संध्या की मौत को आज पंद्रह दिन बीत चुके थे। रायसाहब के कहने पर भी आनन्द ने उनके यहाँ रहना उचित न समझा और क्रिया-कर्म के पश्चात् वह संध्या के मकान में लौट आया। बेला भी बच्चे को लेकर वहीं चली आई। हर ओर शोक छाया हुआ था। जहाँ उसे बच्चे की खुशी के दिन […]
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नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-36
एकाएक हवा का पक्षी एक कड़ाके के साथ रुक गया और लड़खड़ाता हुआ नीचे गिर पड़ा। आनन्द की चीख निकल गई और वह ऑपरेशन-रूम की ओर भागा। किवाड़ खुला। आनन्द उखड़े हुए स्वर में साँस ले रहा था। डॉक्टर ने उसकी घबराहट देखते हुए कहा-‘मिस्टर आनन्द, बधाई हो! लड़का हुआ है।’ नीलकंठ नॉवेल भाग एक […]
नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-35
आनन्द फरामजी नर्सिंग होम की बालकनी में खड़ा रात के फैलते हुए अंधकार को देख रहा था। यों तो नर्सिंग होम में चारों ओर बिजली के लट्टू जगमगा रहे थे, किंतु आनन्द की दृष्टि रात की कालिमा को चीर रही थी। आज की रात उसके लिए जीवन या मरण की रात थी। आज बेला का […]
नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-34
गुसलखाने का किवाड़ बंद हुआ और बेला के विचारों की डोर कट गई। उसने दृष्टि घुमाकर उधर देखा। संध्या नहाने चली गई थी। सहसा एक विचार ने अचानक उसके मस्तिक पर हथौड़े मारने आरंभ कर दिए, चोटों की गति बढ़ती गई और वह बेचैन होकर तड़पने लगी। नीलकंठ नॉवेल भाग एक से बढ़ने के लिए […]
नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-33
आकाश और अंधकार वियोग के आँसू बहा रहे थे। पौ फटने में चंद ही क्षण शेष थे। ठंडी हवा खिड़की के पर्दों से खेलती हुई कमरे में प्रवेश कर रही थी। बेला को जागे हुए समय हो गया था। दिन-रात लेटे रहना, भूख का अभाव तो नींद क्या करे-वह कब से उजाले और अंधेरे का […]
नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-32
बेला ने गाड़ी की गति तेज कर दी। सड़क पर वर्षा होने से फिसलने का संदेह होते हुए भी वह हवा की-सी तेजी से बढ़ी जा रही थी, वह आज आनन्द से जीवन का निर्णय करके छोड़ेगी, वह कभी यह सहन न कर सकती थी कि उसकी आँखों के सामने उसी की छाती पर मूंग […]
नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-31
टेलीफोन नीचे रखते हुए संध्या सोफे पर बैठ गई और आनन्द के चिंतित मुख को देखने लगी। आनन्द ने उसे बीनापुर की बात सुनाई थी। वह बहुत परेशान था। उसे आनन्द का बर्ताव अच्छा न लगा था और वह उसे भला-बुरा कह रही थी। टेलीफोन सुनते ही वह खिल उठी- नीलकंठ नॉवेल भाग एक से […]
नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-30
इस समय उसके मस्तिष्क में हुमायूं के वे शब्द घूमने लगे, जो उसने सांत्वना देते हुए कहे थे-‘नफरत की इंतहा में मुहब्बत की सीढ़ी है और तुम औरत हो, हसीन औरत, तूफानों से उलझना तुमने खूब सीखा है।’ आज जीवन के एक और तूफान से वह उलझ रही थी। वह मन-ही-मन अपनी इस सफलता पर […]
नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-29
साँझ की ठंडी हवा अठखेलियाँ कर रही थी। आनन्द कारखाने के काम से निबटारा पाकर उस घाटी की ओर बढ़ता जा रहा था, जिसका कण-कण उसका जाना-पहचाना था। वह झील के किनारे पहुँचा, जो कभी उसके मन की गहराइयों में अपना प्रतिबिम्ब डालती थी। वह नीला जल और उसके किनारे खड़ा छोटा-सा बंगला-चुपचाप और सुनसान-सा, […]
नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-28
हुमायूं ने स्नेह से थपकाते हुए उसे सोफे पर बिठा दिया और उसके आँसू पोंछते हुए बोला-‘संसार में मन को लगी कुछ ऐसी ही ठोकरों में जीवन का आनंद छिपा है।’ वह चुप रही और सिसकियाँ भरते हुए इस नई समस्या को सुलझाने का उपाय सोचने लगी। हुमायूं ने उसके विचारों का तांता तोड़ना उचित […]
