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गृहलक्ष्मी की कहानियां- समाधान

मानवीय जीवन रिश्तों की खूबसूरत डोर से बंधा है, कई बार इन रिश्तों की डोर में कुछ ऐसी गिरहें बन जाती हैं जिन्हें सुलझाना मुश्किल हो जाता है…

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एंटी रैगिंग- भाग 2

इंद्राणी ने अपना दुपट्टा हटाते हुए फटा कुर्ता दिखाया फिर बोली, ‘आपको हमारी लिखित कम्पलेंट पर कार्यवाई करनी ही होगी।यह सुन प्रिंसिपल साहब ने अपनी आंखें बंद कर लीं। उनके चेहरे पर एक के बाद भाव आ रहे थे।

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एंटी रैगिंग- भाग 1

देश में शिक्षण संस्थानों में रैंगिंग की रोकथाम के लिए कठोर नियम बनाए गए हैं, पर इसके बावजूद कई संस्थानों में रैंगिंग की घटनाएं होती रहती हैं। असल में रैंगिंग पर पूरी तरह लगाम तभी लग सकता है, जब विद्यालय प्रशासन और छात्रों में स्वयं इससे निपटने की दृढ़ इच्छा शक्ति हो।

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प्रतीक्षित लम्हा- भाग 2

वह उन्हें देख कर कह उठे- ‘भावी! कितनी प्यारी है ये पहाडिय़ां और कितनी सुंदर है इन पर बर्फ से ढकी चादर। बिल्कुल तुम्हारी तरह। जी चाहता है बस तुम्हें इसी तरह निहारता रहूं। बड़ा सुख और संतोष है तुम्हारे सौंदर्य को देखने और निहारने में। और मैं मन ही मन पुलकित हो उठती। आलोग ने बताया था कि उसके घर वाले भी शादी के लिए तैयार हैं। यह कहते हुए उसने मेरे मुंह में एक टॉफी डाल दी थी, आधी अपने दांतों से काटकर। फिर हम दोनों मुस्कुराते हुए आगे बढ़ चले थे। एक साथ एक ही डगर पर।

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जानिए हिंदी भाषा पर महान व्यक्तियों के विचार – गृहलक्ष्मी कहानियां

हिंदी ना सिर्फ एक भाषा है बल्कि ये हमारी राष्ट्रीयता की पहचान भी है, ऐसे में हिंदी की महत्ता को लेकर देश के महान शख्सियतों ने काफी कुछ कहा है, जिसे जानना हम सबके लिए काफी उपयोगी है।

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शिक्षक के लिए महान व्यक्तियों के अनमोल विचार

जी हां, आज देश भर में शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है… जैसा कि आप सब जानते हैं कि भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के अवसर पर हर साल 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। दरअसल, डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने एक शिक्षक से देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति […]

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दीप -पर्व मनाएँ पारम्परिक अंदाज में

आज की भागदौड़ और रफ्तार से भागती जिंदगी में हमारी खुशियां और रिश्ते सब पीछे छूटते जा रहे हैं। व्यस्त दिनचर्या के चलते चाहते हुए भी हम अपने और अपनों के लिए वक्त नहीं निकाल पाते। ऐसे में त्योहारों का आना एक बहाना बन जाता है। खुशियों के पल जीने का।

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मैं कितना गलत थी पापा

मनाली पहुंचकर लगा, जैसे सारे जहां की खूबसूरती चारों तरफ बिखर गई हो। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह घाटी देवदार के वृक्षों से घिरी हुई थी। गीली नम हवाओं के बीच धुंध ही धुंध थी। हर रोज़ शाम से पहले बादल दरख्तों के चारों ओर बिखर जाते थे। शहर में चांद एक जगह नहीं दिखता था। लगता था, अपनी चांदनी से मिलने तेज़ी से बढ़ रहा है, पर मनाली में दरख्तों के बीच झमकता चांद रुक गया था।

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बरसाने की बारात में चौधरी – गृहलक्ष्मी कहानियां

भले ही खुद के घर में इनकी कौड़ी इज्जत ना हो पर बाहर किसी की मौत हो या शादी, ये अपना ज्ञान बघारने से बिलकुल भी नही चूकते। ऐसी चौधराहट दिखाते हैं कि घर वाले भी बाहर वाले लगने लगते हैं।

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गृहलक्ष्मी की कहानियां : दंगे वाली दुल्हन

मेरे दर्द से आपा का दर्द कुछ कम नहीं था, मगर मैं क्या करूं…? जिस दर्द को मैं भूलना चाहती थी, उसे कोई मुझे भूलने ही नहीं देता।

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