Overview:
कहा जाता है कि बच्चे अपने पेरेंट्स से ही सब सीखते हैं। ऐेसे में हर माता-पिता को बच्चों के सामने कुछ बातें करने से बचना चाहिए। ये सावधानियां आपके बच्चे को एक बेहतर इंसान बनाने में मददगार हो सकती हैं। पेरेंटिंग के दौरान यह एक जरूरी अध्याय है, जिसपर आमतौर पर लोग ध्यान नहीं देते हैं।
Parenting Tips for Kids: हर माता-पिता के लिए उनका बच्चा हमेशा छोटा ही रहता है। कई बार बच्चों की उम्र को देखते हुए पेरेंट्स उनके सामने कैसी भी बातें आपस में कर लेते हैं। उन्हें लगता है कि बच्चा इन बातों को नोटिस ही नहीं करेगा। लेकिन असल में ऐसा नहीं है। बच्चे उस स्पंज की तरह होते हैं, जिसे जो भी मिलता है वो सोख लेता है। संस्कारों के साथ बुरी बातें भी इस लिस्ट में शामिल हैं। इसलिए कहा जाता है कि बच्चे अपने पेरेंट्स से ही सब सीखते हैं। ऐेसे में हर माता-पिता को बच्चों के सामने कुछ बातें करने से बचना चाहिए। ये सावधानियां आपके बच्चे को एक बेहतर इंसान बनाने में मददगार हो सकती हैं। पेरेंटिंग के दौरान यह एक जरूरी अध्याय है, जिसपर आमतौर पर लोग ध्यान नहीं देते हैं। जबकि यह बहुत जरूरी है।
1. किसी के लुक्स पर न बोलें

बच्चों के सामने लुक्स या बॉडी शेमिंग को लेकर बात न करें। आप न अपनी बॉडी, न बच्चे की बॉडी और न ही किसी दूसरे की बॉडी शेप के बारे में बोलें। दरअसल, जब आप किसी के लुक्स और बॉडी को लेकर बात करते हैं तो बच्चा इसपर पूरा ध्यान देता है। यह बात उन पर नेगेटिव असर डालती है। इससे उनका आत्मविश्वास और आत्मसम्मान कमजोर होने लगता है। बड़े होकर वे अपने लुक्स के बारे में ज्यादा सोचने लगते हैं।
2. बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल के बारे
आज की ‘सैंडविच जनरेशन’ के सामने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करना एक मुश्किल काम है, लेकिन यह हमारी जिम्मेदारी भी है। कई बार हम घर और बाहर की जिम्मेदारियों से इतना थक जाते हैं कि बुजुर्ग माता-पिता और उनकी देखभाल को लेकर बुरा भला कह देते हैं। बच्चों के सामने ऐसा करना आपकी एक बड़ी गलती है। इस बात का उनकी मानसिकता पर सीधा असर पड़ता है। बच्चों में असुरक्षा की भावना आती है। बड़े होकर ये बातें बच्चों की सोच को भी प्रभावित करती हैं।
3. भाई बहनों से तुलना

छोटे या बड़े भाई बहनों से या दूसरे बच्चों से कभी भी अपने बच्चे की तुलना न करें। हालांकि अधिकांश पेरेंट्स यह गलती जरूर करते हैं। पेरेंट्स को लगता है कि इससे बच्चों को मोटिवेशन मिलेगा। जबकि कई बार यह तुलना बच्चों को अंदर से तोड़ देती है। इन तुलनाओं से बच्चों में ईर्ष्या, आक्रोश और असुरक्षा की भावना आती है।
4. आर्थिक मुद्दों पर चर्चा
बच्चों के सामने आर्थिक मुद्दों पर चर्चा करने से बचें। इससे बच्चों में असुरक्षा की भावना आ जाती है। हालांकि इस बात का यह मतलब बिलकुल नहीं है कि आप बच्चों को अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में न बताएं। उन्हें बताएं कि इस साल आप नई कार नहीं खरीद पा रहे हैं, या महंगे हॉलीडे पर नहीं जा पाएंगे, या अभी आप कोई बड़ा खर्चा नहीं उठा सकते। लेकिन इसके अलावा उनके साथ आर्थिक संघर्षों की बात न करें। इससे बच्चों पर बुरा असर पड़ सकता है। वे अपने आपको दूसरों से कमतर मानने लगते हैं।
5. रिश्तेदारों की बुराई
हर परिवार में रिश्तेदारों के साथ कोई न कोई मनमुटाव हमेशा चलता रहता है। लेकिन आप कभी भी अपने रिश्तेदारों की बुराइयां बच्चों के सामने न करें। क्योंकि ऐसा करने पर बच्चे भी उनके लिए वैसी ही धारणा बना लेंगे। आपको बच्चों को ये समझाना होगा कि कोई भी रिश्ता परफेक्ट नहीं होता। लेकिन इन्हें निभाने में ही आपकी जीत है।
