वजाइना का पीएच संतुलन बनाये रखें, नहीं तो हो सकता है गंभीर इन्फेक्शन: Vaginal Infection and Ph Level
Vaginal Infection and Ph Level

वजाइना का पह लेवल बना रहे, अपनाएं ये तरीके

अक्सर हमारा ध्यान इस पर जाता ही नहीं है। अगर हम ठीक तरह से देखें तो हमें मालूम चलेगा कि पीएच चेक करने के लिए जो स्केल इस्तेमाल किया जाता है वो शून्य से लेकर 14 कि गिनती तक चलता है।

Vaginal Infection and Ph Level: वजाइनल हेल्थ ठीक ना हो तो अक्सर हम इसे सेक्सुअल हेल्थ से जोड़ कर देखते हैं। महिलाओं को लगने लगता है की ये परेशानी उन्हें जरूर किसी सेक्सुअली ट्रांसमिटेड संक्रमण के कारण हो रही है। लेकिन कई बार ये दिक्कत वजाइनल पीएच स्तर के गड़बड़ाने की वजह से भी होती है। लेकिन अक्सर हमारा ध्यान इस पर जाता ही नहीं है। अगर हम ठीक तरह से देखें तो हमें मालूम चलेगा कि पीएच चेक करने के लिए जो स्केल इस्तेमाल किया जाता है वो शून्य से लेकर 14 कि गिनती तक चलता है। इसमें अगर पीएच 7 से कम है तो इसे अम्लीय यानी एसिडिक माना जाता है। अगर ये 7 से ज्यादा होता है तो इसे अल्कालाइन माना जाता है। ठीक इसी तरह एक स्वस्थ वजाइना का पीएच  एक महिला कि 16  से 48 वर्ष तक कि उम्र पर उनके फर्टाइल दिनों में 3 .8 से 4 .5 के बीच में होता है।

वहीं दूसरी तरफ अगर प्युबर्टी और मेनोपॉज़ के बाद का समय देखा जाए तो ये करीब 4 .5 होता है।

सेक्सुअली ट्रांसमिटेड संक्रमण का खतरा।

बैक्टीरियल इन्फेक्शन की समस्या ।

फंगल इन्फेक्शन की परेशानी।

जलन, दाने हो जाना या बेचैनी होना।

फिजिकल रिलेशन ना बना पाना।

वजाइना से बदबूदार स्राव होना।

वजाइना के साथ साथ अंदरूनी हिस्से में भी दर्द बने रहना।

मार्किट में मिलने वाले वजाइनल क्लीनिंग उत्पादों का इस्तेमाल ना करें। इनको आकर्षक बनाने के लिए इसमें खुशबु वाले पदार्थ मिलाएं जाते हैं। जिनका इस्तेमाल करने पर महिलाओं को फायदा नहीं बल्कि काफी नुकसान होता है। ये प्रोडक्ट्स वजाइनल ph लेवल को गड़बड़ा देते हैं। इसलिए इनका इस्तेमाल ना करें। यूरिन के बाद साफ़ पानी और टिश्यू से इसे साफ़ करें इस तरह इसका पीएच भी मेन्टेन रहेगा।

कई बार महिलाएं फैंसी अंडरगारमेन्ट्स का इस्तेमाल करना पसंद करती हैं। लेकिन इस तरह के अंडरगारमेन्ट्स आरामदायक नहीं होते हैं। वजाइनल हेल्थ को अच्छा बनाये रखने के लिए कॉटन की पेंटी पहने और जरुरत पड़ने पर एक से दो बार इसे बदल भी लें।

वजाइनल पीएच अच्छा बने रहे, इसके लिए दही, छाछ, केले आदि का सेवन करें।

वजाइना के पीएच को बनाये रखने के लिए अपने शरीर को हाइड्रेट रखें, एक दिन में काम से काम 8 से 10  गिलास पानी पिएं।

अगर आप मेंस्ट्रुअल कप  का इस्तेमाल करती हैं तो पीरियड फ्लो कम होने पर भी इसे समय समय पर बदलती रहें।

इंटिमेट होते वक़्त कंडोम का इस्तेमाल जरूर करें।

यूरिन पास करने के बाद अपनी वजाइना को पानी से अच्छी यारह साफ़ करें और टिश्यू से गीलापन सोख लें।

बहुत ज्यादा टाईट  कपडे ना पहनें।

अपने अंदरूनी कपड़ों को समय समय पर बदलती रहें, और साथ ही सूती कपड़ों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें।

वजाइना का पीएच लेवल ना बिगड़े इसके लिए साफ़ सफाई का बेहद ख्याल रखें। वजाइना के आस पास गीलापन बने रहने से भी बैक्टीरियल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ता है। साफ़ कपड़ें पहनाए और वजाइनल एरिया के आस पास डॉयनेस बनी रहे इस बात का ख़ास ख्याल रखें।

उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाली तरूणा ने 2020 में यूट्यूब चैनल के ज़रिए अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद इंडिया टीवी के लिए आर्टिकल्स लिखे और नीलेश मिश्रा की वेबसाइट पर कहानियाँ प्रकाशित हुईं। वर्तमान में देश की अग्रणी महिला पत्रिका...