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धरती का बैकुंठ है पुरी का जगन्नाथ धाम: Jagannath Dham

Jagannath Dham: पौराणिक मान्यता है कि शेष तीन धामों में बद्रीनाथ सतयुग से, श्री रामेश्वरम् त्रेता युग से तथा द्वारका धाम द्वापर युग से संबंधित है किंतु कलियुग में सबसे पावनकारी धाम के रूप में जगन्नाथ पुरी की गणना भारत की आत्मा स्वर्ग के मार्ग के रूप में की जाती है। इस परम धाम की […]

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हिन्दू ग्रंथों में महाकुम्भ: Mahakumbh 2025

Mahakumbh 2025: महाकुम्भ की महिमा का गुणगान हमारे धर्मग्रंथों में भी मिलता है। महाकुम्भ पर क्या कहते हैं हमारे धर्म ग्रंथ व कुम्भ में स्नान के महत्त्च को? आइए जानते हैं लेख से। गंगा स्तुति: नम: शिवायै गंगायै शिवदायै नमो नम:। नमस्ते रुद्ररूपिण्यै शांकर्यै तेनमो नम:।। नन्दायै लिंगधारिण्यै नरायण्यै नमो नम:। नमस्ते विश्वमुख्यायै रेवत्यै तेनमो […]

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जाने विवाह पंचमी पर क्यों नहीं होता विवाह: Vivah Panchami

Vivah Panchami: मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को भगवान राम ने माता सीता के साथ विवाह किया था। इसलिए हर साल इस तिथि को श्रीराम विवाहोत्सव के रूप में मनाया जाता है। भगवान श्रीराम चेतना के प्रतीक हैं और माता सीता प्रकृति शक्ति की प्रतीक हैं। ऐसे में चेतना और प्रकृति का मिलन होने से ये दिन […]

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यशपाल कैसे बन गए सुधांशु जी महाराज,जानें जीवन परिचय: Sudhanshu ji Maharaj

Sudhanshu ji Maharaj: सुधांशु जी महाराज धर्म-शास्त्र के प्रचारक और विश्व जागृति मिशन (वीजेएम) के संस्थापक हैं। दुनिया भर में उनके 10 मिलियन से अधिक भक्त हैं और 2.5 मिलियन से अधिक शिष्य हैं। उन्हें उनकी सरल शिक्षाओं के लिए जाना जाता है, जो दुनिया भर के धर्मों से प्रेरित हैं। यह भी देखे-प्रवचनों से […]

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कंकालीतला शक्ति पीठ : जहां गिरी थी मां सती की कमर

देश के 51 शक्ति पीठों में से एक कंकालीतला शक्ति पीठ है, जो पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन के पास स्थित है। कहा जाता है कि देवी सती का कमर वाला हिस्सा यहीं गिरा था। अन्य मंदिरों से काफी अलग यहां का माहौल बेहद शांत और कोलाहल से कोसों दूर है। यहां मां काली के रूप […]

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सृष्टि के निर्माता ब्रह्मा की दाढ़ी से लेकर माला तक दर्शाती है बहुत कुछ

ब्रह्मा सृष्टि के रचयिता हैं और इसलिए संहार या विध्वंस से संबंधित कोई भी वस्तु उनके हाथ में नजर नहीं आती। अगर उनके प्रतीकों को बारीकी से समझा जाए तो उनका हर प्रतीक किसी ना किसी चीज को रिप्रेजेंट करता है।

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पापनाशिनी मां गंगा

युग-युगांतर से सनातनधर्मी हिंदुओं का आशंका रहित भरोसा रहा है कि गंगाजल सर्वदा पवित्र है। उसमें किसी भी मलिन वस्तु के संपक्र से मलिनता नहीं आती, अपितु जिस वस्तु से उसका स्पर्श हो जाता है वह निश्चित रुप से पवित्र तथा शुद्ध हो जाती है। भारत की पुरातन सभ्यता एवं संस्कृति ने जिस किसी भी […]

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एकता तथा सद्भावना की संगमस्थली मगहर

महान सूफी संत कबीर दास, जिनके जन्म से लेकर मरण तक को लेकर अनेक मतभेद हैं, का जन्म 1398 इसवीं के आसपास माना जाता है। उनका जन्म ऐसे समय में हुआ जबकि सामाजिक द्वंद्व , भाई-चारे का अभाव और पाखंड अपनी चरम सीमा पर था। समाज में रहने वाले हिंदू- मुसलमान एक दूसरे से दूरी […]

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अनोखा होता है भगवान जगन्नाथ का महाप्रसाद

शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो भगवान जगन्नाथ की धरती पुरी दर्शन के लिए आये और महाप्रसाद का स्वाद न चखे क्योंकि जगन्नाथ मंदिर का महाप्रसाद ही पुरुषोत्तम क्षेत्र का विशेषत्व है। इसीलिए पुरी धाम की तीर्थ यात्रा पर आये हुए सभी व्यक्ति महाप्रसाद साथ ले जाने में भी गर्व महसूस करते हैं। देश […]

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शिव भक्ति का अनूठा मेला- ‘श्रावणी मेला’

सभ्यता, संस्कृति और अध्यात्म का एक अनोखा मेला, जिसे हम श्रावणी मेला के नाम से जानते हैं,  ​का आरम्भ जुलाई से होता ​ है। शिव के जितने रूप हैं और उनकी भक्ति के जितने स्वरूप हैं वे सब इस मेले में देखने को मिलते हैं। पूरा देश सत्यम् शिवम सुंदरम हो जाता है। ‘बोल बम’ […]

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