Posted inहिंदी कहानियाँ

तेज़ाब – गृहलक्ष्मी कहानियां

तेज़ाब से किसी चेहरे को बिगाड़ देने जैसी हरकत वे लोग करते हैं, जो कभी भी अपनी शख्सियत को संवार नहीं पाते। क्या वाकई तेज़ाब का असर किसी के बुलंद हौसलों से ज़्यादा होता है, जानिए इस सशक्त कहानी द्वारा-

Posted inहिंदी कहानियाँ

आजकल की लड़कियों की पहली पसंद – गृहलक्ष्मी कहानियां

हमें आज दर्द का एहसास तभी क्यों होता है, जब वह खुद हमें ही या हमारे अपनों को ही होता है? जब एक अपराधी सज़ा से बचता है, उसी पल सौ अपराधों की पृष्ठभूमि तैयार हो जाती है। प्रस्तुत है ऐसी ही एक सटीक-सशक्त और प्रासंगिक कहानी-

Posted inहिंदी कहानियाँ

मूछों वाली देवरानी – गृहलक्ष्मी कहानियां

अरे! कविता बेटा, जरा मेहमानों के लिए चाय नाश्ता तो ला। जी अम्मा, अभी लाई। मैं मेहमानों के सामने चाय और पकौड़े रख कर आ गई। वैसे तो अम्मा कभी मुझसे बहुत खास खुश नहीं रहती पर आज बहुत खुश है। देवरजी का रिश्ता जो आया है। मेरी परिवार में मैं हूं, मेरे पति जो कि एक अध्यापक हैं, मेरी प्यारी सासू मां जिन्हें मैं प्यार से अम्मा कहती हूं और मेरे देवर जी। देवरजी पढ़ने में बहुत अच्छे थे। थोड़े ही प्रयास में उन्हें अमेरिका में नौकरी मिल गई। जब से वह बाहर गए हैं मां के तो पैर ही जमीन पर नहीं रहते।

Posted inहिंदी कहानियाँ

उम्मीद – गृहलक्ष्मी कहानियां

मेरे विचारों में पहले से अधिक लचीलापन आ गया है। क्योंकि जिन्दगी सब चीजों से अधिक कीमती है। ये बात सही है क्वारटांइन का एंकात पीड़ा देता है पर यह खुद को करीब से महसूस भी करवाता है।

Posted inहिंदी कहानियाँ

एंटी रैगिंग – गृहलक्ष्मी कहानियां

आसमान में लालिमा छाने लगी थी। उत्साह से भरे पंक्षी अनंत आकाश के विस्तार को नाप लेने के लिए अपने पंखों को फैला कर उड़ान भरने लगे थे। फर्राटा भरते वाहनों ने सड़कों के सूनेपन को मिटाना शुरू कर दिया था। सोया हुआ शहर जाग उठा था।

Posted inहिंदी कहानियाँ

समीकरण – गृहलक्ष्मी कहानियां

आसमां से विधाता भी अपनी इस कृति (इंसान) को देख निहाल हो रहा था। ‘विपरीत से विपरीत परिस्थिति में भी सकारात्मक और आशावादी बने रहकर तू विजयी हो ही जाता है। धन्य है तू!

Posted inहिंदी कहानियाँ

अवसरवाद की महिमा – गृहलक्ष्मी कहानियां

समाजवादी कहते हैं कि वे समाजवाद के समर्थक हैं। पूंजीवादी कहते हैं कि वे पूंजीवाद के समर्थक हैं। यदि अवसरवाद के कोई संस्थापक होंगे तो उन्हें जान कर अफसोस होगा कि अवसरवाद के कट्टर समर्थक भी यह मानने के लिए तैयार नहीं होते कि वे अवसरवादी हैं।

Posted inपंचतंत्र की कहानियां, हिंदी कहानियाँ

संगीतज्ञ गधा : पंचतंत्र की कहानी

पुराने समय की बात है। एक धोबी के पास बूढ़ा और कमजोर गधा था लेकिन धोबी उस पर बहुत ज्यादा काड़ों का बोझ रख कर उन्हें धोने ले जाता था गधे का मालिक उसे भूखा रखता था इसलिए रात के समय गधा पास के ही खेतों में फसल खाने पहुंच जाता।

Posted inपंचतंत्र की कहानियां, हिंदी कहानियाँ

सारस और चतुर केंकड़ा: पंचतंत्र की कहानी

बहुत समय पहले की बात है। तालाब के किनारे एक सारस रहता था। तालाब में मछलियों की कमी नहीं थी इसलिए वह मज़े से अपना पेट भरता।

Gift this article