तब मैं सरस्वती शिशु मंदिर में 5 वीं कक्षा का विद्यार्थी था। हर रोज की तरह मैं स्कूल के लिए तैयार हुआ। उस वक्त आसमान बादल से घिर गया था और हम सब बच्चे स्कूल के छुट्टी और बारिश में भीगने का इंतजार कर रहे थे। छुट्टी हो गई तो एक दोस्त के साथ साइकिल लेकर बारिश में […]
Tag: jab me chota bachcha tha
स्पेशल गिफ्ट पापा को क्यों
बात तब की है, जब मेरी बिटिया 3 साल की थी। एक दिन मैंने उसकी किसी बात पर खुश होकर उसे शाबाशी दी। ‘तुम दुनिया की सबसे प्यारी बेटी हो, इसलिए तुम्हें मेरी तरफ से यह स्पेशल गिफ्ट। यह कहते हुए मैंने उसे गले से लगाया और हल्का सा चुंबन उसके गाल पर ले […]
एस्टीम कैसे चलाऊंगा?
मेरा 6 वर्षीय बेटा शिवम बहुत नटखट है। एक बार उसे जुकाम हो गया था तो मैं उसे डॉक्टर के पास दिखाने ले गई। डाक्टर ने दवा देते हुए कहा कि आप अपने बेटे को स्टीम (भाप) दीजिए, उससे यह जल्दी ठीक हो जाएगा। इस पर शिवम तपाक से बोला, ‘अंकल, अभी तो मैं बहुत छोटा हूं, अभी से एस्टीम […]
सूरज का ट्रिप
मुझे याद है जब मैं स्कूल जाती थी। घर के हालात ठीक-ठाक थे, परंतु आसपास के दोस्त व सहेलियां अमीर घरों के थे। हम छुट्टियों में शिमला घूमने जाते और वो स्विटजरलैंड। एक बार तीसरी क्लास में टीचर ने पढ़ाया कि पृथ्वी सूरज का चक्कर लगाती है। यह बात मेरे दिमाग में बैठ गई। छुट्टियां हुई सब बताने […]
दादा जी के मुंह में चैरी डाली
मेरे दादा और चाचू (दादाजी के भाई) पटना में रहते थे। जब कभी भी वो दिल्ली आते तो हमारे घर महीना भर तो रहते ही थे। वह टोका-टाकी बहुत करते थे। मेरे दादा जी ने मेरी मां को कभी सिर ढकने को नहीं कहा था लेकिन चाचाजी तो छोटा सा घूंघट निकालने के लिए मजबूर करते। हमारे खाने को […]
खुजली वाला डांस
बात तब की है जब मैं 12 वर्ष की थी। मेरी छोटी बहन 10 वर्ष की थी। हम गर्मी की छुट्टियां बिताने ननिहाल गए। वहां मेरे मामाजी का जड़ीबूटियों व औषधियों का व्यापार था। हमारे घर में ही एक गोदाम था, जहां पर जाने से मामाजी ने मना किया था। वहां हम उम्र बच्चे थे। एक दिन हम सभी […]
दादी की मिली सीख
तब मैं चौथी कक्षा में पढ़ती थी। गरमी की छुट्टियों में मेरी कॉलोनी की सहेलियां मेरे घर खेलने आया करती थी। मेरी दादी मां छुट्टियों में चावल और उड़द के पापड़ बना छत पर सुखाती थी। एक दिन मम्मी ऑफिस गई हुई थी। दादी मां ने चावल के पापड़ बनाए थे। मेरी सहेली सुप्रिया बोली, ‘मुझे चावल के पापड़ […]
तेरे हाथ का पानी मीठा
घटना तब की है जब मेरी आयु लगभग 9-10 वर्ष की रही होगी। मेरे मामाजी छुट्टियों में आए हुए थे। वे हमेशा मेरे हाथ से ही पानी मंगवा कर पीते थे। पानी मांगते वक्त मुझे बहलाने के लिए वे कहते थे, ‘सोनिका तेरे हाथ का पानी मीठा लगता है, तू ही मुझे पानी लाकर पिलाया कर। ये सुनकर […]
गोटा लेने की जिद
मैं तब लगभग तीन वर्ष की थी और शब्दों को स्पष्ट नहीं बोल पाती थी। मुझे बर्फ का गोला बहुत पसंद था। एक दिन मैं पापा से बोली, ‘मुझे ‘गोटा (बर्फ का गोला) चाहिए। बहुत जिद करने पर पापा मेरे लिए गोटा (हनुमान जी वाला गोटे का खिलौना) ले आए। उसे देखकर मैं और ज्यादा […]
आइब्रो का मुंडन
बात है पुरानी लेकिन मन की गहराई में उतर कर आज भी मुझे गुदगुदाती है। मेरी उम्र होगी आठ या नौ साल, बचपन में नानी-मामा के यहां अपरिहार्य कारणों से रही। एक दिन मेरे मामाजी शेव करके ब्रश साफ करने बाथरूम गए, रेजर में ब्लेड लगा हुआ था। जब मामाजी शेव कर रहे थे, मैं उनको बहुत गौर से […]
