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गृहलक्ष्मी की कहानियां - मैं साइड में कैसे पहुंच जाता हूं
Grihalakshmi KI Stories

गृहलक्ष्मी की कहानियां – बात कुछ महीने पहले की है, जब हमारे घर सास-ससुर और ननद रहने के लिए आए हुए थे। मेरा 4 साल का बेटा है, जो अपने दादा-दादी जी का काफी लाडला है। उनके आने पर पूरा दिन वो उन्हीं के साथ खेलता रहा। रात में सब लोगों के खाना खा लेने के बाद मैं किचन में साफ-सफाई कर रही थी, तभी ससुर जी मेरे बेटे से बोले कि चलो बिट्टू आज तुम हमारे साथ सोने चलो, रोज तो मम्मी-पापा के साथ ही सोते हो। तभी मेरा शरारती बेटा झट से बोला कि नहीं, मैं तो रोज रात को मम्मी-पापा के बीच में सोता हूं, लेकिन पता नहीं सुबह कैसे मैं दोनों के बीच में से किनारे पहुंच जाता हूं। मेरे बेटे की यह बात सुनकर कमरे में बैठे सभी लोग हंसने लगे, लेकिन मेरा बुरा हाल हो गया। मेरी ननद मुझे आकर छेडऩे लगी कि भाभी, बिट्टू आप दोनों के बीच में से किनारे कैसे पहुंच जाता है। यह सुनकर मैं शर्म से लाल होती जा रही थी।

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