Celiac Disease during Pregnancy: प्रेग्नेंसी हर महिला के लिए बेहद खास और अलग अनुभव होता है। खासकर उनके लिए जो प्रेग्नेंसी के दौरान सीलिएक डिजीज की समस्या का सामना करती हैं। हालांकि ये समस्या रेयर है जिसका सामना कुछ ही प्रतिशत महिलाओं को करना पड़ता है। ये एक प्रकार की एलर्जिक डिजीज है जो किसी खानपान से संबंधित होती है। सीलिएक डिजीज का प्रभाव प्रेग्नेंसी और बच्चे दोनों पर पड़ सकता है। आखिर सीलिएक डिजीज क्या है और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है, चलिए जानते हैं इसके बारे में।
क्या है सीलिएक डिजीज

सीलिएक डिजीज एक ऑटोइम्यून डिजीज है, जो प्रेग्नेंसी में उनके होने वाले बच्चे के विकास पर असर डाल सकती है। सामान्यतौर पर ये बीमारी ग्लूटन खाने की वजह से होती है। ये समस्या पाचनतंत्र को प्रभावित करती है। सीलिएक डिजीज गेहूं, जौ और ओट्स जैसे ग्लूटन वाले अनाज से होने वाली डिजीज है। ये समस्या महिला के स्मॉल इंटेस्टाइन को नुकसान पहुंचाती है साथ ही कई अन्य समस्याएं भी बढ़ा सकती है।
सीलिएक डिजीज के मुख्य लक्षण
- – इस डिजीज की वजह से कोख में पल रहे बच्चे की ग्रोथ प्रभावित हो सकती है।
- – होने वाले बच्चे में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
- – इस दौरान महिलाओं को उल्टी, दस्त और कब्ज की समस्या हो सकती है।
- – इसके साथ ही पेट में दर्द, गैस, पेट फूलने जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।
- – प्रेग्नेंसी में महिलाओं को हड्डियों से संबंधित बीमारी, मिसकैरेज और आयरन की कमी भी हो सकती है।
- – पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक खाना न खाने की वजह से शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
सीलिएक डिजीज कैसे करता है प्रेग्नेंसी को प्रभावित
- – ये डिजीज आपके शरीर के लिए पर्याप्त विटामिन और मिनरल को एब्जॉर्ब करना कठिन बना देती है। जिस वजह से बच्चे कुपोषित हो सकते हैं।
- – इसके अलावा सीलिएक रोग से संबंधित कुछ एंटीबॉडी प्लेसेंटा को नुकसान पहुंचा सकते हैं और अन्य बीमारियों को न्योता दे सकते हैं।
- – इस डिजीज के चलते 85 प्रतिशत महिलाओं का मिसकैरेज होने का खतरा बढ़ जाता है।
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प्रेग्नेंसी में सीलिएक डिजीज होने पर बरतें सावधानियां

- – इस दौरान प्रेंग्नेंट महिला को फाइबरयुक्त आहार का अधिक सेवन करना चाहिए। इससे बच्चे की ग्रोथ सामान्य हो सकती है।
- – प्रेग्नेंसी में महिलाओं को ग्लूटनयुक्त आटे की बजाय बेसन और मक्के का सेवन करना चाहिए।
- – महिला और होने वाले बच्चे को पोषक तत्वों की कमी न हो इसके लिए डाइट में चावल, ज्वार, बाजरा और साबुत अनाज शामिल करें।
- – इस दौरान डेयरी प्रोडक्ट भी फायदेमंद साबित हो सकते हैं। लेकिन इसका अधिक सेवन न करें।
- – महिलाएं सिंघाड़े के आटे का प्रयोग कर सकती हैं। इसके अलावा साबूदाना, मूंग दाल आटा भी फायदेमंद साबित हो सकता है।
- – प्रेग्नेंसी में बाहर का खाना खाने से बचें। इसमें ग्लूटनयुक्त चीजों का इस्तेमाल हो सकता है।
- – इसके अलावा प्रोसेस्ड फूड से भी दूर रहें। पैक्ड फूड में अधिक मात्रा में गेहूं आटा और मैदा का प्रयोग किया जाता है। जो कि आपके और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
