mahakumbh 2025 sangam ghat
mahakumbh 2025 sangam ghat

Overview:

क्या वाकई महाकुंभ में जाने वाले सभी लोग संगम में डुबकी लगा रहे हैं। कहीं अनजाने में और जल्दबाजी में आप सिर्फ यमुना या गंगा में ही तो डुबकी नहीं लगा रहे हैं।

mahakumbh 2025 sangam ghat : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ 2025 का महा आयोजन हो रहा है। सिर्फ भारत से ही नहीं दुनियाभर से तीर्थयात्री, साधु-संत और सन्यासी कुंभ का हिस्सा बनने आ रहे हैं। माना जा रहा है कि सदी के इस सबसे बड़े धार्मिक आयोजन में 40 करोड़ लोग गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में अमृत स्नान करेंगे। माना जाता है कि अमृत स्नान करने मात्र से ही आपको पुण्य की प्राप्ति होगी और मोक्ष प्राप्त होगा। लेकिन क्या वाकई महाकुंभ में जाने वाले सभी लोग संगम में डुबकी लगा रहे हैं। कहीं अनजाने में और जल्दबाजी में आप सिर्फ यमुना या गंगा में ही तो डुबकी नहीं लगा रहे हैं। जी हां, अगर आप भी प्रयागराज के घाटों के बारे में अच्छे से नहीं जानते हैं तो आप भी यह भूल कर सकते हैं। ऐसे में सही घाटों पर जाकर स्नान करना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं प्रयागराज में कौनसे घाट यमुना नदी के हैं और कौनसे गंगा नदी के हैं।

ये हैं यमुना नदी के घाट

प्रयागराज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां तीन पवित्र नदियों गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम है।
Prayagraj is important because it is the confluence of three holy rivers Ganga, Yamuna and the invisible Saraswati.

दरअसल, प्रयागराज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां तीन पवित्र नदियों गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम है। इन तीनों नदियों के मेल में स्नान करने से पुण्य प्राप्त होता है। लेकिन प्रयागराज के कुछ घाट ऐसे हैं, जहां सिर्फ यमुना नदी के घाट हैं और कुछ जगह सिर्फ गंगा नदी के घाट हैं। जैसे काली घाट, सरस्वती घाट, किला घाट और अरैल घाट प्रमुख घाटों में गिने जाते हैं। लेकिन ये सभी यमुना नदी के घाट हैं। अगर आप इन घाटों पर स्नान करते हैं तो आप ‘संगम स्नान’ नहीं बल्कि सिर्फ ‘यमुना स्नान’ कर रहे हैं। इसलिए महाकुंभ के दौरान इन घाटों पर स्नान न करें। हालांकि अरैल घाट से आप संगम तक जाने के लिए नाव जरूर ले सकते हैं। संगम तक पहुंचने का यह आसान तरीका है।

इस घाट पर करना चाहिए शाही स्नान

जिस तरह प्रयागराज के ​कुछ घाटों पर यमुना प्रवाहित होती है। ठीक वैसे ही कुछ घाटों पर सिर्फ पवित्र गंगा नदी प्रवाहित होती है। इन घाटों पर स्नान करना अच्छा है, लेकिन यह भी संगम स्नान की श्रेणी में नहीं आता है। छतनाग और दशाश्वमेध घाट गंगा नदी के प्रमुख घाट हैं। ये काफी दूर भी हैं। अगर आप भी महाकुंभ में शाही स्नान करने जा रहे हैं तो आपको संगम घाट पर जाना चाहिए। यहीं पर तीनों पवित्र नदियों का संगम होता है।

इन तारीखों पर होगा अमृत स्नान

महाकुंभ 2025 की शुरुआत पौष पूर्णिमा के दिन 13 जनवरी को हुई थी, जो महाशिवरात्रि पर 26 फरवरी 2025 तक चलेगा। पहला शाही स्नान 14 जनवरी मकर संक्रांति को हुआ था। वहीं दूसरा अमृत स्नान 29 जनवरी, 2025 को होगा। तीसरा शाही स्नान 3 फरवरी को होगा। इसके बाद 12 फरवरी और आखिरी शाही स्नान 26 फरवरी, 2025 को होगा। इन तारीखों पर अमृत स्नान करने को बहुत ही फलदायी माना जाता है। कहते हैं जो लोग महाकुंभ में अमृत स्नान करते हैं, उन्हें मोक्ष प्राप्त होता है।

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...