Care Premature Baby: प्री मैच्योर बेबी वे बच्चे होते हैं जो 38-40 सप्ताह के गेस्टेशन के पूरा होने से पहले ही पैदा हो जाते हैं। समय से पहले पैदा होने वाले बच्चों के ऑर्गन पूरी तरह से डेवलप नहीं हो पाते या फिर वह कमजोर होते हैं। इससे बच्चे को पालने में काफी जटिलताएं हो सकती हैं। प्री-मैच्योर बेबी के फेफड़े विकसित नहीं होते हैं और जन्म के समय उनका वजन भी अन्य बच्चों की अपेक्षा कम होता है। कुछ मामलों में बच्चे की स्थिति के आधार पर न्योनेटल इनटेंसिव केयर यूनिट में हफ्तों और यहां तक कि महीनों तक इलाज कराने की आवश्यकता पड़ जाती है। इन बच्चों का इम्यून सिस्टम काफी कमजोर होता है, जिस वजह से उन्हें बार-बार खांसी, निमोनिया और कोलिक जैसे इंफेक्शन होने का खतरा अधिक होता है। पेरेंट्स के लिए ऐसे बच्चों की देखभाल करना काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। चलिए जानते हैं प्री-मैच्योर बेबी के घर आने के बाद उसकी देखभाल कैसे कर सकते हैं।
कंगारू मदर केयर

कंगारू मदर केयर एक स्किन टू स्किन तकनीक है, जो आमतौर पर समय से पहले कम वजन वाले बच्चे के लिए उपयोग की जाती है। इस तकनीक में बच्चे को मां के चेस्ट पर लिटा दिया जाता है। इससे बच्चे की बॉडी गर्म रहती है और उसकी सांस में भी सुधार होता है। ये तकनीक न केवल बच्चों के लिए बल्कि मां के लिए भी मददगार है क्योंकि इससे बेस्ट मिल्क में वृद्धि होती है। मां का दूध पोषक तत्वों और एंटीबॉडी से भरा होता है जो बच्चे के स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।
ऐसे नहलाएं

प्री-मैच्योर बेबी काफी कमजोर होते हैं, इसलिए उसके शरीर के तापमान को बनाए रखने की जरूरत होती है और उसे गर्म व आरामदायक रखने की आवश्यकता होती है। आपको अपने बच्चे को रोजाना नहलाने की जरूरत नहीं है। आप उसके कंबल और अन्य कपड़े रोज बदल सकते हैं। इसके अलावा आप बच्चे को स्पंज बाथ भी दे सकते हैं।
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सोने पर दें ध्यान

बच्चे का बिस्तर बहुत ही मुलायम और आरामदायक होना चाहिए। कमरे की रोशनी कम रखनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर मच्छरदानी का इस्तेमाल करना चाहिए। बच्चा रात में पूरी नींद ले इसके लिए उसके लिए उन्हें रात के समय डायपर भी पहना सकते हैं। डायपर की वजह से बच्चा गीला होने से बचेगा और बिना डिस्टर्ब हुए देर तक सोएगा।
डकार जरूर दिलाएं

आपने कई बार ध्यान दिया होगा कि बच्चे अक्सर दूध पीने के बाद उल्टी कर देते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब बच्चा दूध पीता है तो दूध के साथ हवा भी उसके पेट में चली जाती है। जिस वजह से बच्चे के पेट में गैस फॉम हो जाती है और गैस न निकल पाने के कारण बच्चा दूध बाहर निकाल देता है। इसलिए बच्चे को दूध पिलाने के बाद उसकी छाती को सहलाएं और उसे कंधे पर टिकाकर ठीक से डकार दिलाएं। डकार निकल जाने से बच्चा रिलेक्स महसूसू करेगा।
कॉस्मेटिक से रखें दूर

कई माएं अपने बच्चे की आंख में काजल लगाती हैं। प्री-मैच्योर बेबी में आंखों का इंफेक्शन और आंखों की गंभीर बीमारियां होने का खतरा अधिक होता है। इसलिए उसे कभी भी काजल न लगाएं। इसके अलावा बच्चे के आसपास परफ्यूम, पाउडर का इस्तेमाल न करें क्योंकि इससे बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। ध्यान रखें कि बच्चे के पास कभी भी स्कोकिंग न करें। स्मोक से बच्चे के लंग्स पर प्रभाव पड़ सकता है।
मेहमानों के संपर्क से रखें दूर

अनजाने में ही सही लेकिन बाहर से आने वाले मेहमान अपने साथ इंफेक्शन ला सकते हैं। इसलिए, मेहमानों से अपने बच्चे को दूर रखें। यदि वह जोर देते हैं, तो उन्हें बच्चे को छूने से पहले हाथ धोने के लिए कहें। इसके अलावा बच्चे की हाइजीन का भी ध्यान रखें।
