द, सूजन और अकड़न होती है। इसके अलावा, अनुवांशिक कारक भी अर्थराइटिस को बढ़ावा देते हैं। अगर परिवार में किसी को अर्थराइटिस रहा हो, तो इसका जोखिम बढ़ जाता है।

हार्मोनल इमबैलेंस और अर्थराइटिस

महिलाओं में अर्थराइटिस का खतरा कई कारणों से बढ़ता है, जिसमें प्रमुख है हार्मोनल इमबैलेंस। महिलाओं में पीरियड्स, प्रेग्‍नेंसी और मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन्स में बदलाव होते हैं। मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन का स्तर कम होने से हड्डियों का घनत्व प्रभावित होता है, जिससे ऑस्टियोअर्थराइटिस और रूमेटॉइड अर्थराइटिस का खतरा बढ़ता है। इसके अलावा महिलाओं की शारीरिक संरचना पुरुषों से अलग होती है। उनके जोड़ और मांसपेशियां अपेक्षाकृत कमजोर होती हैं, जिससे जोड़ों पर दबाव पड़ने लगता है।

काम का बढ़ता स्‍ट्रैस

क्‍यों होता है महिलाओं को अर्थराइटिस
Increasing work stress

घर का काम हो या फिर ऑफिस की जिम्मेदारी, जिसे पूरा करने में महिलाओं के हाथों, कमर और घुटनों पर अत्‍यधिक दबाव पड़ता है। समय के साथ उनके ज्‍वॉइंट्स में कार्टिलेज खत्‍म होने लगता है जिसकी वजह से अर्थराइटिस की समस्‍या उत्‍पन्‍न हो जाती है। काम का बढ़ता स्‍ट्रैस और वर्कलोड महिलाओं को अंदर से कमजोर बना देता है जो कई बीमारियों को बढ़ावा दे सकता है। 

इंफ्लेमेशन से बढ़ता है अर्थराइटिस

अक्‍सर देखा होगा कि महिलाओं के निचले हिस्‍से, हिप्‍स और घुटनों पर अधिक फैट होता है। ये फैट मोटापे के कारण नहीं बल्कि सूजन यानी इंफ्लेमेशन की वजह से होता है। ये इंफ्लेमेशन ज्‍वॉइंट्स को प्रभावित करता है जिस वजह से उठने-बैठने और चलने में परेशानी आ सकती है। इंफ्लेमेशन बढ़ने का एक कारण है अनियमित लाइफस्‍टाइल, जो गठिया के जोखिम को बढ़ाती है। बेढंगी लाइफस्‍टाइल जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालती है, जिससे घुटनों और कूल्हों में अर्थराइटिस की संभावना बढ़ती है।