Hindi Kahani: ” पुष्पा जी आपको मालूम है संध्या जी ने अपने नए जीवन का आनंद नए स्तर से लेना शुरू कर दिया है। बहुत ही मेहनती और साधारण जीवन जीने वाली संध्या जी अच्छे विचारों और संस्कारों से युक्त हैं और अपने जीवन में इतना कुछ गलत और बुरा होने के बाद भी अपने जीवन में कभी भी असफलता को स्वीकार करके हार नहीं मानी और उनकी यह झलक उनके बच्चों में साफ दिखाई देती है “।
सावित्री जी सुबह की चाय पीते हुए अपनी पड़ोसन पुष्पा जी को यह सब बता रही थीं। संध्या कुछ समय पहले तक बैंक में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत थीं , बचपन में बहुत तकलीफें देखी थीं परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत कमज़ोर थी अपनी पढ़ाई अपनी मेहनत और विश्वास से पूरी की थी। युवावस्था में उसे राहुल से प्यार हो गया दोनों ने एक – दूसरे को स्वीकार भी कर लिया था मगर संध्या की पारिवारिक आर्थिक स्थिति बहुत कमज़ोर थी इसलिए राहुल और संध्या का विवाह नहीं हो पाया।
संध्या के माता – पिता अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में बताकर संध्या को भावुक कर देते हैं और फिर संध्या का विवाह रोहित से हो जाता है। मगर कुछ ही महीनों बाद उनका तलाक़ का मुकदमा न्यायालय में स्वीकार हो जाता है। संध्या की ” दर्द भरी दास्तान ” और ” दिल की ख़ामोश सिसकियाँ ” साथ में रहती हैं।
सुबह का सूरज अब आगे बढ़ने लगा था और संध्या अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए तैयार थी वह अपने घर के आंगन में तुलसी के पौधे को पानी देते हुए प्रार्थना कर रही थी कि उसकी यह नई कोशिश उसके और उसके बच्चों के जीवन में खुशियां लेकर आए। संध्या पूजा करके रसोईघर में खाना बनाने के लिए चली जाती है। अपनी बड़ी बेटी कंचन को आवाज़ देते हुए संध्या कहती है – ” बेटी कंचन सुबह हो गई आज तुम्हारा साक्षात्कार है नौकरी के लिए जल्दी करो अन्यथा तुम लेट हो जाओगी , और हां अपने छोटे भाई को भी बोलना की जल्दी तैयार हो जाए उसे परीक्षा देने जाना है “।
कंचन का राज्य स्तरीय परीक्षा में नौकरी के लिए साक्षात्कार है और छोटे बेटे विनोद की कॉलेज में परीक्षा है कुछ ही पलों में दोनों बच्चे अपनी मंजिल की ओर चले जाते हैं। उनके जाने के बाद संध्या अपना बैग लेकर शहर के सबसे बड़े वकील के पास जाने के लिए निकल जाती है अपने जीवन की ” दर्द भरी दास्तान ” को ” दिल की ख़ामोश सिसकियाँ ” में बदलने से रोकने के लिए।
शहर के सबसे बड़े वकील अरविंद ने संध्या को सुझाव दिया कि उसका यह तलाक का मुकदमा अभी बहुत आगे जाएगा अपना समय ख़राब करने के स्थान पर वह स्वयं कानून की पढ़ाई शुरू कर दे और अपनी इंटर्नशिप उनके दफ़्तर से पूरी कर सकती है। जिससे उसका समय बचेगा और ज्ञान बढ़ेगा जो उसके काम भी आएगा। संध्या को यह सुझाव अच्छा लगा और उसने अपनी कानून की पढ़ाई भी पूरी कर ली मगर कॉलेज में प्रथम आने की ख़बर ने पूरे शहर में उसका यह राज खोल दिया कुछ लोगों ने तारीफ तो किसी ने गलत निर्णय बताया मगर उसकी आत्मा और उसके बच्चों ने उसका साथ दिया।
क्योंकि अपनी मां की जिंदगी उन बच्चों ने भी देखी थी एक अकेली महिला ने अपने बच्चों का पालन – पोषण कैसे किया था। उन दिनों की ” दर्द भरी दास्तान ” संध्या और उसके बच्चों की ” दिल की ख़ामोश सिसकियाँ ” आज भी कहती हैं। अरविंद एक पत्र संध्या को देते हुए कहते हैं – ” संध्या आज से तुम मेरी असिस्टेंट हो और तुम अपने तलाक़ के मुकदमे की चर्चा मेरे साथ में करो एक वकील के रूप में जो एक महिला को न्याय दिलाना चाहती है। संध्या अपनी आँखें बंद करके अपने ज़ख्मों को याद करती है।
संध्या अपने स्वयं के मुकदमे की पढ़ाई कर रही थी। अरविंद कहते हैं – ” संध्या आप इस मुकदमे को अच्छी तरह से समझ लेना और फिर समय से अपने घर चले जाना। मुझे एक मुकदमे की सुनवाई के लिए न्यायालय जाना है “। अरविंद चले जाते हैं और संध्या कुछ समय बाद अपने मुकदमे के सभी दस्तावेजों को लेकर अपने घर की ओर चल देती है। घर पहुंचकर संध्या अपने बच्चों के साथ में कुछ समय बैठती है। और फिर अपने कमरे में जाकर अपने मुकदमे के दस्तावेजों और अपनी जिंदगी की ” दर्द भरी दास्तान ” के बारे में सोचती है सभी चीजें उसको याद आने लगती हैं। संध्या और उसके बच्चों के मन में उन सभी तकलीफों की ” दिल की ख़ामोश सिसकियाँ ” उनके दिलों की धड़कनों में अब भी बसी हुई थीं।
अगले दिन अरविंद एक मुकदमे के बारे में संध्या को बताते हैं जिसमें एक पत्नी ने तलाक और घरेलू हिंसा का आरोप लगाया है संध्या कहती है – ” पत्नी को न्याय मिलना चाहिए अरविंद जी यह मानसिकता समाज के लिए हानिकारक है “। अरविंद कहते हैं – ” आप एक बार इस मुकदमे के दस्तावेजों को देख लीजिए “। संध्या दस्तावेजों को पढ़ती है राहुल का नाम और तस्वीर देखकर आश्चर्यचकित हो जाती है अरविंद कहते हैं – ” अब क्या कहोगे आप संध्या जी “।
संध्या अब एक उलझन में स्वयं को देखती है। क्या राहुल दोषी है या नहीं क्या रोहित जितना दोषी है उतना ही दोष मेरा है , वह कुछ भी समझ नहीं पाती है। उसे बहुत रोना आ जाता है। संध्या अपने घर में बरामदे में रखी हुई कुर्सी पर बैठी हुई थी। तभी घर के दरवाजे के सामने रोहित को खड़ा हुआ देखकर वह आश्चर्यचकित हो जाती है। रोहित बहुत रोने लगता है और कहता है कि उसकी प्रेमिका ने उसे धोखा देकर राहुल से शादी कर ली और अब उसने अपने पति पर गंभीर आरोप लगाकर न्यायालय में मुकदमा दर्ज कर दिया। मगर तुमने कुछ नहीं किया मैंने तुम्हारे साथ बहुत गलत किया। मुझे माफ कर देना मैं तुम्हारी ” दर्द भरी दास्तान ” जो तुम्हारी धड़कनों के साथ में ” दिल की ख़ामोश सिसकियाँ ” के रूप में अस्तित्व में है उसका दोषी हूं।
