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चाक्षुष मनु – उपनिषदों की कथाएँ

Hindi Katha: स्वयंभू मनु पहले मनु हुए। इनके बाद स्वारोचित दूसरे, उत्तम तीसरे और तामस चौथे मनु हुए। इन्हीं चौथे मनु के समय भूमंडल पर अंग नाम के एक प्रतापी राजा राज्य करते थे। उनके चाक्षुष नामक एक तपस्वी पुत्र था। एक बार चाक्षुष ब्रह्मर्षि पुलह की शरण में गया और उनसे विनित शब्दों में […]

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स्वधा – उपनिषदों की कथाएँ

Hindi Katha: सृष्टि के आरम्भ में ब्रह्माजी ने सात पितृों की उत्पत्ति की। इनमें से चार मूर्तिमान थे और तीन तेज के रूप में। उन सातों पितृों के भोजन के लिए उन्होंने श्राद्ध और तर्पण में भेंट दिया हुआ पदार्थ निश्चित कर दिया। तो भूख लेकिन जब ब्राह्मणों के श्राद्ध और तर्पण के भोजन पदार्थ […]

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वेदवती – उपनिषदों की कथाएँ

Hindi Katha: सत्युग में कुशध्वज नामक एक प्रतापी राजा हुए। कुशध्वज की पत्नी का नाम मालावती था। समयानुसार उसके एक कन्या उत्पन्न हुई। वह कन्या महालक्ष्मी का अंश थी। उस कन्या ने जन्म लेते ही स्पष्ट स्वर में वेद मंत्रों का उच्चारण किया और स्वयं उठकर सूतिकागृह से बाहर निकल आई, इसलिए विद्वानों ने उसे […]

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गंगा – विष्णु विवाह – उपनिषदों की कथाएँ

Hindi Katha: राधा और गंगा दोनों ही भगवान् श्रीकृष्ण के अंश से उत्पन्न हुई थीं। इस प्रकार दोनों ही उनका साक्षात् स्वरूप थीं। एक बार गंगा देवी सुंदर रूप धारण कर भूमण्डल पर पधारीं । उनके सभी अंग रत्नों से अलंकृत थे । वे लज्जा से सिमटते हुए भगवान् श्रीकृष्ण के पास विराजमान हो गईं। […]

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गंगा – उपनिषदों की कथाएँ

Hindi Katha: एक समय की बात है – कार्तिक पूर्णिमा का दिन था भगवान् कृष्ण के धाम गोलोक में धूमधाम से वसंतोत्सव मनाया जा रहा था। परब्रह्म श्रीकृष्ण अनेक प्रकार से राधा की पूजा करके रासमण्डल में विराजमान थे । तत्पश्चात् ब्रह्मा, विष्णु, शिव, इन्द्र, अग्नि, वरुण, कुबेर आदि देवता एवं शौनक, वसिष्ठ, बृहस्पति आदि […]

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तुलसी और शंखचूड़ – उपनिषदों की कथाएँ

Hindi Katha: राजा धर्मध्वज की पत्नी का नाम माधवी था। महालक्ष्मी की कृपा से कार्तिक की पूर्णिमा के दिन माधवी के गर्भ से एक सुंदर और दिव्य कन्या उत्पन्न हुई। उस समय शुभ दिन, शुभ योग, शुभ लग्न और शुभ ग्रह का योग चल रहा था । उस कन्या का वर्ण श्याम था। उसकी दिव्य […]

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स्वाहा – उपनिषदों की कथाएँ

Hindi Katha: सृष्टि के आरम्भ में जब देवताओं की उत्पत्ति हुई तो भोजन की खोज में उन्हें यहाँ-वहाँ भटकना पड़ता था । उनकी इस समस्या का समाधान करने के लिए भगवान् विष्णु अपने अंश से यज्ञ पुरुष के रूप में उत्पन्न हुए। परमपिता ब्रह्माजी ने देवताओं से कहा कि ब्राह्मण लोग जो हवन आदि करेंगे, […]

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यज्ञ, दक्षिणा और फल – उपनिषदों की कथाएँ

Hindi Katha: किसी समय की बात है – भगवान् श्रीकृष्ण गोलोक में विराजमान थे । गोप- गोपियों ने उन्हें घेर रखा था और वे मधुर बाँसुरी बजाकर उनका दिल बहला रहे थे। इन गोपियों में सुशीला नाम की एक गोपी थी। वह भगवती राधा की प्रधान सखी थी। सुशीला एक सुंदर गोपी थी। सौभाग्य में […]

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सुरभि – उपनिषदों की कथाएँ

Hindi Katha: एक समय की बात है – भगवान् श्रीकृष्ण राधा और अन्य गोपियों के साथ वृंदावन आए। वहाँ उन्होंने राधा और गोपियों के साथ भिन्न-भिन्न क्रीड़ाओं का आनन्द लिया। फिर लीलावश वे एक स्थान पर बैठ गए। उनके मन में दूध पीने की इच्छा पैदा हुई। इस प्रकार, उसी क्षण उन्होंने अपने अंश से […]

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भ्रामरी – उपनिषदों की कथाएँ

Hindi Katha: प्राचीन समय की बात है – पाताल लोक में अरुण नाम का एक भयंकर और पराक्रमी दैत्य रहता था। एक बार उसने निश्चय किया कि वह अपने वंशजों पर अत्याचार करने वाले देवताओं को पराजित करके उनसे स्वर्ग का राज्य छीन लेगा। यह दृढ़ निश्चय करके वह हिमालय पर गया और ब्रह्माजी को […]

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