gardening tips
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Summary: मिट्टी के गमलों और प्राकृतिक उपायों से अपनाएं प्लास्टिक-फ्री गार्डनिंग

प्लास्टिक-फ्री गार्डनिंग अपनाकर आप न सिर्फ पौधों को स्वस्थ रख सकते हैं बल्कि पर्यावरण की रक्षा में भी योगदान दे सकते हैं। मिट्टी के गमले, प्राकृतिक खाद और टिकाऊ औज़ारों का उपयोग आपके गार्डन को और सुंदर व टिकाऊ बनाता है।

Plastic-Free Gardening: आजकल गार्डनिंग सिर्फ एक शौक नहीं, बल्कि एक स्वस्थ और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली का हिस्सा बन चुकी है। लेकिन अक्सर हम बिना सोचे-समझे गार्डनिंग में प्लास्टिक का खूब इस्तेमाल कर लेते हैं जैसे पॉलिथीन पॉट्स, प्लास्टिक की पानी की बोतलें, या खाद रखने के डिब्बे। ये सभी चीजें न केवल मिट्टी और पौधों को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण को भी बढ़ाती हैं। आइए जानें कि आप अपनी गार्डनिंग को प्लास्टिक-फ्री बनाकर कैसे प्रकृति के और करीब आ सकते हैं।

प्लास्टिक के गमलों की जगह मिट्टी के गमले, टेराकोटा पॉट्स या बांस के कंटेनर इस्तेमाल करें। ये न सिर्फ बायोडिग्रेडेबल होते हैं, बल्कि पौधों को प्राकृतिक वातावरण भी प्रदान करते हैं। मिट्टी के गमले में पौधों की जड़ों को सही नमी मिलती है, जिससे वे ज्यादा स्वस्थ रहते हैं।

घर में मौजूद पुराने बर्तन, लकड़ी के डिब्बे, टीन के डिब्बे या नारियल के खोल को पौधे लगाने के लिए इस्तेमाल करें। इससे दो फायदे होते हैं—एक तो प्लास्टिक का इस्तेमाल कम होगा और दूसरा पुराने सामान का नया उपयोग मिलेगा।

Plastic-Free Gardening-fertilizer
fertilizer

प्लास्टिक के पैक में आने वाले केमिकल फर्टिलाइज़र की बजाय घर का किचन वेस्ट, पत्तों का ढेर और जैविक कचरा मिलाकर कम्पोस्ट बनाएं। इसे आप गार्डन में लकड़ी या मिट्टी के बने कम्पोस्ट बिन में भी तैयार कर सकते हैं। इससे पौधों को प्राकृतिक पोषण मिलेगा और प्लास्टिक पैकेजिंग से भी बचा जा सकेगा।

प्लास्टिक की बोतलों या बाल्टियों की बजाय आप मेटल की बाल्टी, स्टील के जग या मिट्टी के सुराही का उपयोग कर सकते हैं। आजकल बाजार में बांस और नारियल के खोल से बने पानी डालने के बर्तन भी मिलते हैं। ये ज्यादा समय तक चलते हैं और पर्यावरण के लिए सुरक्षित होते हैं।

कई गार्डनिंग टूल्स प्लास्टिक से बने होते हैं। कोशिश करें कि आप लोहे, लकड़ी या बांस से बने औज़ार खरीदें। ये मजबूत भी होते हैं और लंबे समय तक चलते हैं।

garden tools
garden tools

प्लास्टिक की बोतलों में मिलने वाले पेस्टिसाइड्स की बजाय घर पर बने प्राकृतिक कीटनाशक इस्तेमाल करें, जैसे नीम का तेल, लहसुन का घोल या गोमूत्र। इससे पौधों की सेहत भी बनी रहेगी और प्लास्टिक के डिब्बों का उपयोग भी कम होगा।

अक्सर बीज और पौधे प्लास्टिक ट्रे या थैलियों में पैक होकर मिलते हैं। कोशिश करें कि आप बीज सीधे स्थानीय नर्सरी या किसान बाजार से खरीदें, जहाँ वे कागज़ी पैकेट या खुले में उपलब्ध हों। इससे प्लास्टिक पैकेजिंग से बचाव होगा और स्थानीय किसानों को भी समर्थन मिलेगा।

प्लास्टिक-फ्री गार्डनिंग न केवल आपके पौधों के लिए बेहतर है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी एक बड़ा योगदान है। अगर हम छोटे-छोटे बदलाव अपनाएं, जैसे मिट्टी के गमले लेना, पुराने सामान का उपयोग करना और प्राकृतिक खाद तैयार करना, तो हमारा गार्डन और भी सुंदर और टिकाऊ बन सकता है। अब वक्त आ गया है कि हम गार्डनिंग को सिर्फ शौक नहीं, बल्कि एक पर्यावरण-मित्र पहल बनाएं।

राधिका शर्मा को प्रिंट मीडिया, प्रूफ रीडिंग और अनुवाद कार्यों में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। हिंदी और अंग्रेज़ी भाषा पर अच्छी पकड़ रखती हैं। लेखन और पेंटिंग में गहरी रुचि है। लाइफस्टाइल, हेल्थ, कुकिंग, धर्म और महिला विषयों पर काम...