Pati or Husband (a willful creature) - satire
Pati or Husband (a willful creature) - satire

Hindi Vyangya: पति नामक जीव को ये दिन रोज के दिनों जैसे सामान्य लगते हैं। पत्नी बेचारी लाख कोशिश कर ले समझाने की, मगर इनके सिर में जूं तो होती नहीं जो कान पर रेंग जाए।

आप सोच रहे होंगे कि भला यह क्या बात हुई। पति कहो या हसबेंड कहो, बात तो एक ही प्राणी की हो रही है। यह वही प्राणी है जो स्वयं को बहुत मासूम और लाचार बताता है। उसकी बातें सुनकर और सोशल मीडिया पर इनके वीडियो देखकर तो लगेगा कि इस सृष्टि के सबसे दयनीय जीव यही हैं। लोक- काल-समाज-देश-भाषा के अनुसार उनको विभिन्न नाम दिए गए हैं, जैसे- प्राणनाथ, भरतार, जोरू का गुलाम, घरवाला, बलमा, मियां, शौहर, हनी वगैरह-वगैरह। मगर बात जब गंभीरता से इनके बारे में की जाए तो पति या हस्बैंड शब्द का ही उपयोग किया जाता है। अब आप कहेंगे लो, हमने बोला तो था कि दोनों का अर्थ एक है, अब आप भी मान गई न! तो रुकिए, मै बताती हूं
कि दोनों में अंतर कैसे है? हस्बैंड एक मॉडर्न, टेक-सेवी और इमोशनली अवेलेबल प्राणी होता है। हसबेंड और पति समान अर्थ रखते हुए भी अलग- अलग विशेषताओं से युक्त प्राणी हैं। ये जो हसबेंड होते हैं न, ये वह प्रजाति है जिसे अपनी पत्नी का बर्थडे, एनिवर्सरी आदि सब याद रहता है और वे उस दिन को स्पेशल बनाने में ऐड़ी-चोटी का जोर लगा देते हैं ताकि उनकी क्यूट सी पत्नी खुश हो जाए।
प्यार भरे स्टेटस, डिनर ह्रश्वलान और गिफ्ट तो सामान्य सी बात होती है इनके लिए। वहीं पति नामक जीव को ये दिन रोज के दिनों जैसे सामान्य लगते हैं। पत्नी बेचारी लाख कोशिश कर ले समझाने की, मगर इनके सिर में जूं तो होती नहीं जो कान पर रेंग जाए। बस जब पत्नी अपने ब्रह्मïस्त्र यानी रूठ कर आंसू बहाते हुए मायके जाने की धमकी देती है, तभी निंद्रा से जागते हैं और
पत्नी को मनाने के लिए पार्क, मंदिर या ढाबे पर खाना खाने का प्लान बना लेते हैं। लेकिन
साथ में घरवालों को भी ले जाना नहीं भूलते क्योंकि असली खुशी तो सबके साथ है न! हसबेंड के लिए उसकी पत्नी हमेशा बेबी
रहती है, जिसे वो टेडी बीयर, चॉकलेट वगैरह लाकर लाड़ दिखाता रहता है। उसके छोटे-छोटे कपड़े देखकर नाराज नहीं होता बल्कि उसे जींस पहना देखकर केयरफुली उससे कहता है, ‘बाबू, गर्मी लग जाएगी
तुम्हें, चलो-चलो, चेंज करके आओ, ओके यही पहनना है तो कोई बात नहीं, तुम पर तो सब अच्छा लगता है।’ और जो पति होते हैं न, उनके लिए तो सिर से पल्लू सरकना ही भूकंप आने जैसा हो जाता है। कोई पति थोड़ा खुले विचारों का है तब भी वह ब्लाउज और सूट के गले की गहराई पर ईमानदार
सेंसर बोर्ड की तरह सजग बना रहता है। बल्कि कपड़ों के रंग पर भी उनकी पारखी नजर बनी रहती है।

हसबेंड की बेबी ने किचन में थोड़ा भी काम कर लिया तो वे उसके थकने की चिंता में अधमरे हो जाते हैं। गलती से बाबू का हाथ चाकू से कट गया या जल गया तो उनकी दुनिया में अंधेरा छाने लगता है। तमाम नसीहतों और बाबू का फर्स्ट ऐड करने के बाद या तो वे स्वयं किचिन में घुस जाते हैं या खाना ऑनलाइन ऑर्डर हो किया जाता है। मगर बेचारी पत्नी जलने-कटने पर भी चुपचाप, बिना बोले काम करती रहेगी क्योंकि पति के अनुसार यह सब तो चलता रहता है कोई बड़ी बात नहीं। ज्यादा कहने पर उसके द्वारा मजबूत बनने का उपदेश देकर, नाराज होकर बिना भोजन किये जाने का डर भी पतिव्रता पत्नी को बना रहता है। वैसे एक मजेदार बात है कि ये प्राणी अपनी श्रेणियां बदलता रहता है। आज जो पति के रूप में दिख रहा है, वह कल हसबेंड के रूप में भी दिख सकता है और हसबेंड, पति भी बन सकता है। यह सब उस इच्छाधारी पर निर्भर करता है। अब आप बताइए आपके पास इस जीव का कौन-सा वाला रूप है और आपको कौन ज्यादा पसंद आता है?
क्योंकि अंतत: हर औरत के दिल में यही सवाल गूंजता है- ‘पति चाहिए या हसबेंड?’ या फिर कोई ऐसा, जो दोनों का संतुलन हो!