External Self Talk Techniques
External Self Talk Techniques

Overview:

एक्सटर्नल सेल्फ-टॉक तकनीक में व्यक्ति अपनी सोच या विचारों को जोर से बोलता है। यानी वह अपने आप से बातेंं करता है। यह एक मानसिक प्रक्रिया है, जिसमें हम अपने दिमाग में चल रहे विचारों को आवाज के रूप में बाहर व्यक्त करते हैं।

Self Talk Technique: इंटरव्यू पर जाने के पहले आत्मविश्वास कमजोर पड़ रहा हो या फिर किसी बात को लेकर असमंजस की स्थिति हो, अकेलापन महसूस कर रहे हो या चिंता सता रही हो… इन सभी परिस्थितियों का एक आसान हल है ‘एक्सटर्नल सेल्फ-टॉक’। दुनियाभर के लोग एक्सटर्नल सेल्फ-टॉक तकनीक से अपना तनाव और चिंताएं दूर कर रहे हैं। साथ ही अपने आत्मविश्वास को बढ़ा रहे हैं। क्या है यह तकनीक और कैसे करती है यह काम, आइए जानते हैं।

World Smile Day
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दरअसल, एक्सटर्नल सेल्फ-टॉक तकनीक में व्यक्ति अपनी सोच या विचारों को जोर से बोलता है। यानी वह अपने आप से बातेंं करता है। यह एक मानसिक प्रक्रिया है, जिसमें हम अपने दिमाग में चल रहे विचारों को आवाज के रूप में बाहर व्यक्त करते हैं। यह आंतरिक संवाद का बाहरी रूप है। दुनियाभर के शोधकर्ताओं का दावा है कि इस तकनीक से आपकी समस्याएं दूर होती हैं।  

जब आप किसी कठिन स्थिति का सामना करते हैं, तो एक्सटर्नल सेल्फ-टॉक आपका मददगार बनेगा। इससे चिंताओं और तनाव को कम किया जा सकता है। मिडिल टेनेसी स्टेट यूनिवर्सिटी में मनोवैज्ञानिक डॉ. थॉमस ब्रिन्थौप्ट कहते हैं कि अत्यधिक तनाव ही नहीं बल्कि चुनौतियां भी इस तकनीक से कम होती हैं। यह तकनीक आपको बल देती है कि आप इस परेशानी का हल खुद खोज लेंगे। आप इसे हैंडल कर लेंगे। इतना ही नहीं, यह भी महसूस करेंगे कि आप इसे कैसे हैंडल करेंगे।

​विस्कॉन्सिन मेडिसिन यूनिवर्सिटी में सेल्फ टॉप पर रिसर्च करने वाले में मनोवैज्ञानिक कहते हैं एक्सटर्नल सेल्फ-टॉक तकनीक आपका फोकस बढ़ाने में मददगार होता है। यह समस्या का हल निकालने का बहुत ही आसान तरीका है। इससे आपका फोकस और प्रदर्शन दोनों बेहतर होता है। इस तकनीक की मदद से व्यक्ति को अपनी सोच को स्पष्ट रूप से व्यवस्थित करने में मदद मिलती है।

फिल्म ‘वेलकम’ में जब नाना पाटेकर को किसी बात पर गुस्सा आता था तो वह हमेशा बोलता था, ‘कंट्रोल उदय, कंट्रोल’। आप इसे एक्सटर्नल सेल्फ-टॉक तकनीक का एक उदाहरण मान सकते हैं। ‘मैं शांत रहूंगा’,’मुझे गुस्सा नहीं होना’,’मुझे रोना नहीं है’, जैसी बातें अपने आप को बोलकर आप अपनी ​फीलिंग्स को कंट्रोल कर सकते हैं। इसका असर आपको तुरंत नजर आएगा।

कई बार आपके पास प्रेरित करने के लिए कोई नहीं होता। किसी इंटरव्यू से पहले या गेम्स में प्रदर्शन से पहले, कोई प्रेजेंटेशन देने से पहले, अगर आप नर्वस फील करते हैं तो भी   एक्सटर्नल सेल्फ-टॉक तकनीक आपके काम आएगी। इससे आप खुद को मोटिवेट कर सकते हैं। इससे आप आत्मविश्वास महसूस करेंगे। जब आप खुद से बोलते हैं कि ‘मैं इस काम को कर लूंगी’, ‘मैं जीत जाऊंगा’,’सब सही होगा’, तो यकीन मानिए वाकई आपके अंदर जोश आएगा और आप तनावमुक्त होकर काम कर पाएंगे।

आपने बचपन से यही सुना होगा कि जोर-जोर से बोलकर बोलकर पढ़ाई करनी चाहिए, इससे आपको सब कुछ जल्दी याद होता है और आप याद किया हुआ भूलते भी नहीं हो। यह एक तरीके से एक्सटर्नल सेल्फ-टॉक तकनीक ही है। शोधकर्ताओं के अनुसार एक्सटर्नल सेल्फ-टॉक से आपकी याददाश्त मजबूत होती है। आपको बातें लंबे समय तक याद रहती हैं। यानी ऐसा करके आप याददाश्त बढ़ा सकते हैं।

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...