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गृहलक्ष्मी की कहानियां – मैं साइड में कैसे पहुंच जाता हूं

गृहलक्ष्मी की कहानियां – बात कुछ महीने पहले की है, जब हमारे घर सास-ससुर और ननद रहने के लिए आए हुए थे। मेरा 4 साल का बेटा है, जो अपने दादा-दादी जी का काफी लाडला है। उनके आने पर पूरा दिन वो उन्हीं के साथ खेलता रहा। रात में सब लोगों के खाना खा लेने के बाद मैं […]

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झाड़ू से निकाल लेंगे

मेरा तीन वर्षीय बेटा शानू बहुत बातूनी है। उसे पुरानी बातें बहुत ध्यान रहती हैं। एक दिन रात को मेरे पति कमरे से बाहर गए तो शानू ने पूछा, ‘मम्मी, पापा कहां हैं? मैंने हंसी में जवाब दिया, ‘पापा, पलंग के नीचे गिर गए। वह तपाक से बोला, ‘कोई बात नहीं, सुबह मोहन भैया (हमारा […]

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गोलगप्पे के पानी में जूता

बात मेरे बचपन की है, जब मैं लगभग 5 साल की थी। मुझे बात-बात पर गुस्सा करने की बुरी आदत थी। एक रोज मेरे पापा ऑफिस से घर आए। व्यस्तता की वजह से या अन्य किसी कारण से वे मेरी मनपसंद चॉकलेट नहीं ला पाए। बस फिर क्या था! मैंने गुस्से में पैर पटकते हुए […]

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अचार के मर्तबान – गृहलक्ष्मी कहानियां

सड़क के दोनों ओर लगे आम के पेड़ देख मेरा मन गाड़ी की रफ्तार से भी तेज दौड़ने लगा। एकाएक बचपन की यादों में पहुंच गई… कहीं से मां की आवाज भी सुनाई देने लगी। जून का महीना आते-आते जरा भी आंधी-तूफान आ जाए तो उसे देख खिड़की दरवाजे बन्द करती जातीं और तेज-तेज आवाज में बोलना शुरू हो जाता, हाय..! कैसा तेज आंधी-तूफान आने वाला है। हवा के चलते मुए सारे आम तो गिरने लगेंगे। सारी डाल बिना आम के खाली होने लगेगी।

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मां तो बस मां ही होती है – गृहलक्ष्मी कहानियां

निहाल के आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे। उसकी दो साल की बेटी नेहा उसकी गोद में बैठी टुकुर टुकुर उसकी और देख रही थी। पास ही कुसुम निर्जीव सी फर्श पर जड़ पड़ी थी, न कुछ बोल रही थी और न ही उठ रही थी। थोड़ी देर पहले तक सब ठीक था।

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आंख-मिचौली

बात तब की है जब मैं दस साल की थी। हम सब बच्चे आंख-मिचौली खेल रहे थे। सब अपनी-अपनी जगह छुप गए। मैं भी छुपने के लिए बगीचे के एक पेड़ पर चढ़ गई, लेकिन नीचे देखकर मैं डर गई और पेड़ पर ही बेहोश हो गई। धीरे-धीरे सब बच्चे मिल गए लेकिन मैं नहीं मिली। काफी देर […]

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दूध में पानी या पानी में दूध

बात 35 साल पुरानी है। जब मेरी शादी हुई थी। मैं रसोई में काम करने गई। सास भी आ गई। वह बोली, बेटी जब भी दूध उबालो तो बर्तन में थोड़ा पानी डाल दिया करो। उन्होंने थोड़ा सा पानी डाला और कहा कि पानी डालने से गाय के थन नहीं जलते हैं। कुछ दिनों बाद […]

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एक कप चाय – गृहलक्ष्मी कहानियां

अनिमेष ऑफिस से आते ही कहने लगे परसों दिल्ली जाना होगा, मीटिंग है चाहो तो तुम भी साथ चलो सबसे मिलना हो जायेगा। सबसे मिलने का मोह मैं भी ना छोड़ सकी, हां कहकर जाने की तैयारी में जुट गई। सुबह कब बीत जाती है पता नहीं लगता सबसे मिल-मिलाकर बातें करने में मालूम ही नहीं चला, कब दो बज गए। मन हुआ घर का एक चक्कर लगाकर पुरानी यादें ताजी कर लूं।

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चादर की सिलवटें

भतीजी की शादी थी। हम सब लोग शादी में गए हुए थे। मेरे दूसरे नंबर वाले जीजाजी बहुत ही बातूनी हैं। भाभी शादी के काम में व्यस्त थी। मैंने दीदी से कहा कि भाभी दूसरा काम कर रही हैं। अत: आप नाश्ता बना लें, मैं कमरा साफ कर लेती हूं। दीदी ने कहा, ‘ठीक है। […]

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च्विंगम से तौबा कर ली

  यह घटना कई वर्ष पहले की है। एक दिन हम कई फ्रेंड्स मिल कर खेल रहे थे और एक-दूसरे की लाई हुई चीजें शेयर कर खा रहे थे। किसी बात पर मेरी और उनमें से एक लड़की की लड़ाई हो गई। वह बार-बार च्विंगम मेरे कपड़ों पर लगाकर मुझे परेशान कर रही थी। मेरे कपड़ों पर कई […]

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