Health Tips: कहते हैं, कि एक अच्छी हेल्थ की चाबी हमेशा पेट से होकर गुजरती है। अगर हमारा पेट सही रहेगा तो हमारी हेल्थ भी दुरुस्त रहेगी। देखा जाए तो पेट में सबसे ज्यादा जिसका ख्याल रखना होते है वो हैं आंतें। जी हां आंतें ही तो हैं, जो कभी बीमार नहीं पड़नी चाहिएं। शोध की मानें तो आंतो के जो रोगाणु होते हैं वो वसा को जमा करने के सिस्टम को काफी प्रभावित करते हैं। जिनकी वजह से हमें भूख लगती है।
अगर हम इस पर और ध्यान नहीं देंगे तो हम मोटापे का शिकार होने लगते हैं। हम ये भी कह सकते हैं, कि हमारे शरीर और दिमाग की हेल्थ हमारे पेट की हेल्थ पर निर्भर करती है। हमें क्या खाना चाहिए , और किन चीजों से दूरी बनाकर रखनी चहिये? चलिए जान लेते हैं।
स्वाद के लिए पत्ता गोभी

जर्मन डिश में पत्ता गोभी का इस्तेमाल काफी ज्यादा किया जाता है। आप इसे अलग-अलग तरह या अलग चीजों के कॉम्बिनेशन के साथ पका सकते हैं। इससे पेट की हेल्थ अच्छी रहती है और आंतों में गुड बैक्टीरिया को पनपने में मदद करती है। पत्ता होभी विटामिन डी से भरपूर होती है।
पारम्परिक सोया टेम्पेह

टेम्पेह का नाम शायद ही आम भाषा में लोगों ने सुना होगा, लेकिन सोया टेम्पेह आंत की हेल्थ के लिए काफी फायदेमंद होती है। आप इसे स्टोर भी कर के रख सकती हैं। शोध के मुताबिक इसमें प्रोटीन की मात्रा अच्छी होती है। जो लैक्टोबैसिलस सहित हेल्दी बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करता है।
बीन पेस्ट मिसों

रसोई भारतीय हो या विदेशी। दोनों में ही सोयाबीन तो आसानी से मिल जाएगा। सोयाबीन से बना पेस्ट मिसो सूप के साथ बेहद स्वादिष्ट लगता है और पेट के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। इससे ब्लडप्रेशर कंट्रोल में रखता है और यह कैंसर रोकने में मदद करता है।
आंतों का ख्याल रखे केफिर

केफिर को देरी मुक्त पदार्थों से बनाया जाता है। आप चाहें तो घर पर ही इसे नारियल पानी से तैयार कर सकते हैं। आप इसे ज्यादा मीठा ना करें, क्योंकि चीनी आपके माईक्रोबयोम के लिए अच्छी नही होती।
घर का आचार

बात आचार की हो तो अपने आप ही मुंह में पानी आने लगता है। आप ताज़ी सब्जियों का आचार घर पर ही बनाएं, ना की बाहर से खरीदें। अप पत्ता गोभी, फूल गोभी और किमची का आचार बनाएं ये हेल्दी होगा। ये ज्यादा मसालेदार नहीं होनी चाहिए इस बात का भी ख्याल रखें।
फलों का सेवन भी जरूरी

पेट के लिए केला और सेब काफी फायदेमंद होते हैं। केला पोटेशियम और मैग्नीशियम से भरपूर होता है, जिससे पेट के अंदर की सूजन भी कम होती है। वहीं फाइबर से भरपूर सेब खाने की सलाह तो खुद डॉक्टर भी देते हैं। ये आंतों के लिए काफी फायदेमंद है। सेब हमेशा जैविक ही चुनें।
प्रोबायोटिक का भी रहे ख्याल

आंतों में समस्या है तो आपको दस्त, मुहं में मुंहासे और छाले सहित एक्जिमा की शिकायत हो सकती है। प्रोबायोटिक इन सभी परेशानियों से राहत देता है। अगर आप इसके स्तर में सुधार रखने के लिए कोई सप्लीमेंट लेते हैं, तो ये हमेशा काम नहीं करते। वो पैसे की बर्बादी है। आप प्रोबायोटिक को नेचुरल तरीकों से बरकरार रख सकते हैं और अगर बाहर से इसके सप्लीमेंट्स ले भी रहें हैं तो दिशा निर्देशों का ख्याल रखें।
कहते हैं, सुखी आंत तो सुखी स्वास्थ्य। अगर आंत स्वस्थ रहेगी तो पेट भी स्वस्थ रहेगा। और पेट स्वस्थ रहेगा तो आप बीमारियों से बचे रहेंगे। इसके लिए आप हमारी बताई हुई टिप्स को भी फॉलो कर सकते हैं। साथ ही आपको खान-पान में सावधानी भी बरतने की जरूरत है। अगर अपने मसालेदार और जंक फ़ूड को अपनी जीवन शैली में शामिल कर लिया तो समझ जाइये आंतों का बीमार होना तय है। इसके अलावा पहरेज करने के बाद भी आपका पेट बीमार रहता है तो आपको किसी जानकार या विशेषज्ञ की सलाह की जरूरत है।
