आज सवेरे से ही बारिश का जोर था। वातावरण धुंध में लिपटा हुआ था। इसी कारण सपेरन की शूटिंग रोक दी गई थी। स्टूडियो के दफ्तर में हुमायूं बैठा खिड़की के बाहर बरसात का दृश्य देख रहा था। चारों ओर जल-ही-जल था। कभी-कभी उसकी दृष्टि वहाँ से हटकर सामने सोफे पर बैठी बेला पर जा […]
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नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-26
दिन की सुनहरी धूप को आज बादलों ने ढक रखा था। बादलों के जमघट बढ़कर धुंध के रूप में जमीन पर उतर आए थे। हवा में नमी होने से हर वस्तु भीग रही थी। आनंद भी चारपाई पर लेटा सामने की खिड़की से बाहर फैली इस धुंध को आश्चर्य से देखे जा रहा था, जिसके […]
नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-25
‘लो मिस्टर हुमायूं… इसे यह दे दो, आज के दिन किसी को ‘न’ नहीं करनी चाहिए।’ बेला ने एक रुपया हुमायूं को देते हुए कहा। ‘भीख ही देनी है तो अपने हाथों…।’ नीलकंठ नॉवेल भाग एक से बढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- भाग-1 बेला यह सुनकर मुस्करा पड़ी और वही रुपया उसने स्वयं […]
नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-24
यह बेला का पांचवां पत्र था, जो सवेरे की डाक से आनंद को मिला। आनंद ने ध्यानपूर्वक लिफाफे को उलट-पलटकर देखा और यों ही मेज पर रख दिया। आज का लिफाफा फिल्म-कंपनी का ही लिफाफा था, जिस पर बेला की तस्वीर थी। मुस्कराती हुई, एक सुंदर लहंगा पहने वह बैलगाड़ी का सहारा लिए खड़ी थी। […]
नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-23
आनंद की अनुपस्थिति में जो कुछ हुआ, उस पर उसे विश्वास नहीं हो रहा था। वह घंटों उस झील के किनारे खड़ा उसकी नीली गहराईयां देखता रहा-शायद मोहन किसी लहर की उछाल में ऊपर आ जाए। उसे झील में ले जाने की उत्तरदायी उसकी अपनी बीवी थी। इसलिए उसकी व्यग्रता और बढ़ती जा रही थी। […]
नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-22
‘और जब वह जान जाएगी तो प्रसन्नता से फूली न समाएगी।’ बेला ने मन-ही-मन यह बात सोची, पर मुँह तक न ला सकी और तेजी से चाय बनाने लगी। हुमायूं के चले जाने पर बेला बोली-‘मैं भी संग चलूँगी।’ नीलकंठ नॉवेल भाग एक से बढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- भाग-1 ‘कहाँ?’ ‘बंबई। पापा […]
नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-21
आज खंडाला में आए आनंद को एक महीना होने को आया था। अस्पताल से उसके बाबा सीधे दोनों को खंडाला ले आए थे। पट्टियाँ खुलने पर टांग का टूटा हुआ जोड़ तो ठीक हो गया, पर टांग बहुत कमजोर हो जाने से इस योग्य न हो सकी कि वह चल-फिर सके। नीलकंठ नॉवेल भाग एक […]
नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-20
आज वह नई गाड़ी में बैठकर ऐसा अनुभव कर रही थी मानो कोई महारानी अपने महाराज के साथ प्रजा को दर्शन देने निकली हो। जहाँ आनंद का मन नियम को तोड़कर अप्रसन्न था, वहाँ बेला का मन हर्ष से फूला न समाता था कि आज आनंद ने उसके लिए अपना जीवन मार्ग बदल डाला। नीलकंठ […]
नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-19
जीवन के सुंदर क्षण यों बीतने लगे जैसे धरती की चाल के साथ ऋतुएं-आनंद और बेला का जीवन भी एक नए दौर में भागा जा रहा है। वह अपने छोटे-से घर में सब रंगीनियां भरने का दिन-रात प्रयत्न करती, जिससे आनंद को उसके निकट कोई अभाव अनुभव न होने पाए-वह भूल से कभी ऐसा न […]
नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-18
खाने पर फिल्मी जगत के और व्यक्ति भी सम्मिलित थे। बेला का सौंदर्य, उसकी चंचलता और उसकी बातें सबको प्रभावित कर रही थीं। बातों-ही-बातों में बेला ने बताया कि उसे कॉलेज के दिनों में ड्रामा खेलने का बहुत चाव था। उसकी बातों पर सबसे अधिक सेठ मखनलाल मोहित हुए, जो कंपनी के मालिक थे। सेठजी […]
