Exercise During Periods: फिट रहने के लिए एक्सरसाइज और हेल्दी लाइफस्टाइल सबसे महत्वपूर्ण है। लेकिन पीरियड्स आते ही, ज्यादातर महिलाएं इस बात को लेकर भ्रमित हो जाती हैं कि क्या उन्हें अपने वर्कआउट रूटीन को जारी रखना चाहिए। अपनी जिम क्लास को स्किप कर देना चाहिए या धीमी गति से एक्सरसाइज करनी चाहिए। हर महिला पीरियड्स के दौरान अलग अनुभव करती है। इसलिए जब फिटनेस रूटीन या वर्कआउट इंटेंसिटी की बात आती है, तो ये पीरियड्स की तीव्रता और अवधि के अनुसार बदल सकता है। कई लोगों को मानना होता है कि पीरियड्स के दौरान वर्कआउट करना कई समस्याओं को बढ़ावा दे सकता है इसलिए इस दौरान वर्कआउट नहीं करना चाहिए। पीरियड्स के दौरान यदि कुछ चीजों का ध्यान रखा जाए तो वर्कआउट करना आसान और आरामदायक हो सकता है।
अपना वर्कआउट बदलें

पीरियड्स के दौरान यदि आप थका हुआ महसूस कर रहे हैं, तो बेहतर होगा कि आप एक दिन आराम कर लें। इसके अलावा कम एनर्जी वाले योगा या कुछ स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें। यदि आप इस दौरान एनर्जेटिक और सामान्य महसूस करती हैं तो आप एक फुल वर्कआउट सैशन भी कर सकती हैं। बॉडी की जरूरत और हिम्मत के अनुसार एक्सरसाइज में बदलाव किए जा सकते हैं। एक्सरसाइज के अलावा आप वॉक का भी सहारा ले सकती हैं।
नोसेबो प्रभाव को हावी न होने दें

ज्यादातर महिलाएं पीरियड्स शुरू होने पर एक्सरसाइज करना या कोई भी शारीरिक गतिविधि करना बंद कर देती हैं। भले ही उन्हें पीरियड के दौरान समस्या न हो। इस दौरान नोसेबो प्रभाव को पूरी तरह से नकारना चाहिए। हमें इस बात पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए कि हमारा शरीर क्या महसूस करता है। यदि आप टहलने, जॉगिंग आदि के लिए पर्याप्त एनर्जेटिक महसूस करते हैं तो इसे कर सकते हैं। अपने वर्कआउट को सिर्फ इसलिए न छोड़े क्योंकि आपके पीरियड्स के दिन आ गए हैं।
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अपने रूटीन पर बने रहें

पीरियड्स के दौरान जरूरी नहीं है कि आप हमेशा HIIT और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें। इस समय आप अपनी फिटनेस रूटीन और अनुशासन को बनाए रखने के लिए हल्की एक्टिविटीज जैसे- टहलना, जॉगिंग, योगा और प्राणायाम का चुनाव भी कर सकती हैं। योगा और स्ट्रेचिंग करने से पेट और पीठ के दर्द को भी कम करने में मदद मिलती है। इसलिए जहां तक हो सके महिलाओं को अपने रूटीन को मेंटेन करने का प्रयास करना चाहिए।
योगा करें

मेजर पीएमएस लक्षणों वाली महिलाएं योग, स्ट्रेचिंग, वॉक आदि जैसी हल्की एक्सरसाइज करके लाभ उठा सकती हैं। यह लक्षणों से राहत देने और ब्लड फ्लो को बढ़ावा देने में मदद करता है। पीरियड्स के दौरान महिलाओं को अपने शरीर की सुननी चाहिए और इस विशेष अवधि के दौरान अपने शरीर की जरूरतों के अनुसार अपने वर्कआउट रूटीन में बदलाव करना महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान अपने वर्कआउट रूटीन पर 100 प्रतिशत टिके रहना आवश्यक नहीं है लेकिन अपने शरीर की 100 प्रतिशत देखभाल करना आवश्यक है। इसलिए हल्के आसनों की प्रेक्टिस करें। योग करने से पीरियड क्रैम्प्स को कम करने में भी मदद मिलती है।
शरीर को फोर्स न करें

पीरियड हर महिला के लिए अलग-अलग अनुभव लेकर आता है। जरूरी नहीं कि आप अन्य महिलाओं की तरह एक्सरसाइज या वर्कआउट कर पाएं। पीएमएस के लक्षणों से निपटने के लिए पीरियड्स के दौरान शारीरिक गतिविधियां महत्वपूर्ण होती हैं लेकिन इसकी अधिकता आपको थका हुआ महसूस करा सकती है। उन महत्वपूर्ण दिनों में आपके शरीर को नुकसान पहुंच सकता है। यदि आपको लगता है कि अपने शरीर की जरूरतों और फिटनेस गोल के अनुसार अपना वर्कआउट रूटीन नहीं बना पा रहे हैं तो एक फिटनेस कोच आपको गाइड कर सकता है। नियमित ट्रेकिंग, लक्ष्य और एक्टिविटी के अनुसार योजनाओं में बदलाव करके, आप अपने फिटनेस रूटीन की हर चुनौती को पार कर सकते हैं।
