Periods and Weight Loss: ‘बस एक हफ्ता बाकी था… 2 किलो वज़न और कम करना था लेकिन तभी पीरियड्स आ गए।’ अगर आपने भी कभी ऐसा महसूस किया है, तो आप अकेली नहीं हैं। वज़न घटाने की कोशिशों में हर महिला को हर महीने एक छोटा-सा ब्रेक लेना ही पड़ता है जिसे हम ‘पीरियड्स‘ कहते हैं। लेकिन क्या इसका मतलब ये है कि आपकी मेहनत बेकार चली गई? बिलकुल नहीं।
दरअसल, ये वो समय होता है जब शरीर को थोड़ी और समझदारी, थोड़ा प्यार और थोड़ी राहत चाहिए होती है। चलिए जानते हैं कि उन दिनों में क्या खाएं, कैसे मूव करें और खुद को गिल्ट-फ्री रखते हुए भी फिटनेस रूटीन को कैसे बनाए रखें।
हार्मोनल तूफान दिखता है ज़्यादा, होता है कम
पीरियड्स से कुछ दिन पहले शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन्स तेजी से बदलते हैं। इसका असर दिखता है:
पेट फूला हुआ महसूस होता है
मीठा और नमकीन खाने की क्रेविंग बढ़ जाती है
मूड चिड़चिड़ा या डाउन हो सकता है
और स्केल पर अचानक 1-2 किलो ज़्यादा दिखाई देता है
लेकिन घबराने की ज़रूरत नहीं है ये फैट नहीं, बल्कि अस्थायी वॉटर वेट होता है जो पीरियड्स खत्म होते ही उतर जाता है। सबसे ज़रूरी बात पैनिक नहीं करना है।
क्या खाएं इन दिनों में स्वाद, संतुलन और सुकून
इस समय शरीर को चाहिए आराम, पोषण और थोड़ी एक्स्ट्रा केयर। कुछ सिंपल लेकिन असरदार टिप्स:
खुद को भूखा न रखें
अगर क्रेविंग हो तो थोड़ा डार्क चॉकलेट, खजूर या गुड़ ट्राय करें
हल्का और पचने वाला खाना
खिचड़ी, सूप, उबली सब्ज़ियां और दालें सबसे बेस्ट
मैग्नीशियम और आयरन से भरपूर चीज़ें जैसे पालक, बीज, ड्राय फ्रूट्स इससे थकान और मूड स्विंग्स में राहत मिलती है
पानी खूब पिएं
हाइड्रेशन ब्लोटिंग को कम करता है नींबू पानी, ग्रीन टी, नारियल पानी बेस्ट ऑप्शन हैं

वर्कआउट करें, लेकिन इस तरह…
पीरियड्स के दौरान फिट रहना ज़रूरी है, लेकिन उसी बॉडी के साथ जो थकी हुई है, दर्द में है और बदल रही है।
हल्की वॉक से मूड भी अच्छा होता है और ब्लोटिंग में भी राहत
स्ट्रेचिंग या सॉफ्ट योगा पोज़ से पेल्विक एरिया को आराम मिलता है
बहुत तीव्र या हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट्स से बचें अगर शरीर कहे “नहीं”, तो सुनिए
ध्यान रखिए, रेस्ट भी हेल्थ का एक हिस्सा है।
खुद से दोस्ती यही असली सेल्फ केयर है

आपकी बॉडी हर महीने एक चक्र से गुज़रती है। हर फेज़ में उसकी ज़रूरतें बदलती हैं और हर फेज़ में उसे सपोर्ट करना, समझना और प्यार देना वज़न घटाने से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है। वज़न घटाना कोई रेस नहीं, बल्कि एक जर्नी है जिसमें छोटे-छोटे ब्रेक भी होते हैं। अगली बार जब पीरियड्स आएं, तो खुद को थामिए, समझिए और थोड़ा एक्स्ट्रा प्यार दीजिए एक हेल्दी थाली, कुछ स्ट्रेच, और ढेर सारी मेहरबानी के साथ। क्योंकि वज़न घटाने की सबसे ताक़तवर शुरुआत वहीं से होती है जहां आप अपनी बॉडी से जंग नहीं, दोस्ती करना शुरू करते हैं।
