aise hain mahaaraaj - Tenali Rama Story In Hindi
aise hain mahaaraaj - Tenali Rama Story In Hindi

Tenali Rama Story In Hindi : महाराज कृष्णदेव राय के दरबार में अनेक दरबारी तेनालीराम से जलते थे। तेनालीराम राजा के प्रिय थे और प्रायः तरह-तरह के उपहार व पुरस्कार पाते रहते।

एक बार वे छुट्टी पर थे महाराज अपने मंत्री व सहायकों के साथ घूमने निकले। महल से निकलने से पहले, उन सबने आम आदमियों जैसे कपड़े पहन लिए ताकि कोई पहचान न सके।

राजधानी में घूमते-घूमते वे एक गाँव में जा पहुँचे। उन्होंने देखा कि सड़क के एक ओर कुछ किसान बैठे बातें कर रहे थे।

उन्होंने वहाँ जाकर पूछा, “हम पड़ोसी राज्य से आए। सिर्फ यही जानना चाहते हैं कि विजयनगर के लोग सुख से रह रहे है या नहीं। राजा अपनी प्रजा की भलाई का ध्यान रखते हैं या नहीं।”

aise hain mahaaraaj - Tenali Rama Story In Hindi
aise hain mahaaraaj – Tenali Rama Story In Hindi

सभी किसानों ने अपने महाराज की तारीफ की। उनके बीच एक बूढ़ा व्यक्ति भी बैठा था। वह अपने स्थान से उठा और एक गन्ना ले आया। उसने गन्ने को दो टुकड़ों में तोड़कर कहा “भाई! हमारे महाराज ऐसे हैं।”

महाराज ने मंत्री को देखा। मंत्री बोला, “महाराज यह बूढ़ा आपका अपमान कर रहा है। यह कहना चाहता है कि हमारा राजा कमजोर है। कोई भी उसे आसानी से हरा सकता है।”

aise hain mahaaraaj - Tenali Rama Story In Hindi
aise hain mahaaraaj – Tenali Rama Story In Hindi

राजा को बहुत बुरा लगा। दूसरे दरबारियों से पूछा तो उन्होंने भी यही बात कही। यह सुनकर वे आपा खो बैठे। इससे पहले कि वे कुछ बोलते, पगड़ी पहने एक व्यक्ति आगे जा कर बोला, “महाराज! गुस्सा न हों। मैंने आपको पहचान लिया। आप हमारे प्रिय राजा कृष्णदेव राय हैं। प्रजा आपको बहुत चाहती है व सम्मान देती है ।

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aise hain mahaaraaj – Tenali Rama Story In Hindi

आपको भी समझना चाहिए, बूढ़े आदमी ने गन्ने के दो टुकड़े करके यह कहना चाहा कि महाराज ऊपर से गन्ने की तरह सख़्त पर भीतर से मीठे हैं।”

यह सुनकर महाराज के चेहरे की हँसी लौट आई। उन्होंने अजनबी से पूछा, “तुम विजय नगर के नहीं लगते। जान सकता हूँ कि तुम कौन हो?”

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aise hain mahaaraaj – Tenali Rama Story In Hindi

“महाराज आप मुझे पहचानने में नाकामयाब रहे,” कहकर उस व्यक्ति ने पगड़ी और नकली दाढ़ी उतार दी।

राजा अपने सामने तेनालीराम को देख हैरान रह गए।

महाराज ज़ोर-ज़ोर से हँस पड़े व उन्हें गले से लगा लिया और बोले, “तभी तो तुम मेरे इतने प्रिय हो। मैं तुम्हारी समय पर दी गई सलाह और बुद्धिमता की प्रशंसा करता हूँ।”

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