Parenting Advice: समय के साथ पेरेंटिंग बेहद चुनौतिपूर्ण होती जा रही है। खासकर टीनेज बच्चों को संभालना और सिखाना बेहद मुश्किल हो गया है। रोल मॉडल बनने के चक्कर में अब माता-पिता पेरेंट्स कम दोस्त बनना ज्यादा पसंद करते हैं। ऐसे में पेरेंट्स और बच्चे के बीच के बैलेंस को बनाए रखना काफी चैलेंजिंग हो जाता है। बच्चे पेरेंट्स को अपना आदर्श मानते हैं। वह जैसा व्यवहार करते हैं, बच्चे उसी के अनुसार उनका आदर और सम्मन करते हैं। यदि आप बच्चे की डिसरिस्पेक्ट करेंगे या ताने देंगे तो बच्चे भी आपका सम्मान करना बंद कर देंगे। इसलिए अपनी कुछ आदतों में सुधार करना करना जरूरी है ताकि बच्चे ताउम्र आपकी रिस्पेक्ट करें।
हर बात पर टोकना

बच्चे को अच्छे संस्कार और आदतें सिखाने के लिए पेरेंट्स को कई बार बच्चे को टोकना या डांटना पड़ता है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप बच्चे को हर छोटी बात पर टोकें। बच्चों को ज्यादा टोकने से वह ढीट हो जाते हैं और पेरेंट्स की बातों को नजरअंदान करने लगते हैं। यदि आप भी अपने बच्चे से सम्मान और आदर पाना चाहते हैं तो बच्चे को जहां जरूरत हो बस वहीं टोकें।
बच्चे की तुलना करना
अधिकांश पेरेंट्स अपने बच्चे की तुलना उसके किसी फ्रेंड से करते हैं। कई बार तुलना करना फायदेमंद होता है लेकिन कई बार तुलना करने से बच्चे पेरेंट्स को अपना दुश्मन मान लेते हैं। खासकर टीनेज बच्चे पेरेंट्स की बातों को इग्नोर करने लगते हैं। हालांकि आप तुलना करके अपने बच्चे को बूस्टअप करने की कोशिश करते हैं लेकिन आपके ऐसे व्यवहार से बच्चे के आत्मसम्मान को ठेस पहुंच सकती है। इसलिए यदि आपको अपने बच्चे के सामने दूसरे बच्चे की तारीफ करने की आदत है तो उसे आज ही छोड़ दें। ऐसा न करने से बच्चे के मन में आपके प्रति आदर और सम्मान कम हो सकता है।
झगड़ा करने की आदत
कई बार घर में ऐसी स्थिति बन जाती है कि पेरेंट्स के बीच झगड़ा या अनबन हो जाती है। झगड़े के चलते पेरेंट्स कई बार अपना आपा भी खो देते हैं। पेरेंट्स के इस व्यवहार का दुष्प्रभाव बच्चे पर पड़ सकता है। इसलिए यदि पेरेंट्स आपस में लड़ते और झगड़ते हैं तो इस दौरान मर्यादा का ध्यान रखें। पेरेंट्स द्वारा किए गए ऐसे व्यवहार के चलते बच्चों के मन में उनके प्रति आदर कम हो सकता है।
अपनी बात पर टिके रहना

बच्चे को खुश करने के लिए पेरेंट्स अक्सर बच्चे को घुमाने या खिलौने देने का वादा कर देते हैं। लेकिन जब वह अपनी बात से मुकर जाते हैं या वादा पूरा नहीं करते तो बच्चे उन्हें नजरअंदाज करने लगते हैं। कई बार बच्चे उनकी डिसरिस्पेक्ट भी कर देते हैं। यदि आप भी अपने बच्चे से वादा करके उसे पूरा नहीं करते तो अपनी इस आदत को सुधार लें।
गलतियों को पकड़े रहना
बच्चे गलतियां करके ही सीखते हैं। लेकिन उन गलतियों को पकड़े रहना और बात-बात पर ताने देना सही नहीं है। जब बच्चा गलती करे, तो उन्हें मार्गदर्शन करना, माफ करना और आगे बढ़ने की सीख देना ही बेस्ट पेरेंटिंग होती है। बच्चे की पुरानी गलतियों को पकड़े रहने से पेरेंट्स और बच्चे के रिश्ते में बाधा उत्पन्न हो सकती है। इसलिए बच्चे पर विश्वास रखें और उन्हें गलतियों से सीख लेने के लिए प्रेरित करें। ऐसा करने से आपके और बच्चे के बीच प्यार बरकरार रहेगा।
