चिड़ियों के चहचहाने के साथ ही बेला की आँख खुल गई। उसने अपनी कोमल उंगलियों से पलकों को मसला-वातावरण में हर ओर सुगंध फैल रही थी-उसने एक लंबी साँस लेते हुए कमरे की छत की ओर देखा-कबूतरों का एक जोड़ा ऊपर बैठा गुटर-गूँ कर रहा था। नीलकंठ नॉवेल भाग एक से बढ़ने के लिए इस […]
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नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-16
रायसाहब के घर आज ब्याह की तैयारियाँ हो रही थीं। बारात आने में तीन घंटे बाकी थे। रायसाहब बाहर लॉन में शामियाने लगवा रहे थे। उन्हें संध्या की प्रतीक्षा थी-भीतर से हर आने वाले व्यक्ति से वह थोड़े समय पश्चात् उसके विषय में पूछ लेते-बार-बार उनकी दृष्टि बाहर फाटक पर जाती। क्या उसका मन इतना […]
नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-15
आनंद का नाम संध्या की जुबान से सुनते ही बेला को मानो किसी ने मनों बर्फ में रख दिया हो। क्षण-भर के लिए वह किसी सोच में खो गई और फिर माथे पर बल लाकर बोली- ‘अच्छे हैं-तुम्हें पूछते थे।’ ‘क्या?’ उसने उत्साहपूर्वक पूछा। ‘यही कि गंदी गलियों से लौटी नहीं अभी?’ नीलकंठ नॉवेल भाग […]
नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-14
आकाश पर आज कुछ अधिक लालिमा थी-रात भर की जलती हुई बत्तियाँ धीरे-धीरे बुझ रही थीं। बम्बई की सुनसान सड़कों पर लोगों की चहल-पहल आरंभ हो रही थी। समुद्र के जल से उठी सलोनी धुंध ऊँची-ऊँची इमारतों पर हल्की-सी लकीर बनाए जा रही थी। आज वह बहुत दिनों बाद रायसाहब के घर की ओर जा […]
नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-13
ज्यों-ज्यों रात का अंधेरा बढ़ता गया, बाजार की रौनक कम होती गई। लोग दिन की थकावट दूर करने को अपने-अपने बसेरों से जा मिले। बस्ती पर मौन छाने लगा। इस मौन को तोड़ती हुई एक टैक्सी सराय रहमत उल्लाह के द्वार पर रुकी। संध्या टैक्सी का भाड़ा चुकाकर कल्पना में बढ़ती हुई सराय में जा […]
नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-12
सवेरा होते ही वह सीधा रायसाहब के यहाँ पहुँचा। आज वह अपना निर्णय कर ही देना चाहता था। वहाँ रायसाहब और मालकिन चिंता में खोए गोल कमरे में बैठे थे। संध्या बालकनी की सीढ़ियों पर सिर झुकाए बैठी थी। कुछ देर तक तीनों में से किसी ने आनंद को न देखा। हर ओर चुप्पी-सी थी। […]
नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-11
शाम के छह बजने को थे। बेला शाम की मेज पर अकेली बैठी उन प्यालों को देख रही थी, जो रायसाहब और मालकिन के लिए सजाए गए थे, परंतु आज उन्होंने चाय न पी थी। वर्षों से शाम की चाय संध्या के हाथों से पिया करते थे। आज उसकी अनुपस्थिति में चाय न पी सकें। […]
नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-1
असावधानी से पर्दा उठाकर ज्यों ही आनंद ने कमरे में प्रवेश किया, वह सहसा रुक गया। सामने सोफे पर हरी साड़ी में सुसज्जित एक लड़की बैठी कोई पत्रिका देखने में तल्लीन थी। आनंद को देखते ही वह चौंककर उठ खड़ी हुई। ‘आप!’ सकुचाते स्वर में उसने पूछा। ‘जी, मैं-रायसाहब घर पर हैं क्या?’ ‘जी नहीं, […]
