शिप्रा के पास उसके सात वर्षीय बेटे नमन के स्कूल से फोन आया। वह फोन पर बात करके तुरंत नमन के कमरे में पहुंची और उसको लताड़ते हुए बोली ,”आज स्कूल में तुम्हारे साथ इतनी बड़ी बात हो गई और तुमने बताना भी ज़रूरी नहीं समझा!
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अहल्या यह भी तो – गृहलक्ष्मी कहानियां
स्त्री की देह पाने को आतुर रहा पुरुष सदियों से उसकी देह तक आकर ही ठिठक जाता है। स्त्री के मन के तल तक जाने की सामर्थ्य न कभी पुरुष में रही, न उसने इसकी आवश्यकता ही समझी। ऐसी ही एक भावभीनी कहानी।
प्रेम परीक्षा – गृहलक्ष्मी कहानियां
देखो राघव ! मैं आज भी वही हूँ, जैसी तुम छोड़कर गए थे।तुमने तो पलटकर भी नहीं देखा कभी मैं किस हाल में हूँ पर मैंने तो प्यार किया था तुमसे जो फिर किसी और इन्सान से नहीं हुआ । अपने लक्ष्य से प्यार कर लिया मैंने और अब मैं फॉरेस्ट ऑफिसर स्नेहा शुक्ला हूँ ।
अडिग फैसला – गृहलक्ष्मी कहानियां
सुजाता रसोई में काम करते हुए लगातार बड़बड़ाये जा रही थी।”जीजी का तो अधेड़ावस्था में दिमाग खराब हो गया है ,भला लोग क्या कहेंगे।इस उम्र में शादी करने की बात कर रही हैं जब भतीजे – भतीजी शादी के लायक हो गए हैं। अब उम्र भी कितनी बची है जो अपना अलग संसार बसाने की सोच रही हैं। सारी उम्र तो यहां रहीं और अब अपनी सारी दौलत लुटाने को हमसफर ढूंढ रही हैं।”
अगर हरिवंशराय बच्चन जी ‘मधुशाला’ आज लिखते, तो ये चार छंद उसमें अवश्य होते
मदिरालय के द्वार पड़ा है आज कोरोना का ताला। रो धो जैसे तैसे सबने सवा माह का दिन टाला।। जाने किसने पाप किये जिसका मदिरा को दंड मिला, तरस रहे हैं पीने वाले, सिसक रही है मधुशाला॥ दो हफ्ते का लॉक पीरियड फिर से आगे कर डाला। भूल गए सब किसने किसके साथ कहां और […]
मालिक- गृहलक्ष्मी कहानियां
रामगढ़ राजा शिवदत्त सिंह चौहान की रियासत थी। आजादी के बाद रियासतें तो चली गईं। राजा सिर्फ नाम को रह गए थे। राजा शिवदत्त के कोई बेटा ना होने के कारण उनकी इकलौती बेटी सारे जायदाद की वारिस बनी। वे हमीरपुर के राजघराने में ब्याही थी।
वो आ गई, उनकी याद…
बात उन दिनों की है जब मेरी नई-नई शादी हुई थी। मेरे पति बैंक से रोज देर से घर आते थे। मैं अकेले घर में बोर हो जाती थी। मैं हमेशा उनका इंतजार ही करती थी, कब वे आएं।
फिर शादी का दिखावा हो दिखावे की शादी हो – गृहलक्ष्मी कहानियां
शादियों से कमाने खाने वालों को भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए कि ये ‘केवल पचास’ वाला प्रतिबंध अब जल्दी समाप्त हो और शादियों की रौनक फिर से लौटे। फिर गार्डन सजे। फिर बैंड बाजे बजे।
लिली – गृहलक्ष्मी कहानियां
दोस्ती से शुरू हुआ अमित और लिली का यह रिश्ता प्यार में बदल गया। प्यार की गहराई में डूबते अमित के दिलो-दिमाग पर लिली इस कदर छाई थी कि उसने अपना सब कुछ लिली के नाम कर दिया, इस बात से अंजान कि लिली के दिलो-दिमाग में क्या चल रहा है और फिर अमित का उस हकीकत से सामना हुआ, जो उसकी कल्पनाओं से भी परे था।
मजाकिया मनोज – गृहलक्ष्मी लघुकथा
बाप के जाने के कुछ ही दिनों बाद मनोज को अकेला छोड़ कर मां भी स्वर्ग सिधार गई थी। पूरे गांव को उसकी इस अचानक हुई मौत का पता नहीं चला। मनोज अकेला पड़ गया था, इस बात का सभी को दुख था। 15 साल का लड़का अकेला कैसे जीवित रहेगा। अकेला पड़ गया यह लड़का अंदर से टूट जाएगा। हर किसी के मन में अलग-अलग विचार घूम रहे थे। पर ऐसा कुछ हुआ नहीं।
