Vivah Panchami
why marriages are not held on vivah panchami

Vivah Panchami: मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को भगवान राम ने माता सीता के साथ विवाह किया था। इसलिए हर साल इस तिथि को श्रीराम विवाहोत्सव के रूप में मनाया जाता है। भगवान श्रीराम चेतना के प्रतीक हैं और माता सीता प्रकृति शक्ति की प्रतीक हैं। ऐसे में चेतना और प्रकृति का मिलन होने से ये दिन काफी महत्वपूर्ण हो जाता है।

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जीवन सम्पूर्ण मानव जाति के लिए मार्गदर्शक है। मार्गशीर्ष माह के
शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन ही भगवान राम और सीता मैया विवाह के पावन बंधन में बंधे थे। तभी इस खास दिन को विवाह पंचमी के रूप में मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो भी जातक इस दिन
भगवान राम और सीता माता की पूजा अराधना और व्रत करते है, उनका दांम्पत्य जीवन खुशियों से भर जाता है। हालांकि ये दिन बेहद शुभ माना जाता है, मगर इस दिन शादी ब्याह करना अशुभ माना जाता है। विवाह पंचमी के दिन भगवान श्रीराम और माता सीता विवाह के पवित्र बंधन में बंधे थे। मगर शादी के उपरांत राजा जनक की पुत्री माता सीता को कई संकटों का सामना करना पड़ा। विवाह के कुछ समय बाद उन्हें 14
बरसों का वनवास काटना पड़ा। उसके बाद रावण ने सीता हरण किया। जहां श्रीराम ने युद्ध में विजय प्राप्त कर सीता को लंका से वापिस ले आए। फिर श्रीराम ने देवी सीता का परित्याग किया, जिसके बाद उन्होंने अग्निपरीक्षा दी। फिर देवी सीता ने गर्भावस्था में महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में शरण ली। वहीं माता सीता ने अपने दोनों पुत्रों लव और कुश को जन्म दिया।

वैदिक पंचाग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 5 दिसंबर, 2024 12 बजकर 49 मिनट पर होगी। वहीं तिथि का समापन 6 दिसंबर 12 बजकर 7 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, विवाह पंचमी का त्यौहार 6 दिसंबर 2024 को मनाई जाएगी।

vivaah panchamee par poojan vidhi
Vivah Panchami Pooja Vidhi

सुबह उठकर सूर्य को अर्घ्य देकर पूजाघर को साफ करके लकड़ी की चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछा दें। उसके बाद माता सीता और भगवान राम की प्रतिमा को लाल वस्त्र ओढ़ाएं। अब बालकांड में दिए गए विवाह
प्रसंग का पाठ करें और मंत्र ‘ॐ जानकीवल्लभाय नम:’ का जप करें। उसके बाद कलावे से माता सीता और भगवान राम का गठबंधन करें और फिर आरती करके भोग लगाएं। मिथिलांचल में विवाह पंचमी का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन, मिथिला परंपरा के मुताबिक, राम और सीता के विवाह का आयोजन किया जाता है।
इस दिन, मिथिला के कई राम-जानकी मंदिरों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इन कार्यक्रमों में, राम और सीता की आकर्षक झांकियां सजाई जाती हैं। साथ ही, मिथिला पद्धति से राम और सीता
का विवाह संपन्न कराया जाता है।

1. विवाह पंचमी का त्यौहार, विक्रम संवत के मुताबिक, अग्रहायण महीने (नवंबर-दिसंबर) में शुक्ल पक्ष की पांचवीं को मनाया जाता है।
2. इस दिन, मंदिरों को दीपों और रोशनी से सजाया जाता है।
3. इस दिन, भगवान राम और मां सीता की मूर्तियां स्थापित की जाती हैं और उनका पूजन किया जाता है।
4. इस दिन, रामचरितमानस के बालकांड में राम विवाह को समर्पित चौपाइयों का पाठ किया जाता है।
5. मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीराम और मां सीता के विवाह से जुड़ी कथा का वाचन करने से दांपत्य जीवन में सुख बना रहता है।
6. विवाह पंचमी के दिन सियाराम के विवाह की खुशी में पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता यह भी है कि इस दिन भगवान श्रीराम और मां सीता के विवाह से जुड़ी कथा का वाचन किया जाए, तो दांपत्य जीवन में सुख बना रहता है। वहीं अविवाहित लोगों को भी इस दिन प्रभु श्रीराम और देवी सीता का विवाह जरूर कराना चाहिए, जिससे उन्हें मनचाहा जीवन साथी मिलता है।

vivaah panchamee ke din ye kaam karen
Vivah Panchami ke din ye kaam karen

1. इस दिन सुबह उठकर स्नान करें और भगवान राम और सीता जी की पूजा करें।
2. विवाह पंचमी के दिन भगवान राम और सीता जी की मूर्ति स्थापित करें और उन्हें माला पहनाएं।
3. इस दिन भगवान गणेश के मंत्रों से विवाह की रस्में शुरू करें और हनुमान जी की पूजा करें।
4. विवाह पंचमी के दिन भगवान राम और सीता जी को फूल, माला, सिंदूर, अक्षत आदि चढ़ाएं।
5. विवाह पंचमी के दिन भोग लगाएं।
6. दीपक और धूप जलाकर चालीसा, मंत्र के साथ विवाह प्रसंग का पाठ करें।
7. विवाह पंचमी के दिन आरती करें और भूल चूक के लिए माफी मांगें।
8. विवाह पंचमी के दिन भगवान विष्णु को दूध में केसर मिलाकर अर्पित करें और तुलसी के पत्ते और पंचामृत का भोग लगाएं।
9. विवाह पंचमी के दिन गरीब लोगों को भोजन कराएं और दान करें।
10. विवाह पंचमी के दिन मंदिरों में खंड मानस का पाठ कराना शुभ माना जाता है।
11. विवाह पंचमी के दिन घी का अखंड दीप जलाना चाहिए।
12. इस दिन श्रीराम और देवी सीता का विवाह करवाना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से सुखमय जीवन की प्राप्ति होती है।
13. विवाह पंचमी के दिन बालकांड में भगवान राम और देवी सीता के विवाह प्रसंग का पाठ और स्मरण करना शुभ होता है।
14. इस दिन पूरे मन में भगवान राम और सीता मैया की पूजा अराधना करने से मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति होती है और विवाह में आ रही परेशानियां भी दूर हो जाती हैं।