Shiksha Poem: शिक्षा वह अनमोल हीरा है जिसे एक शिक्षक ही दे सकता है, किसी बच्चे को कुंदन बनाना है किसे सोना यह एक शिक्षक ही समझ सकता है।
हर बच्चे को एक मूर्ति के समान तरस्ता है ,शिक्षक बन जाता है एक मूर्तिकार, किसी बच्चे को क्या रूप देना है यह एक शिक्षक ही समझ सकता है।
कभी मां जैसा दुलार देता है कभी बाप जैसा प्यार शिक्षक बन जाता है एक परिवार, किसी बच्चे को कैसे निखरना है यह एक शिक्षक ही समझ सकता है।
पत्थर में से भी हीरा चुन लेता है, और पत्थर को भी हीरा बना देता है यह एक शिक्षक ही समझ सकता है।
शिक्षा की ज्योत से अज्ञानी को भी ज्ञानी बना देता है अपने ज्ञान से हर बच्चे में ज्ञान का भंडार भर देता है यह एक शिक्षक ही समझ सकता है।
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