दीवाली से जुड़े 5 पर्वों का महत्त्व: Festival Related to Diwali
Festival Related to Diwali

Festival Related to Diwali: दीवाली हर कोई पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाता है, लेकिन दीवाली के आगे और पीछे कई ऐसे त्यौहार जुड़े हैं, जिन्हें हम पूरे हफ्ते भर तक मनाते हैं और पूरा वीक ही फेस्टिवल वीक बन जाता है। आइए, जानें कुछ ऐसे ही फेस्टिवल के बारे में।

कार्तिक मास की अमावस्या के दिन दीवाली मनाई जाती है। दीवाली 1 दिन का न होकर पर्वों की एक श्रंृखला है। इसके साथ पांच पर्व जुड़े हुए हैं, इसलिए हिंदु धर्म में दीवाली को पांच पर्वों का त्यौहार कहा जाता है, जो धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज पर समाप्त होता है। इन पांच पर्वों के अंतर्गत धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीवाली और भईया दूज शामिल है। इन सभी के साथ दंतकथाएं जुड़ी हुई हैं। दीवाली का त्योहार दीवाली से दो दिन पहले आरंभ होकर दो दिन बाद समाप्त होता है, आइए इन पांचों दिनों के महत्त्व के बारे में जानें-

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दीवाली से जुड़े 5 पर्वों का महत्त्व: Festival Related to Diwali
Dhanteras

आज के दिन का अपना एक अलग ही महत्त्व है क्‍योंकि आज के दिन ही भगवान धनवन्‍तरी का जन्‍म हुआ था जो कि समुन्‍द्र मंथन के दौरान अपने साथ अमृत का कलश व आयुर्वेद लेकर प्रकट हुए थे। तभी से इस दिन का नाम ‘धनतेरसÓ पड़ा और इस दिन बर्तन, धातु व आभूषण खरीदने की परंपरा शुरू हुई। इस दिन को शुभ माना जाता है इसलिए महिलाएं कुछ सोने या चांदी या कुछ नए बर्तन खरीदती हैं और भारत के कुछ भागों में, पशु की भी पूजा की जाती हैं। इस दिन पर मृत्यु के देवता- यम का पूजन करने के लिए सारी रात दीपक जलाएं जाते हैं इसलिए यह ‘यमदीपदानÓ के रूप में भी जाना जाता है।

narak chaturdashee
narak chaturdashee

नरक चतुर्दशी को कहीं-कहीं छोटी दीपावली भी कहा जाता है क्‍योंकि ये दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाती है और इस दिन मूल रूप से यम पूजा हेतु दीपक जलाए जाते हैं, जिसे दीप दान कहा जाता है। मान्‍यता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी राजा नरकासुर का वध किया था। इस नृशंस राक्षस के वध से जनता में अपार हर्ष फैल गया और प्रसन्नता से भरे लोगों ने घी के दीए जलाए। कहते हैं कि इस दिन सूर्योदय से पूर्व उबटन एवं स्नान करने से समस्त पाप समाप्त हो जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है।

Diwali
Diwali

दीपावली के दिन सभी घरों में लक्ष्मी-गणेश जी की पूजा की जाती है और हिन्दू मान्यतानुसार अमावस्या की इस रात्रि में लक्ष्मी जी धरती पर भ्रमण करती हैं तथा लोगों को वैभव का आशीष देती हैं। हिन्‍दु धर्म में मान्यता है कि इस दिन यदि कोई श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी की पूजा करता है, तो उसके घर कभी धन-धान्‍य की कमी नहीं होती। हिंदुओं में इस दिन लक्ष्मी पूजन का विशेष विधान है हालांकि दीपावली की पूरी रात्रि एक प्रकार से जागकर ही बिताई जाती है क्‍योंकि मान्‍यता है कि माता लक्ष्‍मी जब पृथ्‍वी पर भ्रमण करती हैं, तब केवल उन्‍हीं घरों में जाती हैं, जिनमें घर के सदस्‍य जाग रहे होते हैं, पूजा आराधना कर रहे होते हैं अथवा अपने व्‍यापार से सम्‍बंधित किसी उपयोगी कार्य में व्‍यस्‍त होते हैं। भारतीय व्यापारी नये बही-खाते इसी दिन से प्रारम्भ करते हैं और अपनी दुकानों, फैक्ट्री, द$फ्तर आदि में भी लक्ष्मी-पूजन का आयोजन करते हैं, इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने राजा बलि को पाताल लोक का स्वामी बनाया था और इन्द्र ने स्वर्ग को सुरक्षित जानकर प्रसन्नतापूर्वक दीपावली मनाई थी।

इस दिन को लेकर मान्यता है कि त्रेतायुग में जब इन्द्रदेव ने गोकुलवासियों से नाराज
होकर मूसलाधार बारिश शुरू कर दी थी, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर गांववासियों को गोवर्धन की छांव में सुरक्षित किया। तभी से इस दिन गोवर्धन पूजन की परंपरा भी चली आ रही है। दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन की पूजा-अर्चना करते हुए भगवान कृष्‍ण को याद किया जाता है। इस दिन घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन बनाए जाते हैं और उनका पूजन कर पकवानों का भोग अर्पित किया जाता है। अन्नकूट मनाने के महत्व के रूप में लोग बड़ी मात्रा में भोजन की सजावट करते है और पूजा करते है।

Bhai Dooj
Bhai Dooj

यह भाइयों और बहनों का त्यौहार है, जो भाइयों और बहनों के बीच प्रेम को दर्शाता है। रक्षाबंधन के दिन भाई अपनी बहन को अपने घर बुलाता है जबकि भाई दूज पर बहन अपने भाई को अपने घर बुलाकर उसे तिलक कर भोजन कराती है और उसकी लंबी उम्र की कामना करती है। भाई उन्हें उनके प्यार की निशानी के रूप
में एक उपहार देते हैं। कहा जाता है कि आज के दिन यम अपनी बहन यामी (यमुना) से मिलने आये और अपनी बहन द्वारा उनका आरती के साथ स्वागत हुआ और उन्होंने साथ में खाना भी खाया। उन्होंने अपनी बहन को उपहार भी दिया। इस दिन को लेकर मान्यता है कि जो बहन इस दिन अपने भाई को आमंत्रित कर तिलक करके भोजन कराएगी, उसके भाई की उम्र लंबी होगी। तभी से भाई दूज पर यह परंपरा बन गई।